इस कलियुग में रिश्ते लगातार टूट रहे हैं. पति-पत्नी के रिश्ते, पिता पुत्र के रिश्ते, पुत्र एवं मां के रिश्तो में लगातार दूरियां बढ़ती जा रही हैं. समाज में स्वार्थ एवं फरेब इस कदर लोगों के सिर चढ कर बोल रहा है कि भौतिकवाद एवं आत्मीय सुख के लिए आत्मीय एवं खून के रिश्तों की तिलांजलि देते देर नहीं लगती.
सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा और उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आसपास घटी एक घटना दिल दहला देने वाली है. एक पिता ने अपने उस मासूम बेटे की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि वह उसका सौतेला बेटा था. पिता नहीं चाहता था कि पति-पत्नी के संबंधों के बीच कोई तीसरा रहे. लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर उस मासूम का क्या कसूर?
पुलिस सूत्रों, आरोपी पिता से पूछताछ, आरंभिक जांच और अन्य अन्य सूत्रों पर आधारित इस घटना की पृष्ठभूमि में समाज की बदलती और कलुषित होती विचारधाराएं शामिल है, जहां संवेदनशीलता और ममता सिसकती है और सिसक सिसक कर दम तोड़ देती है.
शीतलकूची के रहने वाले उत्तम बर्मन ने सावित्री बर्मन से विवाह किया था. सावित्री राय बर्मन के पहले पति का देहांत हो चुका था. उनसे एक पुत्र था, जिसका नाम अरिजीत बर्मन था. पति की मौत के बाद पहाड़ सी जिंदगी सुख से कटे, इसी उम्मीद में सावित्री राय बर्मन ने उत्तम बर्मन से दूसरा विवाह कर लिया था.
उत्तम बर्मन सावित्री को पसंद करता था. वह यह जानते हुए भी कि सावित्री एक बेटे की मां है, उससे शादी करना चाहता था. सावित्री बर्मन ने उत्तम से शादी करने के लिए प्रस्ताव रखा, जिसमें उसने कहा था कि उसके बेटे को वह अपनाएगा और बाप का नाम देगा. शादी के बाद कुछ दिनों तक सब ठीक-ठाक रहा. अरिजीत उसका सगा बेटा नहीं था, इसलिए वह चाह कर भी दिल से उसे अपना बेटा स्वीकार नहीं कर सका. दूसरी तरफ मासूम अरिजीत भी बाप के प्यार-दुलाड़ से वंचित रह रहा था.
अरिजीत 13 साल का हो चुका था. वह कुछ-कुछ समझदार और स्थितियों को समझने लगा था. उसे पिता उत्तम का बर्ताव पसंद नहीं आ रहा था. इसलिए वह उससे खिंचा खिंचा रहता था. सावित्री वर्मन ने कोशिश की कि पिता पुत्र का संबंध करीब हो सके. उनके बीच की दूरियां मिट सके. मगर ऐसा नहीं हुआ. जब-जब उत्तम ने अरिजीत को अपनाने की कोशिश की, उसके दिल से आवाज आ रही थी कि वह उसका सगा बेटा नहीं है. बस दिल की इसी आवाज ने सौतेले बेटे के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण दिया. इसी का परिणाम रहा कि एक साजिश के तहत उसे मार डाला.
अरिजीत की हत्या की योजना बनाकर उत्तम बर्मन कावाखाली इलाके में पहुंचा, जहां सावित्री बर्मन रहती थी. कुछ देर के बाद उत्तम बर्मन अरिजीत को कुछ दिलाने के बहाने अपनी बाइक पर बैठा कर घर से निकल गया. एक सूनसान जगह देखकर उसने अपने हाथों गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और उसकी लाश को गाजोलडोबा के पास एक नहर में फेंक दिया. उत्तम बर्मन की निशानेदेही पर यहीं से पुलिस ने अरिजीत का सड़ा गला शव बरामद किया और उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद उसकी मां सावित्री बर्मन के हवाले कर दिया.
सावित्री बर्मन को शुरू से ही उत्तम बर्मन पर शक रहता था. एक तरफ उत्तम बर्मन उसे काफी चाहता था तो दूसरी तरफ वह उसकी औलाद को नापसंद करता था. जब लगातार एक हफ्ते तक अरिजीत घर नहीं लौटा तो सावित्री वर्मन ने उत्तम बर्मन के खिलाफ मेडिकल फाड़ी में अपहरण और बेटे को गायब करने की रिपोर्ट दर्ज कराई . यह घटना 13 मार्च की है.
मेडिकल फाड़ी की पुलिस ने सावित्री बर्मन की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए अरिजीत की बरामदगी के लिए उत्तम को गिरफ्तार करने के लिए शीतलकुची पहुंची और छापेमारी कर उत्तम बर्मन को गिरफ्तार कर लिया. उसे सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश कर पुलिस ने पूछताछ के लिए उसे रिमांड पर लिया. रिमांड की अवधि में उत्तम वर्मन ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने सौतेले पिता के खिलाफ हत्या, साजिश व अपहरण के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस इस मामले की तहकीकात में जुट गई है.
