क्या आपने महसूस किया है कि भले ही डीजल और पेट्रोल के दाम में सरकार और तेल कंपनियों ने कोई वृद्धि नहीं की है, इसके बावजूद चीज महंगी होती जा रही है. दूध से लेकर होटल में बनी हर एक चीज महंगी होती जा रही है.
अभी तक तो आकलन में यह कहा जा रहा था कि मध्य पूर्व खाड़ी देशों के युद्ध का असर पूरे विश्व पर होगा और भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. यह आकलन देश में तेल और गैस की किल्लत, ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में तेल कटौती तथा दुनिया भर के देशों में पेट्रोल और डीजल के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि के आधार पर किया गया था. और संभावना व्यक्त की जा रही थी कि भारत में महंगाई रिकॉर्ड तोड़ेगी.
आज भले ही ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर हो चुका है परंतु 40 दिनों के इस युद्ध में अमेरिका और ईरान समेत इसराइल ने क्या-क्या खोया है, जब उसका अनुमान और क्षति का आकलन लगाया जाएगा, तो इसका असर दुनिया के देशों पर सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती महंगाई के रूप में सामने आएगा.
आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी देशवासियों को सावधान कर दिया है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने वाली है. इसके लिए जनता तैयार रहे.
कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिया था कि वैश्विक संकट के इस दौर में देशवासी चुनौतियों का डटकर सामना करें. जिस तरह से कोरोना के समय देशवासियों ने आपसी एकजुटता के साथ कोरोना का मुकाबला किया था, उसी तरह से चुनौतियों से निबटने का यह समय है. आज आरबीआई ने भी चेतावनी देकर धमाका कर दिया है.
निश्चित रूप से यह खबर एक आम जनता के लिए कष्टपूर्ण हो सकती है, जो विभिन्न तरह की चुनौतियों और अभाव से जूझ रही है. पहले से ही रोजी-रोटी और महंगाई से त्रस्त एक आम आदमी की सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि उसका चूल्हा कैसे जलेगा!
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 4.6% रखा है. जबकि वित्तीय वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4% किया है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बिना बदलाव के 4% पर रखा है. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.2% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है. इसी तरह से वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7% से बढ़ाकर 5.02% कर दिया है.
इन आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि आम आदमी को अगले साल तक राहत नहीं मिलने वाली है. सरकारी आंकड़ों से ज्यादा स्थानीय मुद्दे और वस्तुओं की अनुपलब्धता महंगाई को बढ़ाती है, जो अत्यधिक होती है. हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत अब तक अपरिवर्तित रही है. लेकिन इसके बावजूद खुदरा महंगाई बढ़कर 3.021% हो गई, जो 11 महीने में सबसे अधिक है. थोक कीमत 1 साल से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर 2.3% पर पहुंच गई.
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.9 लगाया है. यह वित्त वर्ष 2026 के अनुमान 7.4% से कम है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8% है. यह पहले 6.9% था. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रियल जीडीपी अनुमान 6.9 रखा गया है. इन आंकड़ों से स्पष्ट हो जाता है कि देशवासियों को अगले डेढ 2 साल तक महंगाई के झटको का सामना करता रहना पड़ सकता है.
