October 23, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

लालमोहन घाट पर प्रतिमा विसर्जन का यह तरीका ‘मां’ का सम्मान या अपमान?

सिलीगुड़ी के लालमोहन मौलिक निरंजन घाट पर उस समय वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें रैंप पर टिकी हुई थीं, जब टेक्निशियनों ने आधुनिक तकनीक की मदद से मां दुर्गा की प्रतिमा को धीरे-धीरे नदी की ढाल की ओर झुकाना शुरू कर दिया.

यहां तक तो ठीक था, लेकिन जैसे ही रैंप से मां की प्रतिमा को नीचे नदी के जल में धकेला गया तो अनेक धर्म प्रिय लोगों के दिल पर धक्का भी लगा. क्योंकि मां की प्रतिमा सीधे सर के बल नदी के जल में गिरी थी. प्रतिमा विसर्जन की यह तकनीक अनेक लोगों को निराश कर गई.

सवाल यह भी नहीं है कि प्रतिमा विसर्जन का यह तरीका शास्त्र सम्मत है या नहीं. सवाल यह भी नहीं है कि इस तरीके से प्रतिमा विसर्जन शुभ है या अशुभ. सवाल उस मां के प्रति श्रद्धा व सम्मान का है, जिसकी भक्ति और आराधना में पूरे 10 दिनों तक पूरा सिलीगुड़ी शहर डूबा हुआ था.

ऐसी मां की अंतिम विदाई और विसर्जन का यह तरीका सैकड़ों लोगों को रुला गया. अनेक लोगों ने इस पर कमेंट भी किए हैं और अपने दिल के दर्द व पीड़ा का भी इजहार किया है.

किसी नदी या पोखर में प्रतिमा विसर्जन के कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. प्रतिमा विसर्जन के लिए धार्मिक विधि का पालन तो जरूरी है ही, इसके साथ ही पर्यावरण और सरकारी नियमों तथा निर्देशों का पालन भी उतना ही आवश्यक होता है.

सामान्य तौर पर नदी में प्रतिमा विसर्जन से पहले देवी की अंतिम पूजा और आरती की जाती है, फिर देवी को जल में प्रवाहित करने से पहले उसी स्थान पर घुमाया जाता है. उसके बाद धीरे-धीरे और श्रद्धापूर्वक प्रतिमा को जल में प्रवाहित किया जाता है. इसमें आदर, श्रद्धा और सम्मान झलकता है.

लेकिन आप वीडियो में देखिए कि जिस तरह से आधुनिक तकनीक की मदद से रैंप से मां की प्रतिमा को नदी के जल में गिराया जाता है तो प्रतिमा सर के बल नदी के जल में गिरती है. हम धार्मिक शास्त्रों की बात ना करें, लेकिन अगर हम धर्म की बात करते हैं तो उसी धर्म ने सिखाया है कि मां की सम्मान पूर्वक अंतिम विदाई होनी चाहिए.

रैंप से जिस तरह से प्रतिमा को नीचे धकेला जाता है, क्या उसमें श्रद्धा व देवी के प्रति सम्मान नजर आता है? कहीं ना कहीं कठोरता का एहसास होता है. यानी इसमें यांत्रिकता नजर आती है. इससे क्या यह संदेश नहीं जाता है कि आधुनिक समय में मानव यांत्रिक होता जा रहा है?

क्या धर्म एक दिखावा है? क्या धर्म एक औपचारिकता है? धर्म और श्रद्धा की बात हो तो वहां यांत्रिकता का कोई स्थान नहीं होता है. धर्म और श्रद्धा दिल से जुड़े हैं, जहां मन को अपूर्व शक्ति मिलती है. इस तरह से मन, मस्तिष्क और दिल को एकाकार करके मां की आराधना की जाती है तो उसका प्रतिफल जरूर मिलता है. ऐसे विचार और श्रद्धा रखने वाले लोग शायद ही प्रतिमा विसर्जन की इस तकनीक को दिल से स्वीकार करें.

बहरहाल यह बहस का विषय है. लेकिन दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रिया में अपना फैसला बता दिया है. सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल एनजीटी और प्रशासनिक नियमों के अनुसार ही था.

सिलीगुड़ी नगर निगम ने लगभग 10 लाख रुपए की लागत से लोहे का यह रैंप तैयार किया था. यूं तो निगम प्रशासन यांत्रिक तरीके से प्रतिमा विसर्जन की पद्धति तैयार कर रहा है. पर कई लोगों को यह अच्छा नहीं लग रहा है. लोगों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

कई लोगों ने यह भी बताया कि इस तरीके से प्रतिमा विसर्जन कहीं ना कहीं लोगों की धर्मिक आस्था को चोट पहुंचाता है. आपको बताते चलें कि बृहस्पतिवार से सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में प्रतिमा विसर्जन शुरू हो गया. कल भी कई प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था.

आज भी कई प्रतिमाओं का विसर्जन लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट समेत नौकाघाट पर किया गया. पहली बार सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा के दौरान डीजे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहा. प्रशासन ने कार्निवल की भी इजाजत नहीं दी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *