May 8, 2026
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क्या पहाड़ में GTA को भंग कर देगी भाजपा सरकार?

दार्जिलिंग पहाड़ पर नए युग का आरंभ हुआ है. यहां की वादियों में खिलता कमल पहाड़ में नई संभावनाओं को मजबूती दे रहा है. भाजपा की सहयोगी पार्टियों के तेवर चरम पर हैं. जबकि तृणमूल कांग्रेस समर्थित संगठन में मातम पसरा है. उधर ममता बनर्जी की सरकार के पतन के बाद डबल इंजन की भाजपा सरकार ने जीटीए को लेकर कयासों का बाजार गर्म कर दिया है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा सुनी जा रही है कि बंगाल में भाजपा की नई सरकार जीटीए की व्यवस्था को भंग कर सकती है.

कुछ समय पहले राजू विष्ट ने इस संदर्भ में अपने बयान में संकेत दिया था. भारतीय जनता पार्टी चुनाव से पहले पहाड़ के स्थाई राजनीतिक समाधान की बात कर चुकी है. दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिमपोंग तीनों ही विधानसभा सीटों से भारतीय जनता पार्टी के या तो समर्थित अथवा भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवार चुनाव जीत चुके हैं. चुनाव में GTA के अध्यक्ष अनित थापा की करारी हार हुई है.

अनित थापा GTA के चेयरमैन है और पहाड़ की कई नगर पालिकाओं में उनका प्रभुत्व है. तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से उन्होंने GTA को चलाया तो विपक्ष की ओर से भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते चले गए. GTA के भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने वाले नेताओं में राजू बिष्ट भी शामिल रहे. उन्होंने संकेत दिया है कि बंगाल की नई भाजपा सरकार GTA के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराएगी.

उधर विधानसभा चुनाव में पहाड़ में विमल गुरुंग एक शक्तिशाली नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं. उन्होंने अनित थापा को चुनौती दी है. विमल गुरुंग ने घोषणा की है कि वे 14 मई को लाल कोठी का घेराव करेंगे. जबकि उसी दिन अनित थापा अपने समर्थकों के साथ शांति पूर्ण प्रदर्शन करने वाले हैं.

भगवा रंग में डूबे पहाड़ के स्थाई राजनीतिक समाधान, गोरखालैंड और दूसरे कई मुद्दे हैं जो आगामी दिनों में क्षितिज पर आ सकते हैं. एक तरफ यहां GTA भंग होने के कयास लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अलग गोरखालैंड भी एक मुद्दा है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार पहाड़ के विकास को लेकर एक नई रणनीति बना सकती है. क्योंकि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के चलते यहां उठाई गई उचित मांग को पूरा करना भाजपा के लिए आसान होगा.

जहां तक जीटीए भंग करने की बात है, तो शायद यह आसान न हो. क्योंकि पहाड़ पर GTA का गठन काफी संघर्षों के बाद हुआ है. 1980 के दशक में सुभाष घीसिंग के नेतृत्व में यहां आंदोलन शुरू हुआ था. 1988 में गोरखा हिल काउंसिल बनी. लेकिन असंतोष कम नहीं हुआ. 2008 में विमल गुरुंग के नेतृत्व में हिंसक आंदोलन हुआ. 2012 में तत्कालीन केंद्र, राज्य और स्थानीय नेताओं के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत जीटीए का गठन हुआ था.

हालांकि कहा तो यह भी जा रहा है कि जीटीए भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. इसलिए इसे खत्म कर देना चाहिए. दूसरी तरफ इस बात की भी संभावना देखी जा रही है कि पहाड़ भगवामय होने के बाद यहां अनित थापा की प्रशासनिक स्थिति कमजोर हो गई है. ऐसे में कदाचित अनित थापा जीटीए से अलग हो सकते हैं. वह अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इस स्थिति में भाजपा सरकार जीटीए को अपने तरीके से चला सकती है.

भाजपा सरकार आने के साथ ही विमल गुरुंग के तेवर विपक्ष पर काफी गरम है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार विमल गुरुंग पर मेहरबान हो सकती है. हालांकि जीटीए का फैसला करने में कुछ वक्त लग सकता है. फिलहाल दार्जिलिंग पहाड़ की चारों नगर पालिकाओं दार्जिलिंग, कर्सियांग, कालिमपोंग और मिरिक को कब्जा करने के लिए भाजपा सरकार प्रयास करेगी. इन सभी नगर पालिकाओं पर अनित थापा की पार्टी बीजीपीएम का कब्जा है.

भारतीय जनता पार्टी की सरकार इन नगर पालिकाओं पर कब्जा करना चाहेगी और यह उसके लिए आसान होगा. क्योंकि अब स्थिति बदल चुकी है. बदले हुए हालात में कई संभावनाएं भी जोर पकड़ रही है. अनित थापा के लिए कुछ करने को नहीं रहेगा. क्योंकि राज्य सरकार भाजपा की होगी. ऐसे में फंड, विकास आदि कार्य पहाड़ पर नहीं होंगे.

या तो अनित थापा खुद ही साइड ले लेंगे या फिर भाजपा सरकार गणतांत्रिक तरीके से जीटीए समेत यहां की सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपने हाथ में कर लेगी. उसके बाद ही पहाड़ के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक योजना बनाई जा सकती है. जिसमें मन घीसिंग और विमल गुरुंग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

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