May 15, 2026
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उत्तर बंगाल बनेगा इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रोथ का नया हब!

https://khabarsamay.com/north-bengal-will-become-a-new-hub-of-infrastructure-and-growth/

उत्तर बंगाल के विकास और रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर बड़ी बात सामने आई है।
दार्जिलिंग के सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Raju Bista ने “नॉर्थ बंगाल रियल्टी रीइमैजिन्ड 2026” सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य और खासकर उत्तर बंगाल के विकास को लेकर बड़ा विज़न पेश किया।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में राजू बिष्टा ने कहा कि पश्चिम बंगाल अब “विजनलेस सरकारों” के दौर से बाहर निकल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम और टीएमसी शासन के कारण राज्य ने विकास के कई अवसर गंवाए, लेकिन अब जनता ने बदलाव का रास्ता चुना है और बंगाल तेज़ी से विकास की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री Narendra Modi और राज्य में मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली “डबल इंजन सरकार” के साथ मिलकर उत्तर बंगाल के विकास को नई गति दी जाए।
अपने संबोधन में राजू बिष्टा ने रियल एस्टेट सेक्टर को भारत की आर्थिक मजबूती की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि यह सेक्टर फिलहाल देश की जीडीपी में 7.3 प्रतिशत योगदान देता है और वर्ष 2047 तक इसके 15 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। साथ ही यह क्षेत्र करोड़ों लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ 250 से अधिक उद्योगों को भी समर्थन देता है।
उन्होंने कहा कि साल 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेरा, डिजिटल लैंड रिकॉर्ड, भू-आधार और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जैसी कई बड़ी सुधार योजनाओं के जरिए जमीन और संपत्ति से जुड़े कामों में पारदर्शिता आई है।
राजू बिष्टा ने उत्तर बंगाल को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, तराई और डुआर्स क्षेत्र आने वाले समय में तेज़ विकास के केंद्र बनने वाले हैं। उन्होंने बागडोगरा एयरपोर्ट विस्तार, नए नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड कॉरिडोर और सेवक-रंगपो रेल लाइन जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी ज़िक्र किया।
इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण भी जरूरी है। उन्होंने बांस, जूट और पत्थरों जैसे स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सके।
कुल मिलाकर, सम्मेलन में उत्तर बंगाल को भविष्य के बड़े आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहां आने वाले वर्षों में तेज़ विकास की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

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