सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल के लोगों को निपाह वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है. बंगाल में दस्तक दे चुके निपाह वायरस से अब तक दो लोग संक्रमित हो चुके हैं और उनका इलाज चल रहा है. यह खतरनाक बीमारी है, जिससे बचाव ही उसका इलाज भी है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों और अधीक्षक संजय मलिक ने लोगों को भरोसा दिया है कि वे निपाह वायरस से आतंकित ना हो. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वायरस की टेस्टिंग की सारी व्यवस्था है. यहां यह संक्रमण न फैले, इसके लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ-साथ जिला स्वास्थ्य विभाग भी सभी तरह के कदम उठा रहा है. बंगाल सरकार ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है.
निपाह वायरस कोई पहली बार बंगाल में नहीं फैला है. इससे पहले भी 2010 में निपाह वायरस का संक्रमण हुआ था. इस बार उत्तर 24 परगना जिले के दो पुरुष नर्सों को संक्रमण हुआ है. वे 5 जनवरी से ही बीमार थे. कल्याणी एम्स में उनका टेस्टिंग किया गया तो पता चला कि वे निपाह वायरस से संक्रमित थे. उन्हें बारासात प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उनका डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा है. मिल रही जानकारी के अनुसार बीमार व्यक्तियों की टेस्टिंग में निपाह वायरस की पुष्टि हो चुकी है. सरकार ने डॉक्टरों से सावधानी बरतने की अपील की है.
बंगाल में दस्तक दे चुके निपाह वायरस से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की है और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. बंगाल सरकार अपने स्तर पर भी वायरस से निपटने की कोशिश कर रही है. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी अस्पतालों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है. जो दो व्यक्ति संक्रमित हुए हैं, उनकी पृष्ठभूमि का मुआयना करने पर पता चला है कि वे दिल्ली से आए थे और वर्धमान गए थे, जहां उन्हें संक्रमण हुआ हो सकता है. हालांकि डॉक्टर इस पर और छानबीन कर रहे हैं.
राज्य में निपाह वायरस की दस्तक के साथ ही सरकार ने एक हेल्पलाइन जारी कर दिया है. अगर किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार, सर में दर्द ,मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द इतना ज्यादा कि उसका सहन करना मुश्किल हो, इसके साथ ही उल्टी, पेट का खराब रहना, सांस लेने में तकलीफ इत्यादि के लक्षण रोगी में पाए जाते हैं तो उसे अस्पताल और डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए. क्योंकि ये लक्षण निपाह वायरस के भी हो सकते हैं.
विशेषज्ञों ने बताया है कि निपाह वायरस चमगादड़ से इंसान में फैलता है. यह सर्वप्रथम सूअरों को संक्रमित करता है. उसके पश्चात इंसान में फैलता है. यह एक खतरनाक रोग है. जो संक्रमित व्यक्ति, कुछ खास फल और सूअरों के संपर्क में आने से व्यक्ति में फैल सकता है. कोरोना की तरह ही है. इंसान से इंसान में फैलने वाला रोग है. विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार निपाह वायरस एक खतरनाक रोग है, जिसका कोरोना की तरह ही कोई निश्चित इलाज नहीं है.डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही इलाज करते हैं.
अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो रोगी को निमोनिया भी हो सकता है .इसमें जान जाने का खतरा रहता है. निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ होने में उसकी इम्यूनिटी का बहुत बड़ा हाथ होता है. अगर किसी व्यक्ति की इम्यूनिटी कमजोर हो तो उसे तेज संक्रमण से जूझना पड़ सकता है. लेकिन अगर रोगी की इम्युनिटी मजबूत हो तो वह जल्दी ही स्वस्थ हो जाता है.हालांकि सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सीय अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया है. फिर भी सिलीगुड़ी के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.

