जब बारिश में छाता लेकर नौकाघाट सेतु से होकर पैदल नौका घाट अथवा मेडिकल की ओर गुजरेंगे तो आपके धुले हुए इस्तरी किए हुए वस्त्र कीचड और पानी से ऐसे सने हुए नजर आएंगे, मानो आप किसी खेत या बगीचे की क्यारियों से आ रहे हों. नौकाघाट सेतु में कम से कम दो दर्जन पिलर लगे हैं. बरसात के समय पिलर के आसपास सड़क के ऊपर पानी जम जाता है. ऐसे में जब वाहन वहां से गुजरते हैं, तो उसके छींटे फुटपाथ पर चलते हुए यात्रियों को सड़क से पांव तक गीला कर देते हैं.
अगर आपने साफ, धुले हुए सफेद वस्त्र पहन रखा हो, तो पुल पार करते-करते हुलिया बदल जाता है. इन दिनों नौकाघाट सेतु पर सुबह से लेकर दोपहर तक छोटी बड़ी गाड़ियों की लंबी कतार देख सकते हैं. कई जगह पिलर के पास गड्ढे भी नजर आ रहे हैं. जब बरसात होती है, तो यहां पानी जम जाता है. जमा हुआ पानी जल्दी नीचे नहीं जा पाता है. क्योंकि होल में मिट्टी और खरपतवार बढ़ जाने से होल का मुंह बंद हो जाता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि जमा हुआ पानी धीरे-धीरे रिसते हुए पिलर की जड़ को कमजोर कर रहा है. अगर जल्द ही प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो सेतु को खतरा हो सकता है.
नौकाघाट के आसपास रहने वाले लोगों की शिकायत है कि बदली हुई स्थितियों में पुलों की तुरंत मरम्मति की आवश्यकता है. खासकर सड़क पर जहां-तहां बन गए गड्ढों को भरने के साथ ही होल को खोलने की जरूरत है. बरसात के समय यहां पानी जम जाने से पैदल पुल पार करने वाले लोगों को तो तकलीफ होती ही है. इसके साथ ही पुल भी काफी कमजोर होता है. काफी समय से नौकाघाट सेतु पर प्रशासन का ध्यान नहीं गया है. अब जब यहां यातायात का दबाव बढ़ गया है तो प्रशासन को फौरन सेतु के निरीक्षण और पुनर्निर्माण की जरूरत है. लोगों ने शाम के समय यहां लाइटिंग बढ़ाने की भी मांग की है.
कई बार नौका घाट सेतु पर लाइट खराब हो जाती है, जिसके कारण यहां अंधेरा छा जाता है. ऐसे में नौकाघाट सेतु से गुजरते वाहन ट्रैफिक नियमों की परवाह नहीं करते है. अगर वाहन की स्पीड ज्यादा रहती है तो पिलर के पास बने गड्ढे के पास तेज असर होता है. कई बार बहुत भयानक आवाज आती है. स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि नौकाघाट से सेतु पार करते ही पोराझार मोड़ आता है जो इन दिनों काफी व्यस्त मोड हो गया है. यहां ट्रैफिक पोस्ट भी है. लेकिन ट्रैफिक पुलिस कर्मी यहां होते ही नहीं. जब कोई वीआईपी अथवा मंत्री का सिलीगुड़ी में आगमन होता है, तभी यहां ट्रैफिक पुलिस कर्मी नजर आते हैं. स्थानीय लोगों ने संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए यहां स्थाई रूप से ट्रैफिक कर्मी की नियुक्ति की मांग की है.
पिछले कुछ दिनों से नौकाघाट सेतु पर वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है. दार्जिलिंग मोड़ से लेकर सालूगाड़ा तक फोरलेन, सिक्स लेन सड़क के निर्मित हिस्से को अब तक नहीं खोला गया है. इसी महीने में उद्घाटन होने की बात है. निर्माण कार्य चलते रहने और भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध के बाद बागडोगरा से आने वाली तमाम बड़ी गाड़ियां मेडिकल, नौकाघाट सेतु होकर सिलीगुड़ी से एशियन हाईवे के द्वारा जलपाईगुड़ी की ओर निकल रही हैं.
कोलकाता, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, बिहार आदि विभिन्न राज्यों से व्यापारिक सामान ट्रकों में भरकर मंगाए जा रहे हैं. गुवाहाटी या उत्तर पूर्व के राज्यों में जाने के लिए भारी वाहनों को नौकाघाट सेतु से होकर गुजरना पड़ता है. इसी तरह से यात्री बसों को भी मल्लागुड़ी, दार्जिलिंग मोड से जाने की अनुमति नहीं है. इन यात्री बसों को भी नौकाघाट सेतु से होकर ही जाना पड़ता है. एशियन हाईवे से गुजरने वाले मालवाही ट्रक नौकाघाट के रास्ते ही जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार यातायात करते हैं.
पिछले कुछ समय से सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में दिन में एक बार जरूर बरसात भी हो रही है. एक तो बरसात और ऊपर से नौकाघाट सेतु पर वाहनों का दबाव संभावित खतरे को बढ़ा रहा है. ऐसे में अगर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो पश्चिम और पूर्व को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण सेतु और कमजोर पड़ सकता है. नौका घाट सेतु का निर्माण वाम मोर्चा शासनकाल में हुआ था. इसका निर्माण वर्ष 2003-2004 के दौरान हुआ था. सिलीगुड़ी में तमाम सेतुओं में सबसे ज्यादा लंबा और मजबूत सेतु नौकाघाट सेतु ही माना जाता है. फिलहाल इस पर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है.
