एक तरफ केंद्र सरकार कह रही है कि भारत में एलपीजी सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी. उत्पादन बढ़ा दिया गया है. तो दूसरी तरफ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जारी अधिसूचना साफ-साफ संकेत कर रही है कि एलपीजी की वितरण व्यवस्था संकट में है. अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एलपीजी व प्राकृतिक गैस प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ही भेजा जाएगा. यानी घरेलू आपूर्ति तो होगी. वाणिज्यिक आपूर्ति नहीं हो सकेगी.
जहां तक घरेलू गैस आपूर्ति का प्रश्न है तो सिलीगुड़ी से लेकर पूरे भारत में लोग इस संकट का सामना कर ही रहे हैं. गैस वितरक एजेंसियों के गोदाम के आगे सुबह से ही लोगों की लाइन लग जाती है. अगर घरेलू गैस आपूर्ति सामान्य रहती तो क्या ऐसा नजारा दिखता? एक बार कोविड 19 के समय लोगों ने संकट का सामना किया था. एक बार फिर से कुछ ऐसा ही संकट देश पर मंडरा रहा है.
कॉविड-19 के समय मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए गए थे. इस बार गैस आपूर्ति नहीं होने से मंदिरों में प्रसाद वितरण का काम ठप्प पड़ गया है. कोलकाता और देश के दूसरे धार्मिक महानगरों से आ रही खबरें तस्दीक कर रही है कि भक्तों को अब भगवान का प्रसाद मिलना दुर्लभ हो जाएगा. क्या पता कल सिलीगुड़ी के मंदिरों में भी प्रसाद वितरण का काम रोकना पड़ जाए !क्योंकि जब वाणिज्यिक गैस आपूर्ति नहीं होगी तो प्रसाद कैसे बनेगा! जो स्थिति बन रही है आने वाले कुछ दिनों में सभी प्रसिद्ध और बड़े मंदिरों में इस तरह का नजारा देखा जा सकता है!
सिलीगुड़ी के निकट दार्जिलिंग एक हिल स्टेशन है, जो पर्यटन के लिए विश्व विख्यात है. दार्जिलिंग की अर्थव्यवस्था पर्यटन एवं होटल उद्योग पर निर्भर करती है.वहां वाणिज्यिक गैस आपूर्ति बाधित हो जाने से पर्यटन व्यवसाय एवं होटल उद्योग संकट में है. दार्जिलिंग में 2017 से ही दुर्भाग्य की दस्तक ऐसी रही है कि हमेशा कुछ ना कुछ प्राकृतिक विपदा अथवा किसी न किसी कारण से पर्यटन व्यवसाय से लेकर होटल व्यवसाय दुर्भाग्य का सामना कर रहा है.
कोविड-19 के समय से लेकर सिक्किम आपदा, पहलगाम अटैक अप्रैल 2025, दार्जिलिंग मिरिक भूस्खलन अक्टूबर 2025 और इस तरह से दार्जिलिंग की त्रासदी ऐसी रही है कि यह कभी संभल ही नहीं पाया है. इस समय दार्जिलिंग, सिक्किम और पहाड़ी इलाकों में काफी संख्या में पर्यटक आते हैं. लेकिन खाड़ी युद्ध ने पर्यटकों को मुसीबत में ला दिया है. अब स्थानीय पर्यटकों पर ही दार्जिलिंग का कारोबार चल रहा है. लेकिन एलपीजी गैस की आपूर्ति न होने से होटल उद्योग चरमराने लगा है. इसका प्रभाव स्थानीय पर्यटकों पर पड़ता दिख रहा है.
स्थिति ऐसी है कि यहां होटल उद्योग पर कब ताला लग जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है. दार्जिलिंग नगर पालिका क्षेत्र में कम से कम 4000 से 5000 लोग होटल में किसी न किसी रूप में काम करते हैं. उनकी रोजी-रोटी और नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है. एलपीजी गैस की आपूर्ति न होने से यहां के रेस्टोरेंट, दुकान, टैक्सी सेवा सब प्रभावित हो रहा है. यही कारण है कि दार्जिलिंग होटलियर एसोसिएशन ने आपदा के तुरंत निवारण के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को खत लिखा है.
इसमें डीएम से अनुरोध किया गया है कि तत्काल प्रभाव से दार्जिलिंग में वाणिज्यिक गैस आपूर्ति के लिए हस्तक्षेप करें अन्यथा दार्जिलिंग का पर्यटन एवं होटल उद्योग पर ताला लग सकता है. इस तरह से समतल से लेकर पहाड़ तक जो हालात बन रहे हैं, वह काफी विकट हैं. अब जब प्रशासन ने ही हाथ खड़ा कर लिया है, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में कुछ नहीं है, तो ऐसे में जनता को ही सब झेलना होगा. देखिए कब तक लोगों को राहत मिल रही है. वैसे खाड़ी युद्ध जल्द खत्म होगा, इसके आसार नजर नहीं आ रहे हैं!
