अगर योजना के अनुसार सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो बहुत जल्द आप सिलीगुड़ी कोर्ट या कचहरी के अंदर सिगरेट -पान- गुटखा की ना तो दुकान देख सकेंगे और ना ही वकीलों अथवा मुवक्किलों को पान गुटखा चबाते और इधर-उधर पीक थूकते देख सकेंगे. कदाचित आपको ऐसे वकील भी नजर नहीं आएंगे जो कोर्ट परिसर में कहीं भी स्मोकिंग कर लेते हैं.
सिलीगुड़ी प्रधान डाकघर के निकट स्थित है सिलीगुड़ी कचहरी. जैसे ही आप कचहरी के भीतर प्रवेश करेंगे तो वहां का नजारा कुछ अलग ही नजर आता है. सिलीगुड़ी कचहरी परिसर के भीतर गंदगी जरूर नजर आएगी. सिलीगुड़ी कोर्ट की दीवारें कई जगह पान- गुटखा से लाल नजर आती हैं. कोर्ट परिसर में ऐसे भी कई स्थान है जहां गंदगी सर्वाधिक नजर आती है.
आज भी कई जगह दीवारों पर, कोने में लोगों को नजरे बचा कर गुटखा और पान थूकते देख सकते हैं. इनमें कुछ वकील भी नजर आएंगे. वहीं आसपास में गुटखा पान सिगरेट की चलती फिरती दुकान भी नजर आ सकती है. परंतु अब इन सभी पर प्रतिबंध लग सकता है. यह काम सरकार नहीं करेगी, बल्कि खुद अदालतों के न्यायाधीश करने वाले हैं. कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश घुगे का फरमान जारी हो चुका है.
मिल रही जानकारी के अनुसार मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे ने एक बड़ी पहल की है. न्यायाधीश महोदय ने कोर्ट परिसर से गंदगी समाप्त करने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने इस संबंध में जिला अदालतों के न्यायाधीशों को भी पत्र लिखा है और उनसे अपील की है कि वह अपने-अपने क्षेत्र में कोर्ट परिसर में गंदगी फैलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाएं. सूत्रों ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश के पत्र को सकारात्मक रूप से लिया गया है.अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो कोलकाता हाई कोर्ट समेत सभी जिला अदालतों के परिसर में सिगरेट, पान और गुटखा की बिक्री नहीं होगी.
हालांकि कानून में सरकारी परिसरों में सिगरेट पान गुटखा पर प्रतिबंध का उल्लेख है और इस तरह की व्यवस्था भी की गई है. लेकिन इसका पालन नहीं होता है. अब मुख्य न्यायाधीश समेत जिला अदालतों के न्यायाधीश कोर्ट परिसर की सफाई को लेकर एक अभियान चला रहे हैं और इससे यह संभावना बलवती होती है कि आने वाले समय में उनका अभियान सफल होगा.
अगर वकीलों से लेकर मुवक्किलों तथा अन्य जिम्मेदार नागरिक सख्ती से कानून का पालन करें तो सिलीगुड़ी ही क्या बल्कि बंगाल की कोई भी कचहरी स्वच्छ और साफ नजर आएगी. कोर्ट परिसर का नजारा ही बदल जाएगा.
मुख्य न्यायाधीश की पहल को लेकर कुछ वकील अपना अलग तर्क रखते हैं. उनका इशारा साफ है कि कोई भी आदत एकदम से छूट नहीं सकती है. जो वकील धूम्रपान का सेवन करते हैं, उनके लिए कोर्ट परिसर में अलग स्थान या जोन बनाया जाना चाहिए. इसको ध्यान में रखकर ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए. अब इस मुद्दे पर विचार करने के लिए बार काउंसिल और बार एसोसिएशन बैठक कर सकती है. इसके पश्चात ही अंतिम निर्णय सामने आ सकता है.
अगर अंतिम फैसला उम्मीद के अनुसार सामने आता है तो निश्चित रूप से सिलीगुड़ी कोर्ट ही नहीं बल्कि बंगाल का प्रत्येक छोटा बड़ा कोर्ट स्वच्छ और साफ नजर आएगा. कोर्ट परिसर से गंदगी का नामोनिशान मिट जाएगा.
