पहले खुदरा महंगाई और अब थोक महंगाई की मार कुछ ऐसी ही है, जैसे एक हमले से बचाव के लिए आदमी दूसरी ओर मुंह कर लेता है. लेकिन जब दूसरी ओर से भी हमला हो तो आम इंसान बेबस हो जाता है. महंगाई के जोर के झटके ने आम आदमी को भी बेबस कर दिया है.
आप घर से दुकान, बाजार कहीं भी खरीददारी करने निकल जाइए. साग सब्जी से लेकर वस्त्र, खाने पीने की वस्तुएं, फैक्ट्री में निर्मित सामान, ईंधन, बिजली सब जगह जबरदस्त महंगाई! आम आदमी ढूंढता रह जाता है दुकान- दुकान व बाजार -बाजार, कहीं तो कुछ सस्ता मिले! महंगाई का यह सिलसिला तो काफी पुराना है. लेकिन सितंबर महीने में थोक महंगाई दर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई है.
यह सबसे बड़ी चिंता की बात है. आमतौर पर अक्टूबर महीने से लेकर फरवरी मार्च तक महंगाई नियंत्रित रहती है. कम से कम खुदरा महंगाई दर न्यूनतम रहती है. अक्टूबर का महीना चल रहा है. इस मौसम में खाने पीने की वस्तुओं से लेकर किचन में इस्तेमाल होने वाले सामान, कपड़े इत्यादि नियंत्रित मूल्य पर ही उपलब्ध हो जाते हैं.
यह पहला मौका है जब अक्टूबर महीने में महंगाई ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. महंगाई के इस सुरसा मुंह ने अब आम आदमी की खुशियों को निगलना शुरू कर दिया है और जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है.
सिलीगुड़ी के बाजार में टमाटर, प्याज, अदरक, बैंगन, गोभी से लेकर हरी मिर्च तक सब कुछ महंगी है. पूजा का बाजार चल रहा है. लोग नए कपड़े जूते आदि खरीद रहे हैं. मॉल में पहुंच कर पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में इस साल सामान कितना अधिक महंगा हो गया है.
खुदरा महंगाई दर 23 महीने के उच्चतम स्तर पर बताई जा रही है. खुदरा महंगाई आम लोगों की ओर से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव दिखाती है, जबकि थोक महंगाई थोक स्तर पर कीमतों की चाल बताती है.
थोक महंगाई का सीधा संबंध ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों से है. ईंधन और बिजली की महंगाई 25.85% पर पहुंच गई है. खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस की महंगाई के चलते अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी बदलाव देखा जा रहा है. सरसों तेल ₹200 प्रति लीटर से भी पार हो गया है.
कोयला, धातु, रसायन, रासायनिक उत्पाद, खाद, कपड़ा ,रबर ,प्लास्टिक के सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आदि वस्तुओं की महंगाई लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है. कोई भी सामान पिछले मूल्य पर स्थिर नहीं है.
हालांकि भारत सरकार महंगाई पर नियंत्रण के लिए सभी तरह के आवश्यक कदम उठा रही है. परंतु एक सबसे बड़ा तल्ख़ सच यह है कि वस्तु निर्माण की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में निर्माणकर्ता ज्यादा समय तक पुरानी दर पर वस्तुएं आम उपभोक्ता तक नहीं पहुंचा सकते हैं. नया मूल्य निर्धारण करने का उनपर दबाव बना रहेगा.
जब तक महंगाई बढ़ाने वाले कारको की जड़ तक पहुंचने और उसकी सफाई करने की कोशिश नहीं होती है, तब तक महंगाई की रोकथाम की कोई भी कोशिश पूरी तरह सफल नहीं हो सकती है.
