अगर आप किसी पेट्रोल पंप पर अपने वाहन में तेल भरवाते हैं और आपको विश्वास रहता है कि पेट्रोल पंप की मशीन और डिस्पले गड़बड़ नहीं हो सकती. फिर भी आपको लगता है कि जितना तेल मिलना चाहिए, उतना तेल नहीं मिला है. फिर भी आप इसे वहम समझ कर चुप रह जाते हैं. लेकिन हर बार इस तरह की अनुभूति होने लगे तो यह समझना चाहिए कि यह महज वहम नहीं है बल्कि कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ गड़बड़ है.
सिलीगुड़ी ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में वाहन चालक पेट्रोल पंप पर ज्यादा भरोसा करते हैं. क्योंकि पेट्रोल पंप पर सही कीमत पर सही मात्रा में तेल मिलता है. पेट्रोल पंप की मशीन सही होती है. मशीन के डिस्प्ले में जितना लीटर तेल लिखा होता है, ग्राहक को उतना ही मिलता है. ऐसा लोगों का विश्वास रहता है. परंतु इस घटना के बाद आपका पेट्रोल पंप पर से विश्वास उठ सकता है.
कर्नाटक में ग्राहकों की कई शिकायतों के बाद सरकार ने वहां के पेट्रोल पंपों की जांच कराई और पाया कि पेट्रोल पंप वाले ग्राहकों से जितना पैसा ले रहे हैं, उतना पेट्रोल नहीं दे रहे हैं. कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य में 805 पेट्रोल पंपों की कराई गई जांच में 768 पंपों की मशीन गड़बड़ पाई गई. इसका मतलब यह है कि मशीन के डिस्प्ले में जितना लीटर पेट्रोल अंकित रहता है, उतना वाहन के टैंक में फ्यूल नहीं आता है.
कुछ पेट्रोल पंप वाले यह गड़बड़ी जानबूझकर कर देते हैं तो कई बार अनजाने में यह गड़बड़ी हो जाती है. गड़बड़ी की इस परिभाषा का नाम कैलिब्रेशन है. इसका अर्थ होता है कि पेट्रोल पंप की मशीन जितना ईंधन दिखा रही है, वास्तव में उतना ही ईंधन निकल रहा है या नहीं. उदाहरण के लिए अगर आप 10 लीटर तेल भरवाते हैं तो डिस्प्ले पर 10 लीटर तेल दिखाई देता है. तो 10 लीटर तेल ही निकलना चाहिए. इससे कम नहीं. कई बार मशीन पुरानी होने से गड़बड़ी कर देती है. अगर मशीन की नियमित जांच नहीं होती है तो इस तरह की गड़बड़ी सामान्य घटना है.
विशेषज्ञों के अनुसार अगर 10 लीटर का डिस्प्ले है और जांच में लगभग 9.95 लीटर के आसपास तेल मिलता है तो यह एक सामान्य गड़बड़ी होती है. इसको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए. लेकिन अगर इससे ज्यादा गड़बडी पाई जाती है, यानी तेल वास्तविक गड़बड़ी सीमा से नीचे हो तो यह एक गंभीर मामला बन जाता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा मशीन की नियमित जांच नहीं होने से होता है. कई बार पेट्रोल पंप की मशीन की जांच ही नहीं होती.
पेट्रोल पंप की मशीन का सिस्टम ग्राहक को सब कुछ बता देता है. जैसे नोजल से कितना तेल निकला, यह फ्लो मीटर और डिस्पेंसिंग मेकैनिज्म मिलकर मापते और डिस्प्ले पर दिखाते हैं. अगर डिस्पेंसिंग यूनिट की एक्यूरेसी में गड़बड़ी आ जाए तो डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तविक भुगतान में अंतर आ जाता है. लेकिन एक सामान्य ग्राहक इस गडबडी को भांप नहीं पाता है और वास्तविक मात्रा से कम तेल को अपना वहम मान लेता है.
इसलिए अगली बार जब आप अपने वाहन में तेल भरवाएं तो इस वहम से बाहर निकल आएं कि पेट्रोल पंप पर आपके पैसे का पूरा तेल मिलता है. अगर आपको लगता है कि जितना भुगतान करते हैं उतना तेल नहीं मिल रहा है, तो संकोच करने की जरूरत नहीं है. आप तेल की मात्रा की जांच कराने की मांग कर सकते हैं. पेट्रोल पंप के अधिकारी इसमें आपका सहयोग कर सकते हैं.
हालांकि सरकार समय-समय पर इसकी जांच करवाती रहती है. लेकिन कई बार वर्षों तक इसकी जांच नहीं होती और यही कारण है कि यह कैलिब्रेशन सामने आता है! कर्नाटक सरकार ने अपनी जांच में 101 पंपों पर की गई कार्रवाई में उन पेट्रोल पंपों पर 6.66 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. कई पेट्रोल पंप वाले जानबूझकर यह गड़बड़ी करते हैं और ग्राहक को चूना लगाते रहते हैं. सिलीगुड़ी और आसपास के पेट्रोल पंपों पर हालांकि अब तक यह शिकायत नहीं मिली है.
