अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो, 20 सितंबर से सिलीगुड़ी की सड़कों पर गाड़ियां फर्राटे भरती नजर आएंगी. यानी गाड़ियों को जाम का शिकार नहीं होना पड़ेगा. खासकर हिलकार्ट रोड, सिलीगुड़ी जंक्शन, मल्लागुड़ी से दार्जिलिंग मोड की तरफ गुजरने वाली गाड़ियों को ज्यादा देर तक सिग्नल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
केवल दार्जिलिंग मोड़ के जाममुक्त हो जाने मात्र से ही सिलीगुड़ी के विभिन्न चौक चौराहों पर लगने वाली जाम में भी कमी आएगी. सिलीगुड़ी में इसका एक बहुत बड़ा असर देखा जा सकता है. खासकर दार्जिलिंग मोड, चंपासारी, माटीगाड़ा, सेवक रोड, सालूगाडा ,चेक पोस्ट आदि के आसपास के क्षेत्रों के लोगों को जाम से भारी राहत मिलने जा रही है, इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है.
आप दार्जिलिंग मोड़ पर लगने वाले जाम के शिकार हुए हैं? सिलीगुड़ी में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जुबान से शायद यही निकलेगा कि ना बाबा उधर नहीं जाना है. स्कूटर सवार, साइकिल सवार, टोटो, ऑटो ,जीप ,बोलोरो आदि छोटी गाड़ियां भी इस जाम का शिकार होना नहीं चाहती हैं. पीक ऑवर में तो हालत यह हो जाती है कि यहां से पैदल गुजरने वाले व्यक्ति को भी काफी थक जाना पड़ता है. बरसों से यह समस्या बनी हुई है. लेकिन इसका स्थायी समाधान अब हुआ है.
इसी महीने 20 सितंबर से दार्जिलिंग मोड़ का जाम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. 20 तारीख को निर्माणाधीन फ्लाईओवर और फोरलेन सड़क के एक तरफ के रास्ते को यातायात के लिए चालू किया जा रहा है. यानी 20 सितंबर से दार्जिलिंग मोड़ का जाम खत्म होना शुरू हो जाएगा और अगले कुछ दिनों में यह जाम पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा. सिलीगुड़ी के लोगों के लिए यह कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है. क्योंकि दार्जिलिंग मोड़ के जिस जाम को हटाने के लिए वामपंथ से लेकर तृणमूल सरकार तक ने एक पर एक कई प्रयास किये, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं मिला. उसे केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने स्थाई समाधान के रूप में प्रस्तुत कर दिया है. निश्चित रूप से इसका श्रेय दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट को दिया जाना चाहिए.
क्योंकि यह भाजपा नेता राजू बिष्ट का एक तरह से ड्रीम प्रोजेक्ट था, जो अब पूरा हुआ है. यह सभी जानते हैं कि सिलीगुड़ी को जाम मुक्त करने के लिए राजू बिष्ट ने केंद्र सरकार के मंत्रियों तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आदि नेताओं से मिलकर अपने उस ड्रीम प्रोजेक्ट को पास करवाया, जिसके पूरा होने से सिलीगुड़ी पर यातायात का दबाव खत्म हो सकता था. राजू बिष्ट ने बालासन से सेवक आर्मी कैंटोनमेंट 4/6 लेन राजमार्ग परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए जितना अथक परिश्रम किया है, उनके आलोचक भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं.
जब से इस परियोजना का काम शुरू हुआ है,परियोजना की प्रगति, निरीक्षण और परियोजना के मार्ग में आई बाधाओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के एक प्रतिनिधि के रूप में राजू बिष्ट ने हमेशा सरकार, अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के बीच एक समन्वय बढ़ाया. आज बालासन से सेवक आर्मी कैंटोनमेंट तक 12 किलोमीटर 4/6 लेन राजमार्ग आकार लेने जा रहा है. फोर लेन सड़क के एक तरफ का रस्ता लगभग पुरा हो चुका है. रविवार को राजू बिष्ट ने इसका निरीक्षण भी कर लिया तथा संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से बातचीत करके 20 सितंबर से इसको चालू करने का फैसला कर लिया है.
सूत्रों ने बताया कि हालांकि राजू बिष्ट की कोशिश थी कि गणेश पूजा से पहले ही सालूगाड़ा सेवक तक जाने वाली फोरलेन सड़क को चालू कर दिया जाता. परंतु बीच में कुछ अवरोध आए जिसके कारण इसमें देरी हुई और अब 20 सितंबर से इसको ट्रायल के रूप में खोला जा रहा है. राजू बिष्ट ने कहा है कि यातायात के क्षेत्र में गणेश पूजा और दुर्गा पूजा का सिलीगुड़ी को यह सबसे बड़ा उपहार है!
सिलीगुड़ी में पूजा शुरू हो चुकी है. गणेश पूजा, विश्वकर्मा पूजा, दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ पूजा तक सिलीगुड़ी काफी व्यस्त रहने वाला है. पूजा के समय बाजार से लेकर यातायात तक काफी भीड़भाड़ रहती है. सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. सिलीगुड़ी और आसपास के सड़क चौराहों में सबसे व्यस्त दार्जिलिंग मोड़ का इलाका रहता है. अगर यह क्षेत्र जाम मुक्त हो जाए तो सिलीगुड़ी के अन्य मार्गों पर जाम में कमी आ सकती है.
क्योंकि पूजा के समय सिलीगुड़ी की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस को व्यवस्था संचालन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. दार्जिलिंग मोड जाममुक्त हो जाने से उम्मीद की जा रही है कि सिलीगुड़ी शहर के अंदर इस समस्या में काफी कमी आएगी. इससे न केवल आम जनता को बल्कि व्यापारियों और कारोबारियों को भी परिवहन तथा व्यापार में काफी सुविधा होगी.
सिलीगुड़ी में प्रवेश करने वाले अधिकांश छोटे बड़े वाहन दार्जिलिंग मोड से ही होकर शहर में प्रवेश करते हैं. हालांकि NH-10 4/6 सड़क निर्माण का काम जारी रहने के कारण इन दिनों मालवाहक और बड़ी बसों को मेडिकल और नौका घाट होते हुए गुजरना होता है. इसके बावजूद दार्जिलिंग मोड पर जाम एक बड़ी समस्या बन चुकी है. दार्जिलिंग जाने वाले छोटे बड़े वाहनों के अलावा माटीगाड़ा, सालूगाड़ा, चेकपोस्ट, सेवक के लिए दार्जिलिंग मोड से ही वाहन गुजरते हैं, यही कारण है कि यहां आप अक्सर जाम देख सकते हैं.
स्थानीय लोग और दुकानदार दार्जिलिंग मोड पर लगने वाले जाम से अक्सर परेशान रहते हैं. इस जाम के कारण जहां व्यापारियों को व्यापार करने में कठिनाई होती है, वहीं अगर जाम में एंबुलेंस फस जाए तो उसे निकलने में काफी समय लग जाता है. अगर कोई गंभीर बीमार व्यक्ति एंबुलेंस में हो तो समय पर उसका इलाज होना काफी मुश्किल है. देखा जाए तो सिलीगुड़ी यातायात का सबसे बड़ा दबाव दार्जिलिंग मोड पर ही रहता है.
दार्जिलिंग मोड पर जाम की यह समस्या कोई आज का नहीं है. हालांकि समय-समय पर ट्रैफिक पुलिस के द्वारा यहां जाम मुक्त दार्जिलिंग मोड के लिए अभियान चलाया जाता रहा है. लेकिन वह एक तरह से अस्थाई होता है. खूब सोच विचार कर और स्थाई समाधान के लिए दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट के सहयोग से केंद्र सरकार ने एक योजना बनाई और उसे अमली जामा पहना दिया है. अब तक इस परियोजना पर 995 करोड रुपए खर्च हो चुके हैं.इस परियोजना में दो एलिवेटेड कॉरिडोर, 6 छोटे बड़े पुल, अंडर पास, ओवर ब्रिज तथा एक सर्विस रोड का निर्माण शामिल है.
