July 4, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

SMC चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए भाजपा में जुगाड़ तलाशते TMC नेता!

सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव कब होगा, किसी को पता नहीं है. लेकिन संभावना जताई जा रही है कि कोलकाता और सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव एक साथ ही होगा. सिलीगुड़ी में टीएमसी बिन पतवार की नाव बन गई है. पूर्व मेयर गौतमदेव की राजनीति में सक्रियता नहीं देखी जा रही है. ऐसे में उनके मातहत टीएमसी नेता अभिभावक विहीन हो गए हैं. उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें, क्या नहीं.

लेकिन राजनीति का नशा कुछ ऐसा है कि वह उतरने का नाम नहीं लेता है. सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद कई छोटे बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. जबकि बहुत से ऐसे नेता और पूर्व पार्षद हैं, जो भाजपा के साथ अपने अच्छे संबंध का हवाला दे रहे हैं. उनका भाजपा नेताओं के साथ उठना बैठना भी है. लेकिन भाजपा उन्हें कोई भाव नहीं दे रही है. सूत्र बता रहे हैं कि सिलीगुड़ी के कई पूर्व पार्षद और टीएमसी नेता भाजपा के बड़े नेताओं से मिल रहे हैं. लेकिन उन्हें भाजपा नेताओं की ओर से समय नहीं दिया जा रहा है.

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पहले ही चेता दिया है कि टीएमसी के नेताओं की उनकी पार्टी में कोई जगह नहीं है. सूत्र बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारक और नेता नहीं चाहते कि टीएमसी के नेता भाजपा से जुड़े. शुभेंदु अधिकारी से लेकर भाजपा के हैवीवेट नेताओं से मिलने के बाद टीएमसी के नेताओं को जब बीजेपी में एंट्री नहीं मिली, तब उन्होंने कांग्रेस या दूसरे दलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. लेकिन वे यह भी जानते हैं कि इस समय भाजपा से जुड़कर ही उनकी राजनीति की नैया पार लग सकती है.

यही कारण है कि सिलीगुड़ी के पूर्व टीएमसी पार्षद तथा दूसरे स्थानीय नेता भाजपा में जुगाड़ लगाते नजर आ रहे हैं. वह कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा से साठगांठ करके नगर निगम का चुनाव लड़ा जाए. और अपनी जीत पक्की की जाए. लेकिन सूत्रों ने बताया कि ऐसे टीएमसी नेताओं को भाजपा अपनी पार्टी में नहीं लेने वाली है. बैसाखी की तलाश की आस छिन जाने के बाद TMC के नेता रणनीति बना रहे हैं कि सिलीगुड़ी नगर निगम का अगला चुनाव किस योजना के साथ लड़ा जाए.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव को लेकर टीएमसी के कई नेता दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन जब उन्होंने उन्हें कोई भाव नहीं दिया तो अब उन्होंने सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. उन्हें एहसास हो गया है कि भाजपा उन्हें अपने पाले में नहीं रखना चाहेगी. इसके कई कारण भी हैं. एक तो कई पूर्व टीएमसी पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और भाजपा उसकी जांच कराना चाहती है.

दूसरी तरफ बोर्ड भंग होने के बाद कई टीएमसी के पूर्व पार्षद राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो चुके हैं. कुछ स्थानीय नेता ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि भाजपा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करा सकती है. ऐसे में कानून से बचने और अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए वे भाग दौड़ कर रहे हैं. जबकि टीएमसी के कुछ नेता ऐसे भी हैं ,जिन्हें डर है कि अगर वह जनता के बीच गए तो उन पर अंडे बरसाए जाएंगे.

इस बीच लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद टीएमसी के जिला कार्यालय में राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है. टीएमसी के पूर्व पार्षद, जिला पदाधिकारी तथा वरिष्ठ नेता नियमित रूप से कार्यालय पहुंच रह रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि टीएमसी जिला कार्यालय में भविष्य में होने वाले सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव को लेकर रणनीतियां बनाई जा रही हैं. सूत्र बता रहे हैं कि दुर्गा पूजा के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव कराया जा सकता है. ऐसे में जनता के बीच कौन सा नया फार्मूला लेकर जाया जाए, इस पर मंथन चल रहा है

टीएमसी के बहुत से नेताओं का मानना है कि इस बार डगर काफी कठिन है. जनता उनके खिलाफ है. ऐसे में उन्होंने राजनीतिक संगठन पर जोर देना शुरू कर दिया है. हालांकि अभी पूर्व मेयर गौतम देव की ओर से कोई हलचल नहीं देखी जा रही है. राजनीति में संभावना हमेशा रहती है. दुर्गा पूजा के बाद सिलीगुड़ी की राजनीति में काफी उलट फेर देखा जा सकता है. सही तस्वीर पूजा के बाद ही सामने आएगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *