April 19, 2026
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पहाड़ में गठबंधन बदल देने से भाजपा को कितना लाभ होगा? नीरज जिंबा का टिकट कटने से भाजपा को कितना नुकसान?

भारतीय जनता पार्टी की नई लिस्ट में दार्जिलिंग से नोमन राय को टिकट दिया गया है. जबकि कालिमपोंग सीट से हॉकी के पूर्व खिलाड़ी भरत छेत्री को उम्मीदवार बनाया गया है. कर्सियांग सीट से भाजपा ने सोनम लामा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. दार्जिलिंग सीट से वर्तमान विधायक नीरज जिंबा का टिकट कट गया है. नीरज जिंबा के समर्थन में कई नेता और कार्यकर्ता उतर आए हैं. उम्मीदवार और गठबंधन बदलने को लेकर पहाड़ में भाजपा के प्रति असंतोष दिखाई दे रहा है. मनोज दीवान और राजेन मुखिया ने भाजपा नेतृत्व को 24 घंटे की मोहलत दी है.

भाजपा की दूसरी लिस्ट में रूपा गांगुली, निशित प्रमाणिक और प्रियंका टिंबरेवाल जैसी हस्तियों को जगह मिली है. पार्टी ने इस बार पूर्व आईपीएस डॉक्टर राजेश कुमार और पूर्व टीएमसी नेता तापस राय समेत फिल्मी सितारों पर भी दाव लगाया है, जिससे बंगाल का चुनावी मुकाबला अब और कड़ा और रोमांचक हो गया है. बीजेपी का यह दांव बंगाल की सत्ता में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है.

लेकिन हम बात पहाड़ का करेंगे. इस बार दार्जिलिंग सीट से भारतीय जनता पार्टी ने नीरज जिंबा का पत्ता काट दिया है, जिन्हें पूरा भरोसा था कि पार्टी उन्हें ही टिकट देगी. नीरज जिंबा दार्जिलिंग में एक महत्वपूर्ण हस्ती के रूप में जाने जाते हैं और राजू बिष्ट के करीबी भी हैं. आखिर यह उलट फेर कैसे हो गया? क्या इसके पीछे पार्टी की कोई और मजबूरी रही या फिर चुनाव जीतने की कोई रणनीति रही थी. यह जानने से पहले भाजपा के घोषित पहाड़ के उम्मीदवारों पर एक नजर डालते हैं.

कालिमपोंग से भाजपा की उम्मीदवारी कर रहे भरत छेत्री का हॉकी में शानदार कॅरियर रहा है. लंदन में आयोजित 2012 ओलंपिक खेलों में उन्होंने भारतीय टीम का नेतृत्व किया था. 2001 मे ढाका में आयोजित प्रधानमंत्री स्वर्णकप टूर्नामेंट भी उन्होंने खेला. अक्टूबर 2011 में चार देशों की सुपर सीरीज और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया था. 2012 में सुल्तान अजलन शाह कप में भी भरत छेत्री 18 सदस्यीय भारतीय टीम के कप्तान थे. उनकी कप्तानी में भारत ने कांस्य पदक जीता था.

दार्जिलिंग से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नोमन राई गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के युवा अध्यक्ष हैं. लेकिन वह भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 2021 के अपने पुराने साथी गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा को छोड़कर विमल गुरुंग के गोरखा जन मुक्ति मोर्चा को प्राथमिकता दी है. सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से विमल गुरुंग की दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ गुप्त बैठक चल रही थी,उसी का यह परिणाम है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने साथी को दर किनार कर दिया है. भाजपा ने विमल गुरुंग की पार्टी को दो सीट दी है, जिसमें दूसरी सीट मदारीहाट है.

कर्सियांग से भाजपा के उम्मीदवार सोनम लामा एक युवा चेहरा है. दार्जिलिंग पहाड़ की राजनीति हमेशा से गोरखालैंड की मांग और क्षेत्रीय पहचान के इर्द-गिर्द घूमती रही है. 2021 में भाजपा ने यहां मजबूत प्रदर्शन किया था. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा ने पहले ही तीनों सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिये है. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा ने दार्जिलिंग से विजय कुमार राई, कर्सियांग से अमर लामा और कालिमपोंग से रुदेन सदा लेपचा को मैदान में उतारा है.

अगर पहाड़ में भाजपा उम्मीदवारों की स्थिति की बात करें तो आज से भाजपा उम्मीदवारों के द्वारा पहाड़ में चुनाव प्रचार शुरू हो गया है. पहाड़ में यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि भाजपा के द्वारा पुराने साथी को छोड़ने और नए साथी से गठबंधन करना उसके लिए कितना लाभदायक हो सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अजय एडवर्ड की पार्टी इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट पर बीजेपी की सफलता निर्भर करती है. अजय एडवर्ड की पार्टी टीएमसी पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. अजय एडवर्ड अनित थापा से भी दूरी बनाकर चलते हैं.

उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि पहाड़ की तीनों सीटों पर उनकी पार्टी उम्मीदवार देगी. क्योंकि बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन ही उनका सपना है. अगर अजय एडवर्ड की पार्टी इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट पहाड़ की तीनों सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारती है तो यहां मुकाबला त्रिकोणात्मक हो सकता है. ऐसी स्थिति में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा को बढ़त मिल सकती है. लेकिन दूसरी तरफ अजय एडवर्ड भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करते हैं तो यह समीकरण पूरी तरह बदल सकता है.

क्योंकि उस हालत में पहाड़ में मुख्य रूप से दो दल होंगे, जिनके बीच कांटे का मुकाबला होगा. एक तरफ भाजपा और दूसरी तरफ भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा. वर्तमान में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा यहां मजबूत स्थिति में है. हालांकि यह शुरुआती चरण है. इसलिए अभी से कुछ कहना कठिन है. उम्मीदवारों के द्वारा चुनाव प्रचार शुरू किया जा रहा है. अजय एडवर्ड के द्वारा अभी तक पहाड़ में उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है, जिससे सियासी अटकलें तेज हो गई है. अगर ऐसा होता है तो पहाड़ में भाजपा मजबूत स्थिति में होगी और भाजपा का परंपरागत वोट भी नहीं बटेगा. बहरहाल देखना होगा कि पहाड़ की राजनीति किस दिशा में जाती है.

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