इस बार सिलीगुड़ी से लेकर पूरे बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल की परंपरागत कला एवं संस्कृति के साथ बदलते समय के दौर की सभ्यता का समन्वय, पूजा पंडाल से लेकर प्रकाश सज्जा, पर्यावरण दर्शकों की पहुंच, सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और प्रशासनिक व्यवस्था का एक नया प्रयोग देखा जा सकेगा. सिलीगुड़ी में तो इसकी पुष्टि भी हो चुकी है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के साथ पूजा कमेटियों के प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक में एक रोड मैप तैयार कर लिया गया है.
सिलीगुड़ी में पूजा पंडाल निर्माण से लेकर पूजा घूमने वालों की सुरक्षा, पंडाल की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, पूजा विसर्जन, डीजे पर रोक, ट्रैफिक नियंत्रण, शहर के नागरिकों और उनके मकान की सुरक्षा, मनचलों तथा अपराध पर नियंत्रण, महिला सुरक्षा, ट्रैफिक अपडेट, सूचना सहायता केंद्र इत्यादि के बारे में जो योजना तैयार की गई है, अगर उसे जमीन पर लागू किया जाता है तो बीजेपी सरकार की यह पहली ऐतिहासिक पूजा हो सकती है! दुर्गा पूजा के दौरान आप शहर में पंडाल से लेकर ट्रैफिक और विभिन्न क्षेत्रों में एक बड़ा बदलाव देख सकते हैं.
आइए जानते हैं, क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं. इस बार पंडाल निर्माण में जैविक सामग्री के प्रयोग पर बल दिया गया है. थर्माकोल, पीवीसी प्लास्टिक के इस्तेमाल आदि पर रोक रहेगी. सीधी बात है कि पंडाल से लेकर प्रतिमा निर्माण में यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिमा विसर्जन के बाद पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे. पूजा पंडाल में आग लगने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी व्यवस्था ली गई है. अग्निशमन यंत्रों के अलावा पूजा पंडाल में प्रवेश द्वार की चौड़ाई 12 फीट तथा पंडाल की ऊंचाई लगभग 40 फीट रखनी होगी.
पूजा पंडाल निर्माण करते समय बिजली की लाइन से पर्याप्त दूरी रखनी होगी. पूजा पंडाल तैयार करते समय आयोजकों को सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा. पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ पर नियंत्रण के लिए वॉलिंटियर्स की तैनाती के अलावा शहर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे. इसके पीछे प्रशासन का उद्देश्य यह है कि जब लोग पूजा घूमने निकले तो सूचना बोर्ड देखकर ट्रैफिक से लेकर पार्किंग स्थल इत्यादि की ताजा स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकें. इससे पूजा पंडालों में भी भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी. सड़क पर वाहनों का दबाव भी कम होगा.
इस बार प्रतिमा विसर्जन में भी विशेष सावधानी बरती गई है. पहली बार बंगाल की संस्कृति के अनुरूप ही प्रतिमाओं का विसर्जन होगा. प्रतिमा विसर्जन में क्रेन का उपयोग नहीं होगा. धार्मिक भावना और पवित्रता को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा का विसर्जन होगा. ढाक तो बजेंगे, लेकिन डीजे नहीं होगा. इस दौरान भीड़भाड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल तो होगा ही, इसके साथ ही पूजा कमेटियों द्वारा वॉलिंटियर्स की तैनाती करनी होगी. यह सब कैसे होगा, इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा, ताकि किसी तरह से अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो सके.
दुर्गा पूजा के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी रोड मैप तैयार कर लिया गया है. इस बार 5000 सीसीटीवी कैमरे की निगाह अपराधियों, मनचलों, बदमाशों और चोरों पर रहेगी. वर्तमान में सीसीटीवी कैमरे की संख्या लगभग ढाई हजार है. पूजा के दौरान लोग आमतौर पर घर में ताला लगाकर पूजा घूमने निकलते हैं. ऐसे में उनके बंद मकान में चोरी या डकैती ना हो सके, इसके लिए सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. पुलिस कमिश्नर सैयद वकार रजा ने सिलीगुड़ी के लोगों से अपील की है कि पूजा के दौरान घर से बाहर जब घूमने निकले तो सोशल मीडिया पर अपने बंद मकान की तस्वीर पोस्ट ना करें.
ऐसा करना घर की असुरक्षा को बढ़ाता है. अनेक लोगों की आदत होती है कि जब वह घर से बाहर होते हैं, तो बंद घर की तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं. इससे अपराधियों को घर खाली होने की जानकारी मिल जाती है. हालांकि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अधिकारियों ने पूजा के दौरान चोरी, डकैती, एटीएम लूट आदि की वारदातों को रोकने के लिए सभी तरह की तैयारी कर ली है, फिर भी लोगों की सजगता से ही इस पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है.
दुर्गा पूजा के दौरान महिलाओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं भी घटती हैं. कई बदमाश और मनचले अकेली लड़कियों पर अश्लील कमेंट करते हैं. उन्हें परेशान करते हैं. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार शहर की महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर बार की तरह पुलिस प्रशासन की तरफ से विनर्स टीम और दुर्गा वाहिनी टीम संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहेगी, जो एक सूचना के बाद घटनास्थल पर पहुंचकर मनचलों की मरम्मत और महिला की सुरक्षा करेगी. उपरोक्त के अलावा पूजा के दौरान सिलीगुड़ी में विभिन्न स्थानों पर खोजी कुत्तों की टीम भी रहेगी.
इस तरह से सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारियों ने जिस तरह का रोड मैप तैयार किया है, अगर उसका उचित तरीके से पालन किया जाता है तो सिलीगुड़ी में यह पहली पूजा होगी, जहां सुरक्षा, संस्कृति, दिव्यता, धार्मिकता के साथ ही पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी मिल सकती है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जिस तरह से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का निर्देश मिला है, पुलिस अधिकारी और संबंधित विभागों के लोग अपने अपने धर्म और कर्तव्यों का पालन करेंगे और सिलीगुड़ी की सुरक्षा करते हुए दुर्गा पूजा के इतिहास में एक नया अध्याय अंकित करेंगे!
