October 29, 2026
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एक अनार सौ बीमार… सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में जानिए भाजपा को किनसे खतरा , कौन बनेगा वार्ड का हीरो?

सिलीगुड़ी जिला भाजपा में ऊपर से भले ही सब कुछ ठीक नजर आता हो, पर जमीनी हकीकत ऐसी नहीं है. मौजूदा हालात तो यह है कि सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव के लिए ताल ठोकने वाले एक से अधिक चेहरे नजर आते हैं. उम्मीदवार एक होगा. लेकिन टिकट के दावेदार एक से अधिक होंगे. ठीक उसी तरह से जैसे एक अनार सौ बीमार…

सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है.लेकिन समझा जाता है कि 2027 के शुरुआती महीनों में कभी भी यहां चुनाव की रणभेरी बज सकती है! जब से तृणमूल कांग्रेस का बोर्ड भंग हुआ है, तभी से ही यहां भाजपा अपना बोर्ड गठन करने का स्वप्न संजो रही है. भाजपा नेताओं में यह विश्वास बिखरे विपक्ष से उत्पन्न हुआ है.

कल तक सिलीगुड़ी पर राज करने वाले टीएमसी के नेता और पूर्व पार्षद अब कहीं नहीं नजर आ रहे हैं. विपक्षी नेता या तो बीजेपी के आकाओं की चमचागिरी करने में लगे हैं. या फिर शॉर्टकट तरीके से अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं. वाममोर्चा के नेताओं की भी हालत अच्छी नहीं है. वे अलग-अलग दिशाओं में भ्रमित हो रहे हैं.

काफी समय के बाद पूर्व मेयर गौतम देव नजर भी आए तो विपक्ष की एकजुटता की बात करते हुए उनकी आवाज कमजोर नजर आई. कुल मिलाकर भाजपा को सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव में एक आसान जीत नजर आ रही है. कदाचित यही कारण है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के किसी भी वार्ड में चले जाइए, वहां भाजपा का जैसे हर कार्यकर्ता खुद को किसी नेता से काम नहीं मानता

दीपावली, छठ पूजा, काली पूजा आदि का शुभकामना संदेश देना हो या किसी वार्ड में सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना हो, वहां भाजपा के बड़े नेताओं की मौजूदगी तो कम ही नजर आती है. लेकिन छूटभैया नेता पोस्टर में, बैनर में जरूर नजर आएंगे. इस तरह से जैसे वे संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा के भावी उम्मीदवार वही हैं.

सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत कुल 47 वार्ड हैं, जिन्हें जल्द ही 63 वार्डो में परिणत किया जाना है. परिसीमन का कार्य चल रहा है. सिलीगुड़ी भाजपा के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता अपना दबदबा बनाए रखने के लिए कुछ कार्यकर्ताओं और समर्थकों की टोली लेकर किसी न किसी अभियान में चल पड़ते हैं. पोस्टर में नाम के साथ ही समाज सेवा के कार्यों में भी उनकी मौजूदगी देख सकते हैं. इस तरह से पार्टी के बड़े नेताओं की नजर में उनका हीरो बनकर साबित करना चाहते हैं.

इस बार भाजपा कार्यकर्ताओं के बढ़ते विश्वास का सबसे बड़ा कारण पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा दिया गया यह संकेत है कि भाजपा टिकट वितरण में किसी की सिफारिश स्वीकार नहीं करेगी. भाजपा के पुराने नेता और कार्यकर्ताओं को पार्टी में तरजीह दी जाएगी. प्रदेश के शीर्ष नेताओं के बयान के बाद प्रत्येक वार्ड में आज स्थिति यह है कि एक से अधिक भाजपा कार्यकर्ता खुद को पार्षद उम्मीदवार साबित करने में जुट गए हैं.

जानकार मानते हैं कि भाजपा में हर कार्यकर्ता को खुद को सिलीगुड़ी नगर निगम का भावी उम्मीदवार साबित करने की कोशिश भाजपा के राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ऐसी स्थिति भितरघात को जन्म देती है. अगर कार्यकर्ताओं के बीच किसी कार्यकर्त्ता का भावी उम्मीदवार के रूप में चयन किया जाता है तो अन्य कार्यकर्ताओं में यह असंतोष उत्पन्न कर सकता है. यही कार्यकर्ता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की जीत की राह में रोड़ा बन सकते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि जब तक सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव की घोषणा नहीं हो जाती है, तब तक तो ठीक है. लेकिन जैसे ही यहां चुनाव की घोषणा और उसके पश्चात टिकट वितरण की बारी आएगी तो पार्टी में बगावत उत्पन्न हो सकती है. ऐसे में पार्टी नेताओं को उम्मीदवार का चयन करते समय पूरी सावधान रखने की जरूरत है.

यह आसान नहीं लगता है. क्योंकि यह स्थिति एक अनार सौ बीमार जैसी ही लगती है. उम्मीदवार तो एक ही होगा. अगर पांच उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार का चयन किया जाता है तो बाकी चार उम्मीदवार बागी हो सकते हैं और खुद को निर्दलीय या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं. ऐसे बागी उम्मीदवारों से निपटना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा.

मौजूदा स्थिति तो यह है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत लगभग सभी वार्डों में भाजपा के कुछ चर्चित चेहरे अलग-अलग गुट बनाकर जैसे अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. यह गुटबाजी भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा सकती है. किसी समय ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को समाप्त करने के लिए साम दाम दंड भेद जैसी रणनीति अपना चुकी है. लेकिन फिर भी तृणमूल कांग्रेस की गुटबाजी दूर नहीं हुई.

कुछ इसी तरह की स्थिति भारतीय जनता पार्टी में भी बनती जा रही है. ग्राउंड रिपोर्ट तो यही है कि एक-एक वार्ड में भाजपा के 10-10 चेहरे वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोकने में जुट गए हैं. पार्टी के शीर्ष नेता अभी खामोश हैं और सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि इस बार सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जो रणनीति अपनाई है, उसमें उम्मीदवार का चयन करते समय इस पर विचार किया जाएगा कि उम्मीदवार चुनाव जीतने में सक्षम है या नहीं.

पार्टी इस पर भी ज्यादा गौर करने वाली नहीं है कि उम्मीदवार किसी दूसरी पार्टी से भाजपा में शामिल हुआ है. चाहे वह तृणमूल कांग्रेस या वाममोर्चा का ही कार्यकर्त्ता क्यों ना हो. अगर वह अपने वार्ड में जीत की क्षमता रखता है तो पार्टी उसे टिकट दे सकती है. पार्टी में आंतरिक विरोध या बगावत की आंच तो तब तेज होगी, जब पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की बलि देकर दूसरी पार्टी से आए किसी नेता को टिकट दिया जाएगा. तब बगावत को रोकना आसान नहीं होगा.

कुल मिलाकर वस्तु स्थिति यह है कि अगर भाजपा किसी वार्ड में सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव जीतने में असफल रहती है तो इसका सबसे बड़ा कारण पार्टी में भितरघात, असंतोष और कार्यकर्ताओं की बगावत हो सकती है. प्रदेश भाजपा नेता और सिलीगुड़ी जिला भाजपा के हैवीवेट नेता इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. उन्हें विश्वास है कि वक्त पर इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा. अगर ऐसा होता है तो भाजपा की डगर कोई ज्यादा मुश्किल नहीं होगी.

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