कथा कहानियों और फिल्मों में आपने नर पिशाच, दरिंदे या साइको को देखा और सुना होगा और सोच रहे होंगे कि क्या हकीकत में भी ऐसा होता है? दूर जाने की जरूरत नहीं है. सिलीगुड़ी के नजदीक माटीगाड़ा में आप इस जमात के लड़कों को देख सकते हैं. सिलीगुड़ी के नजदीक माटीगाड़ा में ऐसे अनेक लडकों को देख सकते हैं, जो नशे की गिरफ्त में आने के बाद साइको जैसा बर्ताव करते हैं .
उनमें से एक नर पिशाच या साइको दरिंदे को पुलिस ने गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. ऐसे तथाकथित नर पिशाच के कारनामे सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. माटीगाड़ा क्षेत्र में इस तरह की कहानियां आए दिन जन्म लेती रहती हैं.
माटीगाड़ा ब्लॉक के पाथरघाटा अंचल स्थित फावरी बस्ती में घुसते ही लोगों के मुंह से एक ही बात निकलती है, साइको… नर पिशाच क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं होता तो, जिस मां ने जन्म दिया, पाला पोसा और सयाना किया, उसी संतान ने मां की गला घोट कर हत्या कर दी! यह लड़का साइको या पिशाच इसलिए भी है कि उसने मां की हत्या करते समय कोई अफसोस नहीं किया. उसने न केवल अपनी मां की हत्या की, बल्कि मां को मौत के घाट उतारने के बाद वह उसी के बगल में चैन से सो गया.
उसे सुबह तक भी पता नहीं चला कि उसने रात में अपनी मां की हत्या कर दी थी. यह घटना दर्शाती है कि माटीगाड़ा क्षेत्र में नशा नौजवान पीढी को किस तरह बर्बाद कर रहा है. नशा शराब का हो तो जल्द ही उतर जाता है. लेकिन जब नशा ड्रग्स और हेरोइन का हो तो नशेड़ी को कुछ पता ही नहीं चलता है. वह नशे में कुछ भी कर सकता है. मादक द्रव्य पदार्थ का नशा नशेडी से क्या-क्या नहीं करवा सकता है!
माटीगाड़ा का कांड स्थानीय लोगों के अनुसार एक साइको नशेड़ी के द्वारा अंजाम दिया गया है. उसके जैसा नशेड़ी माटीगाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर में मिल जाएंगे. यह पुलिस प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती है. यहां नशा उन्मूलन के लिए मेट्रोपोलिटन पुलिस के द्वारा अनेक अभियान चलाए गए. लेकिन इसका नशेड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ा. वहां नशेडियों के कारण घर बर्बाद हो रहे हैं. जान माल का नुकसान हो रहा है. रिश्तो को शर्मसार किया जा रहा है.
नशेड़ियों का स्थानीय लोगों पर आतंक इस कदर है कि उनके डर से कोई उनके विरुद्ध मुंह खोलना नहीं चाहता है. पुलिस, स्थानीय लोगों के बयान और आरंभिक पूछताछ में पता चला है कि जिस महिला की हत्या की गई है, उसका नाम सीता भुइयां है. उसकी उम्र 40 साल से ज्यादा बताई जा रही है. सीता भुइयां के दो बेटे थे. एक का नाम करण भुइयां था. जबकि दूसरा बेटा लगभग 6 साल का था. सीता भुइयां बेहद गरीब थी. एक कमरे के टूटे-फूटे मकान में अपने दोनों बेटों के साथ रहती थी. वह मजदूरी करके अपने दोनों बेटों का पेट भर रही थी.
किसी दिन काम मिलता तो किसी दिन नहीं. मां को अपने बड़े बेटे पर काफी भरोसा था. बचपन में करण काफी होशियार भी था. मां ने उसकी परवरिश में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखी थी. खुद न खाकर अपने बच्चों को खिलाती रही थी. लेकिन उसे क्या पता था कि वह आस्तीन का सांप पाल रही थी. उसका वही बेटा एक दिन उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा, यह उसने सपने में भी नहीं सोचा था.
जैसे-जैसे करण बड़ा होता गया, गांव बस्ती के लड़कों के साथ उसकी उठक बैठक होने लगी और इस तरह से वह बिगड़ता चला गया. आरंभ में तो मां ने काफी डांट फटकार की. लेकिन जब दोस्त उसके घर में भी दखल देने लगे, तो मन को अहसास हो गया कि अब बेटे को समझा बुझाकर रास्ते पर लाना बड़ा कठिन है. उधर करण को घर में सिर्फ खाने पीने से मतलब होता था. बाकी समय वह दोस्तों के साथ बिताता था. इन्हीं दोस्तों ने करण को ड्रग्स और अन्य घातक नशे के सेवन का आदी बना दिया था.
करण रोज रात को नशे में धुत होकर लौटता और मां से नाहक झगड़ा करता रहता था. वह मां का हाथ पकड़ कर नशे के लिए उसकी मजदूरी का पैसा मांगता था और जब मां नहीं देती थी तो उससे लड़ाई झगड़ा करने लग जाता था. अडोसी पड़ोसी सुनते, लेकिन उनके मामलों में कोई दखल नहीं देता था. बृहस्पतिवार की रात लगभग एक बजे करण अपने दोस्त राहुल के साथ घर लौटा और मां से पैसे मांगने लगा. वह और नशा करना चाहता था. इसके लिए उसने अपने दोस्त को भी साथ लाया था.
बेटे को नशे में डूबे देखकर मां ने उसको पैसे देने से मना कर दिया. उसने कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं. मां ने करण को फटकारते हुए कहा कि वह उसका घर छोड़कर चला जाए. इस बार करण भड़क उठा. धीरे-धीरे मां और बेटे में लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया. हाथापाई भी हुई. इस बीच छोटा भाई मां का पक्ष लेकर बड़े भाई से उलझ गया तो करण ने उसके हाथ पैर बांध दिए. स्थानीय लोगों ने बताया कि वह उस समय नशे में बेसुध था, इसलिए झगड़ा करने के क्रम में उसे इस बात का होश नहीं रहा कि उसने कब अपने छोटे भाई को रस्सी से बांध दिया और कब मां का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी!
मां स्वर्ग सिधार चुकी थी. लेकिन फिर भी उसे इसका एहसास नहीं था. नींद भी आ रही थी. इसलिए वह फर्श पर मृत पड़ी हुई मां के बगल में चैन से सो गया. सुबह इस घटना की जानकारी पड़ोसियों को हुई तो लोगों ने सबसे पहले छोटे भाई को रस्सियों से आजाद कराया और उसके बाद करण को सोते से उठाकर रस्सियों से उसे कसकर कर बांध दिया. फिर इस घटना की जानकारी माटीगाड़ा थाने को दी गई. सूचना पाते ही माटीगाड़ा पुलिस मौके पर पहुंच गई.
माटीगाड़ा पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की और उनके बयान लिए. पुलिस ने आरोपी करण भुइया से भी पूछताछ करने की कोशिश की. उसके बाद मृतका सीता भुइया के शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया. इस बीच माटीगाड़ा पुलिस ने आरोपी करण भुइया को सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश करके उसे रिमांड पर लिया है, जहां उससे कडी पूछताछ की जा रही है.
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही है. मृतका के शव का मुआयना करने के बाद उसके गले और शरीर पर चोट तथा नाखूनों के निशान मिले हैं. एसीपी अनिर्वाण मजूमदार ने बताया है कि पुलिस जल्द ही पता लगा लेगी कि सीता भुइया की हत्या कैसे और क्यों हुई. पुलिस मामले की सरगर्मी से जांच कर रही है. इसके साथ ही पुलिस आरोपी करण भुइया के साथ घर आए उसके दोस्त राहुल की भी तलाश कर रही है.

