आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी. काफी समय से अटकलों का बाजार गरम था कि सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव अपने पद से इस्तीफा देंगे.आज उन्होंने किसी भी टीएमसी पार्षद की बात नहीं सुनी और पूरी दृढ़ता के साथ मेयर पद से इस्तीफा दे दिया. अब गौतम देव के राजनीति से संन्यास लेने की भी चर्चा शुरू हो गई है.
गौतम देव ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद टीएमसी नेता समझे जाते हैं. उनके इस्तीफे को विश्लेषक ममता बनर्जी के ढह जाने वाले आखिरी किले के रूप में देख रहे हैं. गौतम देव ने इच्छा जताई है कि वे पूरे देश का भ्रमण करेंगे. विश्लेषकों ने उनके इस्तीफे के बाद यह आकलन लगाया है कि उत्तर बंगाल में टीएमसी के वजूद का संकट बढ़ गया है.
गौतम देव ने एक दिन पहले मेयर इन परिषद के सदस्यों के साथ एक अहम बैठक की थी. इसी बैठक में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा व्यक्त की थी. उसी समय टीएमसी के पार्षदों के आपसी मनमुटाव और खींचतान भी सामने आ गया था. बहुत से टीएमसी पार्षद चाहते थे कि गौतम देव अभी इस्तीफा नहीं दें. क्योंकि नगर निगम का कार्यकाल अभी एक साल बाकी है.
टीएमसी पार्षद चाहते थे कि गौतम देव समय से पहले इस्तीफा नहीं दे. लेकिन पार्षदों के विरोध और उनके तर्क को गौतम देव ने नहीं सुना और एक फैसला कर लिया. आज सुबह उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम के कमिश्नर को भेज दिया है. हाल के विधानसभा चुनाव में उत्तर बंगाल के सभी प्रमुख जिलों में टीएमसी को भारी हार का सामना करना पड़ा था.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार जैसे जिलों में गौतम देव को मुख्य चेहरा बनाया था. किंतु इन सभी जिलों में ही टीएमसी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा. गौतम देव भी सिलीगुड़ी की अपनी सीट भारी मतों के अंतर से हार गए. चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद पार्षदों से लेकर टीएमसी के नेताओं ने अपने नेता पर आरोप लगाने शुरू कर दिए.
सिताई सीट से पार्टी के टिकट पर जीती संगीता वसुनिया के भी बागी स्वर देखने को मिले. केवल उत्तर बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे बंगाल में टीएमसी की खराब स्थिति और चुनाव परिणाम के बाद विधायकों और सांसदों में टूट के बाद इस्तीफों की बरसात शुरू हो गई. कोलकाता में फिरहद हकीम ने इसकी शुरुआत कर दी और धीरे-धीरे नगर पालिकाओं और नगर निगम में इस्तीफों की झाड़ियां लगती चली गई.
गौतम देव का मेयर पद से इस्तीफा कोई चौंकाने वाली घटना नहीं है. लेकिन आश्चर्य तब होता है जब 1 दिन पहले ही पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल में संगठन को मजबूत बनाने के लिए गौतम देव को दार्जिलिंग जिला समतल का चेयरमैन बनाया था. सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल भी अभी एक साल बचा था.आज अचानक से उनका मेयर पद से इस्तीफा कई कयासों और संभावनाओं को जन्म दे रहा है. क्या गौतम देव राजनीति से संन्यास लेंगे?
