September 30, 2026
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सिलीगुड़ी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा के बढ़ते कदम- सिलीगुड़ी-गुवाहाटी-शिलांग कॉरिडोर!

Steps taken to secure Siliguri 'Chicken Neck' - Siliguri-Guwahati-Shillong Corridor!

केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के विकास और सशक्तिकरण के लिए जिस तरह की योजना तैयार की है, उसे लेकर जानकार मानते हैं कि केंद्र की यह पहली सरकार है, जिसने उत्तर पूर्व भारत के विकास पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है. पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, त्रिपुरा, मणिपुर आदि छोटे-छोटे राज्यों को देश की मुख्य धारा में लाने और उनके विकास के द्वारा भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना सरकार की है और केंद्र सरकार इस मिशन पर काम कर रही है.

सिलीगुड़ी गोरखपुर ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना पर पहले से ही काम चल रहा है. जब यह योजना पूरी हो जाएगी, तब सिलीगुड़ी और गोरखपुर के बीच दूरी घटकर 6 से 8 घंटे की रह जाएगी. बिहार और सीमांचल क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण का काम हो रहा है. अब टेंडर प्रक्रिया तथा योजना से जुड़ी अन्य पहल की जा रही है. इसी बीच केंद्र सरकार ने अपने उत्तर पूर्व भारत मिशन की योजना को आगे बढ़ाते हुए सिलीगुड़ी गुवाहाटी शिलांग कॉरिडोर योजना को हरी झंडी दे दी है. इस योजना पर सरकार 61,500 करोड रुपए खर्च करेगी.

विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार की यह योजना सिलीगुड़ी चिकन नेक की सुरक्षा को और मजबूत करने तथा उत्तर पूर्व के सात राज्यों को देश की राजधानी से सीधा जोड़ने, व्यापार व पर्यटन बढ़ाने और उत्तर पूर्व तथा शेष भारत के बीच संपर्क को और दृढ करने की है. सिलीगुड़ी और सिक्किम के बीच रेल सेवा संचालन का काम अंतिम चरण में है. केंद्र सरकार सिलीगुड़ी को एक तरफ पश्चिमी हिस्से से सीधा जोड़ रही है तो वहीं सिलीगुड़ी को असम और बाकी उत्तर पूर्व के राज्यों से जोड़ने जा रही है. इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में सिलीगुड़ी एक मेगा सिटी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है.

विशेषज्ञों के इस आकलन को भाजपा नेता राजू बिष्ट के बयान से बल मिलता है. उन्होंने इस परियोजना की स्वीकृति मिलने के बाद अपनी हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा है कि इससे न केवल उत्तर पूर्व राज्यों का राजधानी से सीधा संपर्क बढ़ेगा, बल्कि आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी. हाल ही में अखिल भारतीय भाजपा और प्रदेश भाजपा ने राजू बिष्ट का कद बढ़ाया है.

उन्हें पश्चिम बंगाल, सिक्किम समेत उत्तर पूर्व राज्यों की भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई है. भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर राजू बिष्ट पहाड़ और उत्तर पूर्व राज्यों के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है.

सिलीगुड़ी गुवाहाटी शिलांग हाईवे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 630 किलोमीटर होगी और इस पर केंद्र सरकार 61,500 करोड़ खर्च करेगी. इस कॉरिडोर की रूपरेखा कुछ ऐसी है जिससे उत्तर बंगाल का आने वाले समय में बेहतर विकास हो सकेगा. जानकारों के अनुसार सड़क संपर्क ही नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी चिकन नेक की सुरक्षा रणनीति के तौर पर भी इसका महत्व है. उत्तर पूर्व राज्यों को व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में तो गति मिलेगी ही, सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल व्यापार का केंद्र भी बनेगा. प्रस्तावित हाईवे से उत्तर बंगाल समेत उत्तर पूर्व के राज्यों के लोगों को मेडिकल, उद्योग, निवेश इत्यादि क्षेत्रों में त्वरित सहायता मिलेगी.

माना जा रहा है कि सिलीगुड़ी गोरखपुर ग्रीन एक्सप्रेसवे से सिलीगुड़ी गुवाहाटी शिलांग हाईवे कॉरिडोर को जोड़ा जाएगा. यह सिलीगुड़ी चिकन नेक से होकर गुजरेगा. ऐसे में जाहिर है कि सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा बढ़ेगी. मालूम हो कि सिलीगुड़ी गलियारा भारत का एक सामरिक महत्व का केंद्र बिंदु है और यह उतना ही संवेदनशील भी है. सिलीगुड़ी चिकन नेक पर पहले से ही बांग्लादेश और चीन की कुदृष्टि टिकी हुई है. केंद्र सरकार ने समय रहते खूब सोच समझकर एक दूरदर्शी कदम उठाया है और बांग्लादेश तथा चीन को कूटनीतिक रूप से जवाब भी दे दिया है.

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