March 20, 2026
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भारत समेत दुनिया पर मंडरा रहा भयावह संकट!

भूल जाइए कि गैस त्रासदी जल्द खत्म होने वाली है. भूल जाइए कि शहर के होटलों और रेस्टोरेंट में ऑर्डर का खाना तुरंत उपलब्ध हो जाएगा. भूल जाइए कि गैस गोदाम में एलपीजी सिलेंडर के लिए भाग दौड़ थम जाएगी. और भूल जाइए कि पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफा नहीं होगा! इसकी शुरुआत आज से ही हो गई है.

तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर ₹2 का इजाफा किया है तो वहीं इंडियन आयल कॉर्पोरेशन ने इंडस्ट्रियल डीजल 87 रुपए 57 पैसे से बढ़कर 109 रुपए 59 पैसे प्रति लीटर कर दिया है. यह स्थिति दर्शाता है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उथल-पुथल मच गई है.

इसका असर भारतीय पेट्रोल पंपों पर भी दिखने लगा है. हालांकि राहत की बात यह है कि इसका असर अभी आम जनता पर नहीं पड़ेगा. क्योंकि तेल कंपनियों ने नॉर्मल पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. प्रीमियम पैट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों का असर ऐसे लोगों पर पड़ेगा, जो अपनी लग्जरी कार या बाइक में हाई परफार्मेंस वाला पेट्रोल डलवाते हैं.

जिस तरह से मिडल ईस्ट के हालात बन रहे हैं, इस बीच विशेषज्ञों और राजनीतिक पंडितों ने भविष्यवाणी कर दी है कि भारत समेत दुनिया भर के देशों में भयावह संकट आने वाला है. गैस और तेल के लिए हाहाकार मचने वाला है. दरअसल इजराइल ने ईरान के गैस फील्ड पर हमला कर दिया. बदले में ईरान ने खाड़ी के कई ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं.

इन हमलों से सऊदी, यूएई ,कतर, कुवैत के गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. कतर की सरकारी तेल गैस कंपनी कतर एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्वीकार किया है कि ईरान के हमले में गैस रिफाइनरियों को इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे ठीक करने में 5 साल लग सकते हैं. इसका यह भी अर्थ है कि अगर युद्ध खत्म भी होता है तो वैश्विक गैस आपूर्ति का संकट लंबे समय तक बना रह सकता है.

कतर की गैस आपूर्ति वैश्विक LNG बाजार का लगभग पांचवा हिस्सा थी. इनमें से लगभग 80% विकासशील देशों को भेजी गई थी अगर इसका निर्यात लंबे समय तक बाधित रहता है तो दुनिया भर में गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है. भारत LNG की जरूरत के लिए मुख्य रूप से कतर पर निर्भर करता है.

अगर कतर का उत्पादन रुक जाता है और स्ट्रेट आफ होरमुज में तनाव बढ़ जाता है, तो निश्चित रूप से आपूर्ति श्रृंखला छिन्न-भिन्न हो जाएगी. भारत हर साल LNG का 1.4 करोड़ टन से ज्यादा आयात करता है और एलपीजी का 80 से 85% सऊदी आदि देशों से मंगाता है.

मौजूदा हालात को देखते हुए दुनिया भर के विशेषज्ञ और राजनीतिक पंडित लोगों को चेता रहे हैं. यूरोपीय बेंचमार्क कीमत 30% तक बढ़ गई है. कंसलटेंसी MST मार्की के रिसर्च प्रमुख सॉल कावोनिक ने कहा है कि हम अब एक भयावह गैस संकट की स्थिति की ओर तेजी से रहे हैं. युद्ध खत्म होने के बाद भी LNG की सप्लाई में बाधा महीनो और सालों तक बनी रह सकती है. इस कारण गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

अगर यह युद्ध और विनाशक होता है तो आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि दुनिया की क्या हालत होने वाली है. भारत एक विकासशील राष्ट्र है. सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत पर इसका बड़ा असर होगा.

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