खाने पीने के सामान की क्वालिटी और अपनी सेहत का ख्याल रखने वाले सिलीगुड़ी के एक सम्मानित व्यक्ति ने अपने किचन के लिए बाजार में ऐसी वस्तुओं की तलाश शुरू कर दी जो शुद्ध , बेदाग और मिलावट रहित हों. पहले तो उन्होंने ब्रांडेड दुकान और ब्रांडेड सामान पर फोकस किया, पर ब्रांडेड उत्पादों के चमकते रैपर, आकर्षक पैकिंग और आकर्षक पन्नियों के भीतर उनका स्वाद चखा, तो उन्हें चक्कर सा आने लगा. क्योंकि उन्हें विश्वास था कि स्थापित कंपनियों के द्वारा बेचे जाने वाले ब्रांडेड उत्पाद कभी घटिया नहीं होते हैं. लेकिन ब्रांडेड कहे जाने वाले उत्पादों के इस्तेमाल के बाद उनका यह भ्रम भी टूट गया.
आज यह बात आपको इसलिए भी बताना जरूरी हो गया है कि वर्तमान समय में बाजार पर भागम भाग और भौतिकवाद हावी है. दुकानदार से लेकर कंपनियां अधिक से अधिक मुनाफे और आर्थिक लाभ कमाने के लिए असली के नाम पर नकली और मिलावटी सामान बेच रही हैं. इस रेस में छोटी और नई कंपनियों, दुकानदारों, थोक विक्रेताओं के अलावा बड़ी-बड़ी कंपनियां भी शामिल हो गई हैं. भौतिकवाद की होड़ में शामिल इन कंपनियों के द्वारा असली के नाम पर ग्राहकों को घटिया सामान थमाया जा रहा है.
हालांकि इस तरह के भी मामले सामने आए हैं, जहां कुछ दुकानदारों रसूखदार लोगों और एजेंटों की मिली भगत से ब्रांडेड उत्पादों के डुप्लीकेट उत्पाद तैयार किए जाते हैं और ऐसे उत्पादों को ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट से मिलते जुलते पैकेट छपवाकर भरा जाता है. ऐसे उत्पाद खाकर एक ओर लोग बीमार पड़ते हैं तो दूसरी तरफ प्रतिष्ठित कंपनियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग जाती है. समय-समय पर ऐसे मामलों का पुलिस और अपराध शाखा ने खुलासा भी किया है. पर भौतिकवाद की अंधी दौड़ में शामिल ऐसे लोगों पर कोई असर नहीं पड़ता. हमारा कानून भी कुछ ऐसा है कि दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और वे जमानत पर बड़ी आसानी से छूट जाते हैं.
इस मामले का एक खतरनाक पहलू यह भी है कि कंपनियों की ओर से उपभोक्ता को शत प्रतिशत शुद्ध और क्वालिटी देने का वादा किया जाता है. इस संदर्भ में उनके बड़े-बड़े विज्ञापन मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है. इससे लोग कहीं ना कहीं भ्रमित हो जाते हैं. आज संसद में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने इसी विषय पर एक बहुत ही अच्छा सवाल उठाया है, जो देश की 140 करोड़ आबादी की सेहत से जुड़ा है. राघव चड्ढा ने सदन में बताया कि आज बाजार में बिक रहा कोई भी ऐसा सामान नहीं है, जिसे शुद्ध कहा जा सके. दूध से लेकर हर उस वस्तु जिसका हम रोजाना इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें मिलावट और खतरनाक रसायन पाया गया है.
राघव चड्ढा ने कहा कि जिस दूध को विटामिन और खनिजों से युक्त मानकर एक मां अपने बच्चों को दूध पिलाती है, वह वास्तव में खतरनाक और नुकसान देह है. क्योंकि दूध में कई तरह के केमिकल मिलाए जाते हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है. राघव चड्डा ने सवाल उठाया है कि हमारे देश में दूध की जितनी खपत है, उतना तो यहां उत्पादन भी नहीं होता. फिर यह दूध कहां से आता है! जाहिर है कि यह नकली दूध है. इसी तरह से उन्होंने मसाले, मिठाई, सब्जी और सभी तरह के उपभोक्ता सामानों की शुद्धता पर सवाल उठाया है और सदन से मांग की है कि अगर भारत को स्वस्थ तथा खुशहाल बनाना है तो सर्वप्रथम फसाई को अधिक शक्तिशाली बनाने की जरूरत है.
राघव चड्ढा ने कहा है कि फसाई को अधिक से अधिक अधिकार दिए जाने की जरूरत है. सदन को ऐसे कानून बनाना चाहिए जो मिलावट और घटिया क्वालिटी के सामान बेचने वाली कंपनियों अथवा व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा दिला सके. उपरोक्त के अलावा सरकारी पहल, सजगता कार्यक्रम और सरकार की नीयत भी जरूरी है. उपभोक्ता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले दुकानदारों अथवा कंपनियों का लाइसेंस जब्त किया जाना चाहिए ताकि ऐसे लोग जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं कर सके. इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि ग्राहक तो जागे ही, इसके साथ ही सरकार भी जागे. शायद राघव चड्डा का संदर्भ भी यही था.
