पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मैनेज कर रही I- PAC कंपनी पर इडी की रेड के बाद भाजपा ही नहीं, माकपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग कर दी है. इसी के साथ ही राजनीतिक गलियारों में बंगाल में राष्ट्रपति शासन की चर्चा तेज हो गई है.
जिस तरह से बृहस्पतिवार को कोलकाता में प्रतीक जैन के फर्म और ठिकानों पर इडी की रेड के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वहां से कुछ फाइलों को उठाया था और जांच अधिकारियों की कार्रवाई का विरोध किया था, उसके बाद सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक यह चर्चा शुरू हो गई है कि ममता बनर्जी ने जिस फाइल को सुरक्षित किया, आखिर उसमें ऐसा क्या राज छिपा है? सोशल मीडिया में यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या किसी जांच एजेंसी के काम में मुख्यमंत्री को दखलअंदाजी करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है?
हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा है कि वह जो फाइल घटनास्थल से उठा ले गई थी, वास्तव में वह आगामी विधानसभा चुनाव में उनके उम्मीदवारों की लिस्ट थी. उन्होंने जांच एजेंसी इडी पर आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उनके आईटी सेल से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी की है. तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और दिल्ली से लेकर कोलकाता तक आर पार की लड़ाई शुरू कर दी है. दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने धरना प्रदर्शन किया. हालांकि दिल्ली पुलिस ने टीएमसी के सांसदों को वहां से जबरन हटा दिया.
इडी की कार्रवाई और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी को लेकर बंगाल पुलिस तृणमूल कांग्रेस की ओर से इडी के खिलाफ कोलकाता में दो मुकदमे दर्ज हुए हैं, तो उधर इडी ने छापेमारी में बाधक बनने का ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है. इसको लेकर इडी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उधर टीएमसी भी हाई कोर्ट पहुंच गई. भारी हंगामे के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई टाल दी और अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी निर्धारित की है.
बहरहाल इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. ममता बनर्जी की इडी पर कार्रवाई ने भाजपा समेत विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है. भाजपा ने इसे संघीय एजेंसी में बाधा करार दिया है. और राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई है. उधर सीपीएम के मोहम्मद सलीम ने अपने बयान में कहा है कि ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन को बचाया. क्योंकि भ्रष्टाचार के सभी दस्तावेज उनके पास हैं. उन्होंने ममता बनर्जी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है.
भाजपा ने इसे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का बचाव बताया है और पूछा है कि अगर कुछ छिपाने को नहीं है तो मुख्यमंत्री जांच स्थल पर क्यों गई और वहां से फाइल क्यों ले गई? इडी ने अपने बयान में कहा है कि उनकी छापेमारी कोयला घोटाला से जुड़े हवाला मामले में चल रही थी और मुख्यमंत्री ने बीच में छापेमारी में बाधक बनने की कोशिश की. इडी ने कहा है कि ममता बनर्जी ने जिस फाइल को वहां से हटाया है, वह उनकी जांच का बिंदु है.
जिस तरह से यह मामला गरमाता जा रहा है, उसके बाद कानून के जानकार मान रहे हैं कि अगर कोलकाता पुलिस ने यह साबित कर दिया कि इडी की कार्रवाई अवैध है और इडी ने जानबूझकर टीएमसी के पर्सनल रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी की है, तो ममता बनर्जी गिरफ्तारी से बच सकती है. हालांकि यह साबित करना बंगाल पुलिस के लिए आसान नहीं होगा. दूसरी तरफ ईडी अधिकारियों की गिरफ्तारी तो दूर की रही, इडी कोर्ट में यह साबित कर सकती है कि उनके कामों में मुख्यमंत्री ने दखल देने की कोशिश की तथा उनकी जांच के महत्वपूर्ण कागजात उठा ले गई.
ऐसे में ममता बनर्जी की गिरफ्तारी हो सकती है. जबकि इडी अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है. क्योंकि उनके पास पीएमएलए की धारा 67 का कवच है. यह कोई पहला मामला नहीं है जब मुख्यमंत्री और टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी के कार्य का विरोध किया हो. 2019 में भी उन्होंने सीबीआई रेड के दौरान धरना दिया था और तब उस समय भी यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगेगा?
आज एक बार फिर से यह चर्चा शुरू हो गई है. कानून के जानकार मानते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा. इसमें कई तरह की जटिलताएं आ सकती हैं. यह स्थिति तब आती है जब राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब हो और संवैधानिक संकट उत्पन्न होने लगे. बहर हाल यह देखना होगा कि इडी का अगला कदम क्या होता है! केंद्र सरकार इस पूरे मामले को किस तरह से लेती है? क्या केंद्र सरकार बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए तैयार है? क्या राज्यपाल बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश राष्ट्रपति से कर सकते हैं? आज दिन भर सियासी गलियारो में यह चर्चा का विषय बना रहा.
