कभी-कभी जीवन में ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जहां विज्ञान भी सटीक विश्लेषण नहीं कर पाता है. जहां विज्ञान की सीमा समाप्त होती है, वहीं से एक दूसरी दुनिया शुरू होती है, जिसे पारलौकिक दुनिया कहा जाता है. इस दुनिया को समझ पाना आसान नहीं होता है. यहां घटने वाली घटनाएं किसी की समझ में नहीं आती. जहां विज्ञान भी हताश हो जाता है.
सिलीगुड़ी में एक ऐसी ही घटना घटी है, जो सोचने पर मजबूर कर देती है. सिलीगुड़ी नगर निगम के 47 नंबर वार्ड की यह घटना है. यहीं रामकृष्ण कॉलोनी इलाके में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें दो बच्चों की नदी में डूबने से मौत हो गई. शनिवार को ही लगभग 7 महीने पहले दोनों बच्चों की मां ने भी दम तोड़ दिया था. दोनों ही घटनाओं का एक ही दिन होना क्या यह इत्तेफाक है या फिर परा भौतिकी घटना है?
सुब्रतो कर्मकार के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे थे. रिया कर्मकार और ऋषभ कर्मकार. रिया की उम्र 12 साल थी. जबकि ऋषभ की उम्र 6 साल थी. यह परिवार काफी खुशहाल था. फिर इस परिवार पर मुसीबत आई तो लगभग 7 महीने पहले सुब्रतो कर्मकार की पत्नी का देहांत हो गया. वह एक बीमारी में परलोक वासी हुई थी. पत्नी की मौत के गम में निढाल सुब्रतो कर्मकार ने बच्चों की खातिर जीने का फैसला किया.
सुब्रतो कर्मकार छोटे-मोटे काम करके अपने बच्चों का पेट पाल रहे थे. इसके साथ ही खुद ही मां और पिता के रूप में अपने बच्चों की परवरिश कर रहे थे. बच्चों के लिए खाना बनाना, उन्हें स्कूल भेजना, और फिर काम पर जाना यही सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था. उन्होंने अपने बच्चों की देखभाल में कोई कमी नहीं रखी. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.
शनिवार को जमाई षष्ठी थी. उस दिन रिया अपने छोटे भाई ऋषभ के साथ नानी के घर जा रही थी. रास्ते में पंचानन नदी पड़ती थी. बरसात के कारण छोटे भाई ऋषभ के जूते और पैर में कीचड़ लग गया था, जिसे वह साफ करना चाहता था. सामने नदी देखी तो वह जूता साफ करने के लिए नदी के किनारे चला गया. उस दिन नदी का जलस्तर बढ़ गया था. क्योंकि बरसात हुई थी.
जैसे ही ऋषभ जूते साफ करने के लिए नदी के पानी में झुका, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह देखते-देखते नदी की जलधारा में बह गया. अपने भाई को नदी के पानी में बहते और डूबते देखकर रिया की चीख निकल गई. वह उसे बचाने के लिए दौड़ी और नदी में छलांग लगा दी. लेकिन वह तैरना जानती नहीं थी. इसलिए नदी की तेज जलधारा में बह गई. देखते ही देखते दोनों भाई-बहन नदी के पानी में समा गए. उन दोनों की मौत हो गई.
पहले मां का शनिवार को देहांत और उसी शनिवार को उनके दोनों बच्चों की मृत्यु की घटना का आपस में क्या रहस्य है? क्या यह संयोग है या फिर विज्ञान के परे की कोई दुनिया है, जहां कुछ समझ पाना आसान नहीं होता है. हमारे जीवन में इस तरह की घटनाएं काफी विचलित कर देती हैं. बहरहाल, इस मार्मिक घटना के बाद सुब्रतो कर्मकार की दुनिया ही जैसे खत्म हो गई है!
