बस, एक महीना और तथा उसके बाद नीला आसमान नजर आएगा. ओस भी पड़ेगी. मौसम सुहावना हो जाएगा. बरसात खत्म हो जाएगी. बरसात की कोख से जो नया मौसम उत्पन्न होगा, उसमें नमी भी होगी. लेकिन उमस और गर्मी झुलसाने वाली नहीं हो सकती है. लोगों को एक सुखद एहसास होगा. बयार भी चलेगी. मिजाज कूल हो सकता है. मौसम वैज्ञानिकों ने कुछ इसी तरह के संकेत दिये हैं.
इस तरह के मौसम को आप कैसे देखते हैं? कुछ विचित्र लग रहा है न? कभी तेज बारिश, तूफान तो कभी तेज धूप और झुलसाने वाली उमस! बारिश का यह पैटर्न क्या है और इसमें बदलाव कहीं मजबूत होते अलनीनो के खतरे का संकेत तो नहीं है? बारिश के इस पैटर्न से यह भी संकेत मिलता है कि दुनिया का मौसम तंत्र एक शक्तिशाली अल नीनो की ओर बढ़ रहा है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह और मजबूत हो सकता है. कुछ वैज्ञानिक तो इसे गॉडजिला अल नीनो भी कह रहे हैं और उनका मानना है कि इसका सबसे बड़ा असर आना बाकी है. इसरो के सैटलाइट ने प्रशांत महासागर में ऐसे बदलाव दर्ज किए हैं जो मजबूत होते अल नीनो के संकेत माने जा रहे हैं.
फिलहाल आज रात तक जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भारी बारिश हो सकती है. पहाड़ में कालिमपोंग जिले में भारी बारिश और तूफान चलने की आशंका है. उत्तर बंगाल के अन्य जिलों में भी भारी बारिश के आसार हैं. दिन में धूप और गर्मी देखी गई. लेकिन रात में मौसम अचानक से बदल सकता है. आंधी या तेज हवाओं के साथ बारिश आ सकती है. जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है.
हालांकि आज और कल उत्तर बंगाल में लगभग सभी जिलों में बारिश होने वाली है. लेकिन कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. रविवार को तो इन जिलों में जमकर बारिश के साथ ही तूफान चल सकता है. उत्तर बंगाल के उपरोक्त जिलों के अलावा अन्य जिलों में गरज चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रह सकती है.
सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में आज हुई भारी बारिश और उसके बाद तेज धूप और उमस ने मौसम वैज्ञानिकों को भी अल नीनो को लेकर ताजा रिसर्च करने पर जोर दिया है. सवाल यह है कि मौसम में इस तरह का बदलाव क्यों हो रहा है और क्या यह आगे भी जारी रहेगा? इस तरह से मौसम का मिजाज कब तक बना रह सकता है?
मौसम वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम की चाल को समझ पाना जरा आसान नहीं है. पश्चिम बंगाल में मानसून के इतिहास में शायद यह पहला अवसर हो सकता है जब मानसून पूजा से पहले ही विदा ले लेगा. पूरे एक महीने तक मौसम की यही चाल रह सकती है.
मौसम की इस चाल को लेकर विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की बरसात का कोई ज्यादा असर नहीं होता है यानी बारिश से जल भराव तो होगा लेकिन यह ज्यादा समय तक धरती पर टिका नहीं रह सकता है. क्योंकि सूर्य की तीखी धूप और गर्मी उसे जल्द ही सोख लेगी.
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा है कि दुर्गा पूजा के दौरान मौसम साफ रहने का अनुमान है. इस दौरान बारिश नहीं होगी. आसमान नीला और सफेद बादलों से ढका भी रह सकता है. लेकिन बारिश होने का कोई अनुमान नहीं है. 10 अक्टूबर को महालया है. और उसके बाद 17 अक्टूबर से पूजा शुरू होगी. इस अवधि में बारिश होने का कोई आसार नहीं है. पूजा से पहले मानसून की विदाई को देखते हुए जानकार मानते हैं कि इस बार दुर्गा पूजा की विशेष चमक रह सकती है.
जो भी हो, मौसम के इस पैटर्न तथा पूजा से पहले मानसून की विदाई ने पूजा से जुड़े प्रतिष्ठानों, व्यापारियों और आम लोगों को बड़ी राहत दी है.

