September 16, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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क्या सिलीगुड़ी बाजार में यूपीआई भुगतान पर ब्रेक लगेगा? क्या कहते हैं व्यापारी और दुकानदार?

अगर आप किसी दुकान पर ₹2000 से अधिक की खरीददारी करके उसका भुगतान यूपीआई से करते हैं तो शायद ही दुकानदार आपका यूपीआई से किया गया भुगतान स्वीकार कर सकेगा. बहुत हद तक संभावना है कि दुकानदार आपसे नगद भुगतान करने के लिए कहेगा. अगर आपकी जेब में नगद रुपए नहीं है तो वह आपसे बिल से ज्यादा भुगतान करने के लिए कहेगा. लेकिन अगर आप दुकानदार से तर्क करने लग गए गए कि नहीं सामान का जो बिल है उसकी रकम से ज्यादा भुगतान नहीं कर सकेंगे तो यह भी संभावना है कि दुकानदार आपको लौटा दे!

अगर कोई उलटफेर नहीं होता है तो अगले महीने 15 अक्टूबर से सिलीगुड़ी बाजार को एक झटका लगने जा रहा है. सरकार के दावे कुछ भी कहे, लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि बाजार में महंगाई का एक और दौर शुरू होने वाला है. दरअसल ₹2000 से ज्यादा यूपीआई पेमेंट करने पर नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया यानी एनपीसीआई ने चार्ज लगा दिया है. इसका भुगतान दुकानदारों को करना होगा. यानी यह चार्ज मर्चेंट्स के लिए है. जबकि आम आदमी के लिए यह फ्री है. लेकिन सरकार जिसे फ्री बता रही है, वह फ्री कैसे हो सकता है!

सिलीगुड़ी के नया बाजार समेत कई थोक बाजार के व्यापारियों और दुकानदारों ने खबर समय को जो अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, वे ना तो आम आदमी के हित में है और ना ही बाजार के हित में है. यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला चार्ज व्यापारी अथवा दुकानदार की जेब से लगेगा और इसको लेकर सिलीगुड़ी के दुकानदार तैयार नहीं है. दुकानदारों का मानना है कि कोई भी व्यापारी अपनी जेब से भुगतान नहीं कर सकता है. अगर ₹2000 से ज्यादा की खरीदारी करने पर चार्ज लगता है तो भला व्यापारी उपभोक्ता का चार्ज क्यों वहन करेगा? वह उपभोक्ता से नगद भुगतान के लिए कह सकता है या फिर सामान देने से मना कर सकता है.

दोनों ही स्थितियां बाजार के लिए अनुकूल नहीं है. सिलीगुड़ी के व्यापारियों ने कहा कि दुकानदार और ग्राहक का रिश्ता काफी नाजुक होता है. प्रेम, विश्वास और स्नेह की डोर से बंधा होता है. अगर दुकानदार ग्राहक को मना करता है तो यह ग्राहक का अपमान होगा और दुकानदार के लिए उसकी दुकानदारी पर प्रहार होगा! लेकिन अगर दुकानदार ग्राहक का यूपीआई भुगतान चार्ज खुद वहन करने लगे तो जल्द ही उसका व्यापार चौपट हो जाएगा. अगर दुकानदार ग्राहक से यूपीआई चार्ज वसूल करता है तो ऐसे में ग्राहक को सामान महंगा पड़ सकता है.

सिलीगुड़ी के कुछ व्यापारियों और दुकानदारों का मानना है कि सरकार के इस कदम से बाजार में नगद लेनदेन बढ़ेगा. क्योंकि ग्राहक महंगा सामान खरीदना नहीं चाहेगा और व्यापारी अपने हिस्से का लाभ बांटना नहीं चाहेगा. हालांकि सरकार दावा कर रही है कि उसका यह कदम छोटे और मझोले व्यापारियों के हित में है. परंतु मौजूदा स्थिति और यूपीआई भुगतान की जो नियमावली तय की गई है, वह दुकानदारों के हित में कैसे है! अगर उसके अनुसार चला जाए तो दुकानदार और व्यापारी को ही ग्राहक के द्वारा ₹2000 से ज्यादा यूपीआई भुगतान पर चार्ज देना पड़ेगा. जब दुकानदार ग्राहक से सामान की कीमत से ज्यादा कुछ नहीं लेता है, तो वह ग्राहक का अतिरिक्त भुगतान चार्ज क्यों देगा!

हालांकि कुछ व्यापारी यह भी कहते हैं कि एनपीसीआई के नियम अभी स्पष्ट नहीं है. जब यह लागू होगा उससे पहले सरकार का कोई ना कोई स्पष्टीकरण भी सामने आएगा. सरकार को यह बताना होगा कि आखिर मर्चेंट पर एनपीसीआई के नए नियम का प्रभाव कैसे नहीं होगा. कुछ दुकानदारों ने कहा कि आने वाले समय में संभव है कि सरकार कुछ वैकल्पिक तरीके ढूंढ निकाले. मौजूदा स्थितियों में एनपीसीआई के अनुसार ₹2000 से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों को 0.4% का शुल्क देना होगा. 75 हजार रुपए या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क ₹300 तय किया गया है.

एक तरफ तो हमारी सरकार जीरो cash की नीति पर काम कर रही है और नगद रहित लेनदेन को समाप्त करने के लिए देशभर में अभियान चला रही है. लेकिन दूसरी तरफ सरकार के ऐसे कदम जिन पर अमल करने से बाजार में नगद रहित लेनदेन के विपरीत नगद लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा. एनपीसीआई की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह कदम यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अधिक टिकाऊ वाणिज्यिक मॉडल बनाने के उद्देश्य है. इससे प्राप्त आय का उपयोग बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए किया जाएगा. साथ ही साइबर सुरक्षा, नवाचार और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी. यह कदम डिजिटल लेनदेन को और मजबूत करेगा.

पर सवाल यह है कि एनपीसीआई के इस कदम से व्यापारियों और दुकानदारों को क्या लाभ होता है! ₹2000 तक यूपीआई भुगतान तो सही है. लेकिन उससे अधिक भुगतान करने पर कोई भी व्यापारी या दुकानदार ग्राहक का चार्ज अपनी जेब से कैसे दे सकता है! यह एक व्यवहारिक बात है.इसको लेकर व्यापारियों में चिंता भी है. व्यापारी और दुकानदार उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनके हित में कोई फैसला ले सकती है. लेकिन जब तक सरकार का इस संदर्भ में अगली गाइडलाइंस नहीं आती है तब तक बाजार के व्यापारी और दुकानदार आशंकित और चिंतित हैं.

एक तो व्यापारी जीएसटी, ऑनलाइन व्यापार आदि विभिन्न कारणों से पहले से ही कम कमाई को लेकर परेशान हैं, ऊपर से एनपीसीआई के नए नियम को थोपे जाने पर उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा. जब व्यापारी को व्यापार में मुनासिब आय ना हो तो वह अपने व्यापार को कैसे जारी रख सकता है! बहरहाल देखना होगा कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले यूपीआई पेमेंट का नया नियम सिलीगुड़ी के व्यापारियों और दुकानदारों पर कितना असर करता है!

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