March 10, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी में भूकंप का खतरा बढा, जोन-6 में!

सिलीगुड़ी में भूकंप को लेकर चिंता की बात जरूर है. यहां कभी भी अत्यंत तीव्रता का भूकंप आ सकता है. ऐसे में यहां जान माल को भारी नुकसान पहुंच सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी भी जारी की है. भारत में लागू किए गए नए भूकंपीय जोन 6 में सिलीगुड़ी को जगह दी गई है.

दिसंबर 2025 में भारतीय मानक ब्यूरो ने हिमालय क्षेत्र में उच्च भूकंपीय जोखिम के कारण सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड के बड़े हिस्से को जोन 6 में वर्गीकृत करते हुए एक नया मानचित्र पेश किया था, जो पहले के जोन 5 से भी अधिक खतरनाक है. हालांकि मार्च 2026 में निर्माण लागत में भारी वृद्धि की चिताओं के कारण इस नए जोन 6 को वापस ले लिया गया है.

आखिर सिलीगुड़ी को उच्च भूकंप जोखिम क्षेत्र में क्यों रखा गया है? विशेषज्ञों के अनुसार सिलीगुड़ी की मिट्टी बलुई मिट्टी है. यानी सिलीगुड़ी की मिट्टी भुरभुरी और काफी कमजोर है. ऐसी मिट्टी में भवन निर्माण होने से भवन कमजोर रहता है. अगर भूकंप का तेज झटका आता है तो ऐसे भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है. अगर इमारत की नींव कमजोर है तो उसे काफी नुकसान हो सकता है.

विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सिलीगुड़ी के बिल्डरों और डेवलपरों को भवन निर्माण करते समय वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों का सही तरीके से पालन करना होगा. दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि उन्हें भूकंपरोधी मकान बनाने होंगे, जिस पर लागत अधिक आएगी. हालांकि डेवलपर और बिल्डरों को किसी क्षेत्र में मकान बनाते समय वहां के जोन के हिसाब से नियमों का पालन करना होता है.

किसी समय सिलीगुड़ी जोन 4 क्षेत्र में आता था. अत: यहां बड़े भूकंप का खतरा नहीं था. ऐसे में प्रशासन भी बिल्डरों और डेवलपरों के काम पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था. बिल्डर और डेवलपर नक्शा पास कराने से लेकर बिल्डिंग निर्माण तक मनमानी करते थे. अब विशेषज्ञों की चिंता के बाद सिलीगुड़ी प्रशासन ने भी इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. मिल रही जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन बिल्डरों और डेवलपरों के लिए कुछ जरूरी नियम बना रहा है.

उदाहरण के लिए इमारत निर्माण से पहले मिट्टी की जांच अनिवार्य की जाएगी. भवन का नक्शा जिओ स्ट्रक्चरल इंजीनियर से पास कराना होगा. इमारत का डिजाइन भूकंप रोधी मानकों के अनुसार होना चाहिए और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच जरूरी होगी. सिलीगुड़ी नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि बहुमंजिली इमारत के नियम को लेकर प्रशासन कुछ कडे कदम उठाने जा रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम दृढ संकल्प है कि भवन निर्माण की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित बनाया जाए. सूत्रों ने बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन शहरी विकास एवं नगर मामलों के विभाग से भी बात कर रहा है.

सवाल यह है कि निर्माण कार्यों में बढती लागत को देखते हुए जब सरकार ने नए सीस्मिक जोन 6 मानक को वापस ले लिया है और भवन निर्माण के लिए पहले वाला 2016 का मानक फिर से लागू कर दिया है, तो ऐसे में प्रशासन को भी पुराने नियमों के दायरे में बिल्डिंग निर्माण की अनुमति देनी होगी, जिसका कमोबेश पालन बिल्डर और डेवलपर करते ही हैं.

हां, प्रशासन के द्वारा बिल्डिंग निर्माण की मजबूती के संदर्भ में आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं. जैसे कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों में मजबूत और गहरी नींव बनाना, भवन के आसपास पर्याप्त खुली जगह और सुरक्षित निकास होना, समय-समय पर भवन का स्ट्रक्चर निरीक्षण करना इत्यादि शामिल है. इसके साथ ही बिल्डरों को पूरी तरह से जिम्मेदार बनाना होगा.

वर्तमान में बहुमंजिली इमारतों की डिजाइन सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार की जाती है. ऐसे सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होता है. तभी एक गुणात्मक निष्कर्ष सामने आता है. प्रशासन सॉफ्टवेयर के अपडेट को लेकर विशेषज्ञों की मदद ले सकता है. यह भी देखना होगा कि कम से कम खर्चे में भूकंप रोधी मानक के अनुरूप भवन का निर्माण किस प्रकार से हो सके.

सिलीगुड़ी में ऐसे बहुत से जर्जर मकान हैं, जहां लोग रहते हैं. ऐसे मकानों की समय-समय पर जांच और उसका निरीक्षण जरूरी है. सिलीगुड़ी नगर निगम को इस दिशा में त्वरित कदम उठाने की जरूरत है. सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन ऐसे सभी तरह के कदम उठाने के लिए तैयार है जिससे अगर सिलीगुड़ी में भूकंप आता है तो जान माल का नुकसान कम से कम हो सके.

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