ट्रेन से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले मुसाफिरों के लिए यह एक महत्वपूर्ण खबर है. रेलवे ने जो फैसला किया है, उससे कई यात्रियों की नींद हराम हो जाएगी. उन्हें कोच में रात काटना भारी पड़ सकता है. खासकर उन यात्रियों के लिए परेशानी हो सकती है जो हमेशा अपने मोबाइल से चिपके रहते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि मोबाइल टाइम पास करने का एक अच्छा साधन है.
इसलिए वह मोबाइल पर लगे रहते हैं. उन्हें मोबाइल की बैटरी चार्ज करने की भी चिंता नहीं रहती है. क्योंकि कोच में बर्थ के सामने ही चार्जिंग पॉइंट रहता है. यात्री को जब भी आवश्यकता होती है, वह अपने मोबाइल को चार्ज कर सकता है. अब ऐसे लोगों की ही नींद हराम होने वाली है!
वास्तव में भारतीय रेलवे ने फैसला किया है कि ट्रेन में यात्रियों को रात्रि 11:00 बजे से लेकर सुबह 5:00 बजे तक मोबाइल चार्जिंग नहीं करने दिया जाएगा. इस दौरान कोई भी मुसाफिर अपने मोबाइल को ना तो चार्ज करेगा और ना ही कोई अन्य गैजेट्स चार्ज कर सकता है. इस नियम को सख्त बनाया गया है.भारतीय रेलवे ने सभी जोनल बोर्ड को इस संबंध में निर्देश भी जारी कर दिया है.
आपको बता दें कि कुछ समय पहले दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में एक घटना घटी थी. जिसको लेकर पूरे भारत में विवाद खड़ा हो गया था. वास्तव में एक रेल यात्री का पावर बैंक चार्जिंग पर लगा था. अचानक ही उसका चार्जिंग बैंक फट गया और तेज धुएं से पूरा कोच भर गया. यात्रियों में हड़कंप मच गया. इस घटना के बाद 26 अक्टूबर को भारतीय रेलवे की ओर से एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई थी.
भारतीय रेलवे ने सभी जनल बोर्ड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि रात्रि 11:00 बजे से लेकर सुबह 5:00 तक रेलवे यात्री अपना मोबाइल चार्ज नहीं कर सके. जारी निर्देश के अनुसार यात्रियों पर सख्त निगरानी रखने के लिए सुपरवाइजर और अधिकारी को दायित्व दिया गया है. अधिकारी औचक निरीक्षण भी कर सकते हैं. कहने का मतलब यह है कि हर यात्री को इस नियम का सख्ती से पालन करना होगा.
मालूम हो कि भारतीय रेलवे का यह कोई नया नियम नहीं है. यह नियम तो 2014 में ही बन गया था, जब नांदेड़ एक्सप्रेस में अग्निकांड की घटना घटी थी. इसी तरह से चार्जिंग को लेकर घटी घटना के बाद रेल के अधिकारियों ने मामले की जांच कर रेलवे को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. उसके बाद 19 जून को भारतीय रेलवे की ओर से मोबाइल चार्ज को लेकर पाबंदी लगा दी गई. एक बार फिर से मार्च 2021 में भी इस नियम को लागू किया गया था. अब एक बार फिर से भारतीय रेलवे ने इस नियम को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है!
