सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य भर में 25,753 शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों की नौकरी चली गई है. इनमें से 350 लोग सिलीगुड़ी और आसपास के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत थे. उनके परिवार में कोहराम मचा हुआ है. एक ही झटके में यह परिवार सड़क पर आ चुका है. बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है. शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों की टेंशन इस वजह से बढ़ गई है कि इसमें उनका अपराध क्या है!
अगर पूरा सिस्टम (स्कूल सेवा आयोग) ही ठीक नहीं था तो राज्य सरकार ने उस पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया. कई लोगों ने सरकारी नौकरी के लिए काफी कुछ गंवाया है. किसी ने अपना घर गिरवी रख दिया तो किसी ने अपनी बीवी के जेवर बेचकर रुपए उठाए. ऐसे लोगों पर ही ज्यादा गाज गिरी है. नौकरी तो गई ही, पैसा भी हाथ से निकल गया. इसलिए उनके परिवार में हडकंप मच गया है. राज्य सरकार कह रही है कि स्कूल सेवा आयोग एक स्वतंत्र इकाई है और उसका राज्य सरकार से कोई लेना देना नहीं है. हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सहानुभूति उनसे जरूर जुड़ी है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी नौकरी ग॔वायी है.
सिलीगुड़ी जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव प्रमाणिक के अनुसार सिलीगुड़ी में लगभग 350 लोग लोगों की नौकरी गई है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि शिक्षा विभाग की ओर से कोई सटीक सूची नहीं दी गई है. मिली जानकारी के अनुसार नील नलिनी विद्या मंदिर में 11 शिक्षकों की नौकरी चली गई है. नेताजी हाई स्कूल सिलीगुड़ी में चार शिक्षकों की नौकरी छिन गई है. जबकि फोर्थ ग्रुप डी कर्मचारियों में से दो लोगों की नौकरी चली गई है. सिलीगुड़ी गर्ल्स हाई स्कूल में पांच शिक्षकों की नौकरी चली गई है. खोरीबारी ब्लॉक के सात हाई स्कूलों में 32 शिक्षकों तथा 6 शिक्षा कर्मियों की नौकरी चली गई है.
ममता बनर्जी ऐसे लोगों के साथ खड़े होने की बात कह रही है. उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिन लोगों की नौकरी गई है, उन लोगों ने न्याय के लिए डिप्राइव टीचर्स एसोसिएशन नामक एक संगठन बनाया है. 7 अप्रैल को मुख्यमंत्री स्वयं संगठन के प्रतिनिधियों से मिलने जाएंगी और उनकी बात सुनेंगी. नौकरी छिन जाने वाले लोगों को मुख्यमंत्री आश्वस्त कर रही है कि वह धैर्य रखें. उनके साथ वे खड़ी हैं. जरूर कोई ना कोई रास्ता निकलेगा. अदालत ने आवेदन करने को कहा है. जब प्रक्रिया शुरू हो जाएगी तो आप जरूर आवेदन करें.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सवाल करती हैं कि अगर इतनी भारी संख्या में शिक्षकों की नौकरी चली जाएगी तो बच्चों को स्कूलों में पढ़ाएगा कौन? आंकड़े के अनुसार नौवीं दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले 11610 शिक्षकों की नौकरी गई है. जबकि 11वीं और 12वीं में पढ़ाने वाले 596 शिक्षकों की नौकरी चली गई है. बच्चों का भविष्य बनाने के लिए यह जरूरी है कि जल्द से जल्द शिक्षक स्कूल में जगह लें.इसीलिए उन्हें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो समय दिया है, उस समय में काम शुरू हो जाए. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से भरसक कोशिश की जा रही है.
जो भी हो ,सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने सिलीगुड़ी के शिक्षा जगत में एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है. प्रभावित शिक्षक और गैर शिक्षक लोग और उनके परिवार तो संकट में है ही, इसके साथ ही बच्चों का भविष्य भी दोराहे पर खड़ा है. अगर जल्द ही स्कूलों में बच्चों की शिक्षा का उचित उपाय नहीं ढूंढा गया तो शिक्षा जगत में अराजकता की स्थिति उत्पन्न होगी.
नौकरी गवाने वाले शिक्षकों का क्या होगा, यह तो बाद की बात है. परंतु फिलहाल राज्य सरकार को एक वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत है. राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टेंशन इससे ज्यादा बढ़ गई है. उधर विपक्षी पार्टियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेवार बताया है और उनके इस्तीफे की मांग की है. विपक्षी पार्टियों की ओर से कहा जा रहा है कि 2016 के स्कूल सेवा आयोग पैनल में भर्ती प्रक्रिया में अनियमिताओं को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे. लेकिन राज्य सरकार ने इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. ऐसे में दोष किसका है?
(अस्वीकरण : सभी फ़ोटो सिर्फ खबर में दिए जा रहे तथ्यों को सांकेतिक रूप से दर्शाने के लिए दिए गए है । इन फोटोज का इस खबर से कोई संबंध नहीं है। सभी फोटोज इंटरनेट से लिये गए है।)