आने वाले समय में सिलीगुड़ी से पटना या पटना से सिलीगुड़ी या सिलीगुड़ी से दिल्ली अथवा दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा बहुत कम समय में पूरी की जा सकेगी. जैसा कि दावा किया जा रहा है कि इस ट्रेन से पटना से सिलीगुड़ी की दूरी 2 घंटे 55 मिनट में पूरा कर सकेंगे. तो वहीं दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा आप लगभग 6 घंटे 45 मिनट में पूरा कर लेंगे. इतने कम समय में गंतव्य स्थल की आपकी यात्रा पूरी करने के लिए वर्तमान में कोई ट्रेन उपलब्ध नहीं है.
कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि यह एरोप्लेन से ही संभव है. परंतु यह फ्लाइट की बात नहीं की जा रही है. बल्कि ट्रेन की बात की जा रही है. आप इस ट्रेन से दिल्ली से लखनऊ लगभग 2 घंटे 12 मिनट में, लखनऊ से बनारस लगभग 2 घंटे और बनारस से सिलीगुड़ी लगभग 4 घंटे 41 मिनट में पूरा कर सकेंगे. आज भले ही यह हास्यास्पद लगता हो, परंतु यह धरातल पर उतरने जा रहा है.
दरअसल दिल्ली से सिलीगुड़ी तक जिस बुलेट ट्रेन को चलाने की योजना थी, उसे जमीन पर उतारने की सरकार की तैयारी शुरू हो चुकी है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड सर्वे करा चुका है. एक नहीं बल्कि दो सर्वे हो चुका है. सर्वे रिपोर्ट भी सौंप दी गई है. अब कंसलटेंसी एजेंसी डिजाइन और सिविल काम से जुड़ी तैयारी करेगी. इस तरह से दिल्ली सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन के काम ने रफ्तार पकड़ ली है.
दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए स्पेशल गलियारा, स्पेशल जंक्शन और स्पेशल डिजाइन जिसमें पुल, रेलवे ट्रैक, स्टेशन, एप्रोच लाइन, फीडर सेक्शन और अनेक स्टेशन भी शामिल होंगे. कंसलटेंसी एजेंसी के चयन के लिए रेलवे के द्वारा योग्य कंपनियों की तलाश शुरू कर दी गई है. सूत्रों ने बताया कि 2 साल के अंदर कंसलटेंसी एजेंसी अपनी रिपोर्ट और तैयारी के बारे में रेलवे को जानकारी देगी. इसके बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा.
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच कई स्पेशल जंक्शन तैयार किए जाएंगे. कुछ रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड किया जाएगा. दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच मार्ग में जो स्टेशन आ सकते हैं, वे नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर ,लखनऊ ,रायबरेली, प्रयागराज , वाराणसी, पटना, बरौनी ,कटिहार और सिलीगुड़ी हो सकते हैं. इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक का लगभग 756 किलोमीटर का काम पूरा किया जाएगा. इसके बाद दूसरा चरण वाराणसी से सिलीगुड़ी तक लगभग 744 किलोमीटर के लिए शुरू होगा.
सूत्रों ने बताया कि इसकी डिजाइन तैयार करने के लिए ऐसी एजेंसी को ढूंढा जा रहा है, जो 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन विकसित कर सके. यह डिजाइन डबल लाइन कॉरिडोर की डिजाइन हो सकती है. एजेंसी को हाई स्पीड ट्रेन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी खरा उतरना पड़ेगा. मिल रही जानकारी के अनुसार बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए लखनऊ में विशेष जंक्शन तैयार किया जाएगा.
सूत्रों ने बताया कि सरकार चाह रही है कि बुलेट ट्रेन की इस यात्रा में अयोध्या को भी जोड़ा जाए ताकि रेल यात्रियों को अयोध्या धाम घूमने में आसानी हो सके. अयोध्या को बुलेट ट्रेन से जोड़ने के लिए स्पेशल कॉरिडोर भी बनाया जा सकता है. जंक्शनों की इस कड़ी में रायबरेली भी एक नए स्वरूप में दिख सकती है. सिलीगुड़ी और एनजेपी का तो कहना ही क्या!
जो भी हो, वर्तमान में यह किसी दिवा स्वप्न से कम नहीं है. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि योजना तो अच्छी है. पर यह मूर्त रूप कब लेगी, इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है. बुलेट ट्रेन के लिए स्पेशल गलियारा होता है. अगर सरकार के पास पर्याप्त संसाधन हो तभी यह विकास इतनी तेजी से संभव हो सकता है. कुछ लोग मोदी सरकार की यह अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देख रहे हैं.
