पूर्वोत्तर राज्यों को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी चिकन नेक अभेद्य किला बनने जा रहा है. यानी इसकी मजबूती अभेद्य किले की तरह ही होगी. जिस तरह से केंद्र सरकार ने योजना बनाई है, अगर यह योजना पूरी होती है तो आने वाले समय में सिलीगुड़ी चिकन नेक न केवल मजबूत और सुरक्षित होगा, बल्कि दुश्मन इस पर आंख भी टेढी नहीं कर सकेंगे. अगर यहां हमला होता भी है, तब भी चिकन नेक को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी.
भारत के लिए चिकन नेक का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि अगर चिकन नेक पर कोई हमला होता है तो पूर्वोत्तर के सात राज्यों की अस्थिरता बढ़ जाएगी. यह एक संकरा मार्ग है, जो लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा है. यह सिलीगुड़ी से होकर गुजरता है और पूर्वोत्तर के राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है. यही कारण है कि सरकार चिकन नेक की सुरक्षा और संभावित हमले से निपटने के लिए व्यापक प्रबंध करती रही है.
जब भी बांग्लादेश अथवा चीन की ओर से कोई हलचल शुरू होती है,तब भारतीय सेना चिकन नेक की सुरक्षा के लिए अलर्ट हो जाती है. चिकन नेक की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि यह स्थान नेपाल भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है. बांग्लादेश का अधिकांश भाग चिकन नेक को कवर करता है. यही कारण है कि समय-समय पर बांग्लादेश की ओर से चिकन नेक को लेकर धमकी दी जाती रही है. इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यहां भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाने का फैसला किया है.
योजना के अनुसार इस ट्रैक पर बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी. यह ट्रेन वाराणसी से सिलीगुड़ी तक चलेगी. अगले चरण में इसका विस्तार किया जाएगा, जो वाराणसी से दिल्ली तक और सिलीगुड़ी से चिकन नेक होते हुए गुवाहाटी तक जाएगी. क्योंकि चिकन नेक संकरा है और सामरिक दृष्टिकोण से संवेदनशील भी है. ऐसे में सरकार ने इसका सही उपयोग करते हुए भूमि के नीचे से ही ट्रैक बिछाने का फैसला किया है और इसके लिए धनराशि भी आवंटित कर दी है.
चिकन नेक के नीचे से 40 किलोमीटर भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाया जाना है. यह तीन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच बिछाया जाएगा. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव के अनुसार सिलीगुड़ी चिकन नेक भौगोलिक रूप से काफी संकरा होने के कारण इसकी सुरक्षा के लिए वैकल्पिक योजना की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. संकट की स्थिति में कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए जमीन के नीचे एक वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता का होना जरूरी है.
कुछ दिन पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्र सरकार की योजना का खाका खींचते हुए कहा था कि सिलीगुड़ी चिकन नेक की सुरक्षा हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है. यह सामरिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है और उतना ही संवेदनशील भी है. ऐसे में सरकार की योजना है कि सिलीगुड़ी चिकन नेक के नीचे से जो रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जाएगा, वह भारत के लिए एक सुरक्षित और अभेद्य मार्ग बन सके.
विशेषज्ञ और जानकार भी मानते हैं कि सरकार इस तरह से चिकन नेक का बेहतर उपयोग भी कर सकेगी और दुश्मन का माकूल जवाब दे सकेगी. लेकिन यह तभी संभव है जब सरकार की कार्य योजना क्षितिज पर आए. इसमें समय लग सकता है. यह काम इतना आसान भी नहीं है. लेकिन अगर सरकार की नीयत अच्छी हो तो हर कठिन काम भी आसान बन सकता है!
