August 29, 2025
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी के निकटवर्ती इलाकों में चल रहा पत्थरों को तोड़ने और खनन का अवैध धंधा!

सिलीगुड़ी के आसपास के इलाकों खासकर नदी वाले भागों में नदी में बहकर आए चट्टानों और पत्थरों को मशीनों के द्वारा तोड़ने,खनन करने और व्यावसायिक काम में लगाने का चोरी छिपे धंधा खूब चल रहा है. महानंदा, पंचनई और विभिन्न नदियों में पत्थरों को तोड़कर व्यावसायिक कार्यों में उपयोग में लाने के लिए कुछ रसूखदार लोगों के संरक्षण में मशीनों के द्वारा कार्य किया जा रहा है. जानकारी मिल रही है कि रात के समय इन मशीनों का इस्तेमाल पत्थरों तथा चट्टानों को तोड़ने,खनन करने और उनकी बिक्री के लिए किया जाता है. इस कार्य में बाकायदा एक सिंडिकेट काम करता है, जिनमें कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत होती है.

जहां इस तरह का अवैध धंधा किया जा रहा है, उन इलाकों में जलपाईगुड़ी जिले का एलेनबाड़ी- वासाबाड़ी इलाका भी शामिल है. सूत्रों ने बताया कि यहां काफी समय से गैर कानूनी रूप से पत्थर क्रशर का यह धंधा चल रहा है. लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसे में स्थानीय लोग इसके खिलाफ जागने लगे हैं.एक स्थानीय निवासी हर्क बहादु छेत्री ने अब इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक शिकायत पत्र लिखा है. जिसमें इस मामले की तत्काल जांच और दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई की मांग की गई है.

हर्क छेत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि यहां पत्थरों को तोड़ने का काम बिना उचित परमिट और प्रशासनिक अनुमति के संपन्न हो रहा है.स्टोन क्रशिंग के कारण यहां के लोगों का जीवन दूभर होता जा रहा है. क्योंकि स्टोन क्रशिंग से क्षेत्र में पर्यावरण की क्षति, शोर प्रदूषण और धूल मिट्टी से मकान पटने लगे हैं. लोगों में विभिन्न तरह की बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि न केवल मानव बस्ती में ही, बल्कि चाय बागान क्षेत्र को भी इससे गंभीर नुकसान पहुंच रहा है.

इस पत्र में दावा किया गया है कि स्थानीय एक सिंडिकेट के द्वारा यह अवैध धंधा किया जा रहा है. इस धंधे में उदलाबाड़ी और आसपास के कुछ लोग शामिल हैं, जो पत्थरों के खनन और क्रसिंग के कार्य का संचालन कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कार्य के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई अनुमति नहीं ली गई है और ना ही पर्यावरण का यहां ध्यान रखा जा रहा है. शिकायतकर्ता हर्क छेत्री ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि इससे सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है. यह दावा किया गया है कि इस कार्य के लिए कुछ लोग नकली जीएसटी चालान का उपयोग कर रहे हैं और सरकार को चूना लगा रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोगों के अवैध धंधे के चलते उनका जीवन असुरक्षित हो गया है. पत्थर खनन और पत्थरों को तोड़ने के काम के चलते दैनिक जीवन और रोजमर्रे के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि ऐसे अवैध धंधे को तत्काल बंद किया जाए और दोषी अधिकारियों तथा व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए. स्थानीय निवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर प्रशासन ने तत्काल इस पर ध्यान नहीं दिया तो वे भविष्य में इसके विरोध में जोरदार आंदोलन पर मजबूर होंगे.

शिकायतकर्ता हर्क छेत्री द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की एक प्रति हमारे खबर समय कार्यालय को भी भेजी गई है. खबर समय के अलावा शिकायतकर्ता ने जलपाईगुड़ी के जिला पुलिस अधीक्षक, जिला अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि को भी चिट्ठी भेजी है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. देखा जाए तो सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में पत्थरों का खनन और उन्हें मशीनों के द्वारा छोटे टुकड़ों में विभाजित करने का धंधा कोई नया नहीं है. इस कार्य में अनेक सिंडिकेट लगे हुए हैं. कुछ रसूखदार लोगों के संरक्षण में यह धंधा चलता है. इसलिए पुलिस भी चाह कर कोई कार्रवाई नहीं कर पाती है. पहले भी ऐसे मामलों का पर्दाफाश किया गया था.

यह धंधा पर्यावरण के लिए हानिकारक तो है ही, यह मानव स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा सरकार को गंभीर आर्थिक नुकसान तो होता ही है, कृषि को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है. यही कारण है कि इस तरह के धंधे सरकारी स्तर पर केवल सुरक्षित क्षेत्रों में ही किया जाता है. परंतु कुछ लोगों को सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना होता है. इसलिए वे किसी भी नियम और कानून को नहीं मानते हैं.अब देखना होगा कि शिकायतकर्ता हर्क छेत्री द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र पर सरकार कब संज्ञान लेती है और इस पर क्या कार्रवाई करती है.

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