January 14, 2026
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वोटर लिस्ट से 1 करोड़ नाम हटाने की साजिश : ममता बनर्जी का बड़ा आरोप

Conspiracy to remove 1 crore names from voter list: Mamata Banerjee's big allegation

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के नाम पर राज्य से करीब एक करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। मंगलवार को नवान्न में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर सीधा हमला बोला।

मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक लगभग 54 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह वैध मतदाता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर लोगों को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कारण बताओ नोटिस भेजा गया। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया,
“जब लोगों को यह तक नहीं पता कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कट चुका है, तो वे आपत्ति कैसे दर्ज कराएंगे?”

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एकतरफा फैसले लेने और भाजपा के हित में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर ‘भाजपा के गुलाम’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं और आम मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे जरूरी दस्तावेज दिखाने के बावजूद भी कई लोगों को ‘अयोग्य’ घोषित किया जा रहा है।

CM ममता ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और अभिनेता-सांसद देव जैसे प्रतिष्ठित लोगों के नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा,
“अगर रवींद्रनाथ टैगोर आज जीवित होते, तो शायद उन्हें भी चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेज दिया जाता।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल के साथ अलग और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी भी करीब 70 लाख लोगों की सुनवाई बाकी है, इसके बावजूद नाम हटाने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।

इस बीच विवाद तब और गहरा गया, जब बांकुड़ा जिले के खात्रा इलाके में एक भाजपा नेता की गाड़ी से करीब 4,000 फॉर्म-7 (मतदाता सूची से नाम हटाने के आवेदन पत्र) बरामद होने का मामला सामने आया। ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन फॉर्मों की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि यही वोटर लिस्ट से नाम कटवाने की साजिश का ठोस सबूत है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और राज्य सरकार मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेगी। साथ ही उन्होंने जिलाशासकों, एसपी, बीएलओ और बीएलए समेत सभी अधिकारियों को सतर्क रहने तथा अवैध रूप से कागजी दस्तावेज ले जाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।

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