पहाड़ की तीन विधानसभा सीटों दार्जिलिंग, कालिमपोंग और कर्सियांग में सबसे शांत विधानसभा सीट है कर्सियांग विधानसभा सीट, जो खामोशी से अपने प्रतिनिधि का फैसला करता है. 2021 के विधानसभा चुनाव में कर्सियांग विधानसभा सीट से भाजपा ने जीत दर्ज की थी. भाजपा उम्मीदवार विष्णु प्रसाद शर्मा को 73,475 वोट मिले थे. जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी शेरिंग लामा को 57960 वोट मिले थे. इस बार विष्णु प्रसाद शर्मा भाजपा से अलग हो गए हैं और उन्होंने टीएमसी ज्वाइन कर लिया है.
विष्णु प्रसाद शर्मा उम्मीद लगाए बैठे हैं कि टीएमसी उन्हें यहां से उम्मीदवार बना सकती है. यहां से भाजपा भी अपना उम्मीदवार उतारेगी. इसके अलावा अनित थापा की पार्टी और अजय एडवर्ड की पार्टी भी अपना उम्मीदवार उतार सकती है. हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन पार्टियों के द्वारा बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा किया जाएगा या स्थानीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे. जब चुनाव की घोषणा हो जाएगी, तब राजनीतिक दलों की हलचल भी बढ़ेगी.
इस बीच कर्सियांग के शामी लाखांग मठ के बौद्ध धर्म गुरु पेंबा रिमपोछे ने सभी राजनीतिक दलों को स्थानीय व योग्य उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारने की सलाह दी है. बौद्ध धर्म गुरु यहां एक महत्वपूर्ण हस्ती हैं और लगभग सभी वर्गों में उन्हें श्रद्धा और सम्मान प्राप्त है.धर्मगुरु ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी की जीत या हार से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों को सही प्रतिनिधित्व मिले. उनका झुकाव अजय एडवर्ड की की तरफ है. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि अगर अजय एडवर्ड ने बाहरी उम्मीदवार उतारा तो वह उनका साथ नहीं देंगे.
बौद्ध धर्म गुरु पेंबा रिमपोछे के इस सुझाव के बाद पहाड़ के क्षेत्रीय दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस महत्वपूर्ण सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला होने के आसार हैं. इस बार यहां से कौन पार्टी विजयी होगी, यह बहुत कुछ राजनीतिक दल, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और उनके द्वारा किए गए कार्यों पर निर्भर करेगा. कर्सियांग विधानसभा क्षेत्र में कर्सियांग नगर पालिका, मिरिक नगर पालिका, कर्सियांग, मिरिक और रंगली रंगलियोट कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक, जोर बंगलो सुखिया पोखरी ब्लॉक से 5 ग्राम पंचायत और माटीगाड़ा ब्लॉक से 3 ग्राम पंचायत आती हैं.
कर्सियांग विधानसभा सीट 1951 में अस्तित्व में आई. अखिल भारतीय गोरखा लीग और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट दोनों क्षेत्रीय दलों ने यह सीट चार-चार बार जीती है. जीएनएलएफ ने 1991 और 2006 के बीच लगातार चार बार जीत हासिल की. जबकि वाम मोर्चा ने पांच बार यह सीट जीती है. गोरखा जन मुक्ति मोर्चा ने दो बार यह सीट जीती है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक-एक बार यहां जीत हासिल की है.
पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की थी. कर्सियांग में भाजपा का प्रभाव भी है और अपने इसी प्रभाव के सहारे भाजपा यहां से स्थानीय उम्मीदवार को टिकट दे सकती है. लेकिन वह उम्मीदवार कौन होगा, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है. सूत्र बता रहे हैं कि यहां के क्षेत्रीय दल भी उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में जुट गए हैं. यहां से जीत उसी पार्टी और उम्मीदवार को मिलने के आसार हैं, जिसका व्यक्तिगत प्रभाव पहाड़ के लोगों को प्रभावित करता है.
पिछले कुछ समय से कर्सियांग विधानसभा क्षेत्र में एक अलग ट्रेंड देखने को मिल रहा है. यहां भाजपा के प्रभाव को कम करके नहीं देखा जा सकता है. 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कर्सियांग में सबसे अधिक सफलता हासिल की थी. 2009 के संसदीय चुनाव में भाजपा ने माकपा के उम्मीदवार को 1,35,913 वोटो के बड़े अंतर से हराया था. इसमे कर्सियांग विधानसभा सीट का योगदान सबसे बड़ा था. तभी से भाजपा स्थानीय लोगों की पसंद बनती जा रही है. यहां के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि पहाड़ के कुछ स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दे हैं, जिनका केवल केंद्र सरकार ही समाधान कर सकती है. इसका भी असर यहां दिखता है.
कर्सियांग एक समय सिक्किम राज्य का हिस्सा था. दार्जिलिंग जाने वाली सड़क के किनारे होने की वजह से कर्सियांग एक हिल स्टेशन बन गया है. 1879 में कर्सियांग को नगरपालिका का दर्जा मिला. यह खूबसूरत स्थान है. ऊंची पहाड़ी और जंगली इलाका है. यह स्थान बालासन, मेची,महानदी और तीस्ता नदियों से बने चार वाटरशेड इलाकों में आता है. यहां चाय बागान के मतदाता वोट प्रक्रिया में अधिक उत्साह से भाग लेते हैं. सभी क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी को चाय बागान के मतदाताओं से उम्मीद है. लेकिन मतदाता उनमें से किस दल या उम्मीदवार को अपना समर्थन देते है, यह तो चुनाव के दिन ही पता चलेगा.
