September 22, 2026
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नेपाल में किराए की कोख देने का फल-फूल रहा धंधा!

नेपाल तो पहले से ही गरीब देश रहा है. समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं की मार नेपाल के गरीब परिवारों को रास्ते पर ला देता है. इंडस्ट्री ना होने, रोजी रोजगार का संकट तथा बेरोजगारी ने सामान्य स्त्री पुरुषों के जीवन को नारकीय बना दिया है. हाल ही में नेपाल त्रासदी के बाद लोगों के पास घर में जो कुछ भी बचा था, वह सब तबाही की भेंट चढ़ चुका है. अब वहां महामारी के बीच भारत में पलायन, स्वास्थ्य संकट और अपने पैरों पर खड़ा होने की चिंता ने कई महिलाओं और युवतियों को मानव तस्करों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है.

भारत नेपाल बॉर्डर पर मानव तस्कर दलाल सक्रिय हो गये हैं. ये दलाल नेपाल की लड़कियों तथा महिलाओं की गरीबी और बेरोजगारी का खूब फायदा उठा रहे हैं. उन्हें पैसों का प्रलोभन देकर शारीरिक संपर्क और बच्चा पैदा करने के लिए उनकी कोख किराए पर लेने के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं. भारत के लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल की गरीब लड़कियों को भारत में प्रेग्नेंट कर गर्भस्थ शिशु की डिलीवरी तक उनकी सेवा के बदले 20 से 25 लाख रुपए तक में सौदा किया जा रहा है. गरीब परिवारों से संबंध रखने वाली ये लड़कियां अपनी मर्जी से सौदा कर रही हैं.

भारत नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय दलाल भारत में अमीर व निःसंतान दंपतियों से संपर्क करते हैं और उनसे नेपाली लड़कियों के किराए की कोख का एक-एक करोड रुपए में सौदा करते हैं. सौदा पक्का हो जाने के बाद दलाल भारत नेपाल बॉर्डर इलाके में रहने वाले गरीब परिवारों को निशाना बनाते हैं. भूख व बेरोजगारी से जूझती लड़कियों का ब्रेन वास करने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगता है. दलाल लड़कियों से 20 से 25 लाख रुपए में सौदा करते हैं. बाकी रकम उनकी जेब में जाता है. आखिर नेपाली लड़कियों को ही इस धंधे में क्यों लाया जा रहा है? जानकारों के अनुसार दलाल नेपाली लड़कियों को इसलिए प्रमुखता देते हैं कि संवैधानिक रूप से बच्चे की परवरिश और डिलीवरी के बाद उनका संतान पर कोई अधिकार नहीं रह जाता है. दूसरी तरफ भारतीय दंपतियों को इससे कोई वैधानिक परेशानी नहीं होती है.

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में त्रासदी के बाद किराए की कोख देने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ गई है. गरीब परिवारों की स्थिति ऐसी है कि वर्तमान में उन्हें खड़ा होने के लिए पैसा चाहिए. यही कारण है कि दलाल इसका लाभ उठा रहे हैं. वे लड़कियों को आसानी से बहला फुसला लेते हैं. एक-एक पैसे की मोहताज लड़कियों को जब 20 से 25 लाख रुपए तक का ऑफर दिया जाता है, तो वह इस धंधे को मना नहीं कर पाती हैं. सौदा पक्का हो जाने के बाद नेपाली लड़कियों को भारत में ही रहकर संतान के इच्छुक पुरुष के साथ सोना पड़ता है. प्रेग्नेंट होने से लेकर डिलीवरी तक महिला को पुरुष के साथ ही रहना पड़ता है. डिलीवरी के बाद युवती को उसके घर भेज दिया जाता है.

18 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में पोखरा, बुतवाल, गुलमी और काठमांडू मानव ट्रैफिकिंग का केंद्र बन गया है. यहां दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय है. वे गरीब परिवारों की नेपाली युवतियों अथवा महिलाओं को भारत लाते हैं. जहां उनके साथ किराए की कोख के लिए डील किया जाता है. इसमें सबसे ज्यादा दलालों को फायदा होता है. सौदा होने के बाद नेपाली महिलाओं को भारत में एक डेढ़ साल तक रुकना पड़ता है. अथवा जब तक वह गर्भवती होने से लेकर शिशु को जन्म नहीं दे देती, उन्हें भारत में ही रुकना पड़ता है. कुछ मामलों में दलाल शारीरिक संपर्क के बजाय आईवीएफ के जरिए बच्चा पैदा करने का सौदा करते हैं. महिलाएं दोनों तरीके से इस सौदे के लिए तैयार हो जाती हैं.

दैनिक भास्कर का स्टिंग ऑपरेशन और रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद नेपाल में समाचार पत्रों के जरिए यह मामला सुर्खियों में है. नेपाल के कुछ समाचार पत्रों ने नेपाल में मानव तस्करी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है और भारत नेपाल बॉर्डर पर मानव अपराध की बढती घटनाओं को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है. उकेरा नामक एक नेपाली समाचार पत्र में में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा है कि अगर इस तरह का मामला है तो उसकी जांच की जाएगी. हालांकि अधिकारी ने यह भी बताया कि अब तक इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

जो भी हो, अगर यह घटना सही है तो भारत और नेपाल दोनों के लिए यह एक चिंता का विषय है. नेपाल में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. नेपाल में अभूतपूर्व त्रासदी के बाद नेपाली स्त्री पुरुषों की स्थिति चिंतनीय बन गई है. यही कारण है कि चाहते हुए भी वे मानव तस्करों का विरोध नहीं कर पा रहे हैं. सवाल तो यह भी है कि आखिर क्यों नेपाल के सीमावर्ती गरीब परिवार की महिलाएं अनैतिक कार्य के लिए तैयार हो रही हैं? नेपाली महिलाओं की इस दयनीय हालत के लिए कौन जिम्मेवार है? नेपाल की सरकार उनकी स्थिति पर क्यों नहीं ध्यान दे रही है? क्या नेपाल बदहाल हो चुका है? अगर नहीं तो महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है? सवाल तो यह भी है कि अगर यह घटना सही है तो नेपाल सरकार भारत नेपाल बॉर्डर पर ऐसी घटनाओं की रोकथाम और अपराध पर लगाम लगाने के लिए क्या कार्रवाई करेगी?

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