May 8, 2026
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सावधान! सिलीगुड़ी में 50 लाख की साइबर ठगी से सनसनी!

सिलीगुड़ी में साइबर ठगी की घटनाएं कोई नई नहीं है. यहां आए दिन साइबर जालसाजों के लोग शिकार होते रहते हैं. साइबर थाने में कुछ ही मामले पहुंच पाते हैं. ज्यादातर मामलों में पीड़ित व्यक्ति अपनी व्यथा को किसी से कह नहीं पाता है. इस बीच आज सिलीगुड़ी में साइबर ठगी का 50 लाख का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो हैरान कर देने वाला है.

यह घटना कुछ समय पहले की है. एक दिन की बात है. अनूप दास अपने दफ्तर में बैठे कुछ कार्य कर रहे थे .तभी उनके मोबाइल पर किसी ने फोन किया. अनूप दास ने फोन नहीं उठाया. कुछ देर रुक कर फिर से फोन की घंटी बजी. लेकिन अपने कार्य में मशगूल अनूप दास ने फोन नहीं उठाया. जब लगातार तीन-चार बार घंटी बजती रही, तब उन्होंने फोन उठाया. दूसरी तरफ से कहा गया कि वह एक पुलिस अधिकारी हैं और महाराष्ट्र से बोल रहे हैं. पुलिस का नाम सुनते ही अनूप दास चौकन्ने हो गए.

दूसरी तरफ से कहा गया कि पुलिस ने अब्दुल सलीम नमक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने उनके नाम से फर्जी सिम कार्ड जारी कर करोड़ों रुपए की ठगी की है. पुलिस ने अब्दुल सलीम को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन उनके नाम से फर्जी सिम होने के कारण उनके खिलाफ भी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. यह मामला कोर्ट तक जा चुका है. ऐसे में पुलिस इन्वेस्टिगेशन करना चाहती है. यह कहकर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया गया. यह घटना 14 अप्रैल की है.

अनूप दास की समझ में कुछ नहीं आया. एक अजीब तरह का सस्पेंस छा गया. उन्होंने कॉल बैक करना चाहा. लेकिन दूसरी तरफ से घंटी बजती रही. फोन किसी ने नहीं उठाया. अनूप दास इस बारे में पुलिस से विस्तार से जानना चाहते थे. इस घटना के ठीक 2 दिन बाद एक बार फिर से उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल आया. अनूप दास को पता चल गया कि दो दिन पहले आए पुलिस अधिकारी का ही कॉल है. उन्होंने वीडियो कॉल उठा लिया और कथित पुलिस अधिकारियों दीप जायसवाल तथा संदीप राय से बातचीत करने लगे.

वीडियो कॉल पर उनकी बातचीत चलती रही. अनूप दास ने महसूस किया कि वह कथित पुलिस अधिकारियों की बातचीत के अंदाज से प्रभावित हो गए हैं. और इस तरह से उनके झांसे में आ गए हैं. कथित पुलिस अधिकारियों ने अनूप दास को कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई. इसके बाद उन्हें विश्वास हो गया कि सामने वाला झूठ नहीं बोल रहा है. इससे अनूप दास घबरा गए. उन्होंने तथाकथित पुलिस अधिकारियों से पूछा कि उन्हें क्या करना चाहिए. तब तथाकथित पुलिस अधिकारियों ने सत्यापन जांच में उनका सहयोग करने के बदले और मामले को रफा दफा करने के लिए उनसे 50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी.

अनूप दास के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था. उन्होंने बिना किसी से सलाह मशवरा किये या परिवार वालों को बताए बगैर उक्त राशि उनके खाते में ट्रांसफर कर दी. अनूप दास ने कहा है कि जिस तरह से उन लोगों को उनकी कुंडली का पता चला था, ऐसे में उनकी बात पर यकीन करना उनकी मजबूरी थी. लेकिन इस सच का दूसरा पहलू यह था कि उन्होंने 50 लाख अपने खाते में ट्रांसफर कराने के बाद फिर से अनूप दास से और रुपए ऐंठने के लालच में 30 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग कर दी और यहीं पर अनूप दास को लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है.

अनूप दास ने और पैसे देने से मना कर दिया. जब उन्हें एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो गए हैं, तब उन्होंने अपने बड़े भाई से इस संबंध में बातचीत की. तत्पश्चात दोनों भाइयों ने सिलीगुड़ी पुलिस थाने और पश्चिम बंगाल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. 2 दिन पहले पुलिस की ओर से उन्हें जानकारी मिली कि उनकी शिकायत की जांच करने के बाद पुलिस ने ठगों से लगभग 3.50 लाख रुपए बरामद कर लिए हैं. बाकी रकम भी बरामद कर ली जाएगी.

अनूप दास जरूर खुश किस्मत है, जिन्हें ठगी के रुपए मिल जाएंगे. लेकिन इस तरह की ठगी के मामले में ठगों तक पहुंचना आसान नहीं होता है. सिलीगुड़ी के रंजू अग्रवाल, मनीष अग्रवाल जैसे व्यक्ति साइबर ठगों के शिकार हो चुके हैं. साइबर ठगों ने सिलीगुड़ी पर ऐसा शिकंजा कसा है कि अगर जरा सी भी चूक हो गई तो आप साइबर ठग के शिकार हो सकते हैं. लिहाजा सतर्क रहने की जरूरत है.

अगर आपको किसी भी तरह का संदेह हो तो तुरंत साइबर अपराध पर शिकायत दर्ज कराए या नजदीकी साइबर थाना को बताएं. अज्ञात नंबर से आने वाले फोन कॉल या वीडियो कॉल आदि को इग्नोर कर दें. सिलीगुड़ी पुलिस लगातार साइबर अपराध के खिलाफ सजगता अभियान चला रही है. इस तरह से सजगता और सतर्कता रखकर ही साइबर ठगों के जाल से बच सकते हैं.

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