पुलिस ने एक 11वीं कक्षा की छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या के आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत और साक्ष्य एकत्र कर लिए थे.वह आरोपी को लेकर घटनास्थल पर पहुंची. दरअसल पुलिस सीन रीक्रिएट करना चाहती थी. आरोपी पुलिस कर्मियों के बीच घिरा था. वह खामोश था. अचानक उसने फुर्ती से एक सिपाही पर हमला कर दिया और उसकी बंदूक छीन कर पुलिस पर तान दी. पल भर के लिए पुलिस वाले स्तंभित रह गए. इसी बीच आरोपी ने वहां से निकल भागने की कोशिश की. तब पुलिस ने आरोपी पर गोली चलाई और उसे ढेर कर दिया. यह पुलिस का बयान है.
पश्चिम बंगाल में एक ही दिन में पुलिस एनकाउंटर की दो अलग-अलग घटनाएं पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गयी हैं. उत्तर 24 परगना की गाईघाटा के बाद मुर्शिदाबाद जिले के धुलियान में भी पुलिस की गोली से एक अन्य आरोपी की मौत हुई है.आरोपी का नाम समाउन शेख है. पुलिस ने उसका एनकाउंटर ठीक उसी प्रकार से किया है, जिस प्रकार से उत्तर 24 परगना मामले में किशोरी से दुष्कर्म व हत्या के मामले में आरोपी का किया था. पुलिस ने बयान दिया है कि आरोपी पुलिस की सर्विस रिवॉल्वर छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था. उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी. जिसके जवाब में पुलिस ने गोलीबारी की और वह एनकाउंटर में मारा गया
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार के 5 महीने भी नहीं हुए और पुलिस एनकाउंटर की 3 बड़ी ऐसी घटनाएं सामने आईं, जहां पुलिस के एक्शन को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है. अधिकांश भाजपा नेताओं ने पुलिस के कदम का स्वागत किया है. RGकर मामले में निर्भया की मां ने कहा है कि पुलिस ने ठीक किया है. उनका इशारा साफ था कि अगर कोलकाता में RGकर घटना के समय प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो उनकी बेटी को तुरंत इंसाफ मिल जाता. जिस तरह से अब दुष्कर्म व हत्या के आरोपियों को पुलिस ने देना शुरू कर दिया है.
पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता और प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी सरकार पर तंज कसते हुए पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा है कि बंगाल में शासक का कानून नहीं बल्कि कानून का शासन चल रहा है. बंगाल की एक विशाल आबादी पुलिस के कदमों का समर्थन कर रही है. जनता कह रही है, जो काम पिछली सरकार में पुलिस नहीं कर दिखाई, भाजपा सरकार की पुलिस ने अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाना शुरू कर दिया है.
कोई ज्यादा समय नहीं हुआ, जब सिलीगुड़ी के मल्लागुड़ी इलाके में एक स्कूली छात्रा के साथ रेप और उसका मर्डर कर दिया गया था. आरोपी मोहम्मद अब्बास को तुरंत फांसी देने की मांग को लेकर काफी हंगामा भी बरपा गया. लेकिन आज तक पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिला है. इसी तरह से कोलकाता में RGकर मामले में निर्भया को इंसाफ नहीं मिला. ऐसे अनेक मामले हैं, जो या तो अदालतों में लंबित हैं या फिर दोषी आरोप मुक्त या फिर जमानत पर जेल से बाहर हैं. पीड़ित पक्ष न्याय की जंग में दर-दर भटक रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के साथ ही पुलिस की कार्यशैली भी बदली है. अगर कोई व्यक्ति किसी महिला का रेप व उसका मर्डर कर देता है तो ऐसे अपराधी को जेल भेजने से बेहतर उसका एंकाउंटर कर देने का समर्थन एक विशाल जनसमूह करने लगा है. यह बदले वक़्त की मांग भी है. लेकिन हमारा तंत्र संविधान और कानून के दायरे में ही मुलजिम को सजा दिलाने की सिफारिश करता है. इस प्रक्रिया में न्याय में विलंब की गुंजाइश रहती है.
हमारे देश में रेप और मर्डर के आरोपी का जब कोर्ट में अपराध साबित हो जाता है, तब दोषी को सश्रम आजीवन कारावास और कुछ मामलों में मृत्युदंड की सजा भी दी जाती है. लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया काफी लंबी चलती है. सबूत और गवाह जुटाने पड़ते हैं. तारीख पर तारीख के अलावा जांच अधिकारी को कोर्ट में आरोप साबित करने में पसीने निकलने लगते हैं. अधिकतर मामलों में तो ऐसे आरोपी जमानत भी पा लेते हैं. ऐसे में पीड़ित को इंसाफ नहीं मिल पाता है.
कभी-कभी देखा जाता है कि पीड़ित पक्ष व समर्थक तत्काल इंसाफ की मांग में या तो कोर्ट या पुलिस थानों का घेराव करने लगते हैं या फिर कभी-कभी जब आरोपी को अदालत में पेश किया जाता है, तब उस समय पीड़ित पक्ष अथवा आरोपी के कारनामों से गुस्साए लोग सीधे आरोपी पर हमला कर देते हैं. सिलीगुड़ी कोर्ट में इस तरह के कई मामले पूर्व में घटित हो चुके हैं, जहां आरोपी की जान पर बन आयी थी. स्पष्ट है कि पीड़ित पक्ष तो तुरंत हिसाब चाहता ही है, आम लोग भी यही चाहते हैं.
अगर भारत को छोड़ दे तो दुनिया के कई देशों में tit for tat यानी जैसे को तैसा सजा देने का प्रावधान है. जैसे अरब देशों में हत्या और बलात्कार के मामलों में दोषी को तुरंत फांसी दी जाती है. भारत में कानून सम्मत और संविधान सम्मत कार्रवाई की जाती है. हमारे कानून में कई प्रावधान तथा जटिलताओं के चलते पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ मिलने में काफी विलंब होता है. कदाचित इसलिए इंसाफ पीड़ित को इंसाफ और न्याय दिलाने की कोशिश में पुलिस कुछ और तरीका ढूंढ लेती है. पुलिस की कार्यशैली को कहीं ना कहीं सरकार का समर्थन भी प्राप्त होता है.
उत्तर प्रदेश में योगी मॉडल पूरे भारत में प्रसिद्ध है. इस प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाएं सर्वाधिक हुई हैं. यानी दोषी को बचाने का कोई मौका दिए बगैर उसे सीधा ठोक दो. मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी संकेत में भी कह चुके हैं कि संगीन मामलों का अपराधी बचना नहीं चाहिए. उत्तर प्रदेश या तो बुलडोजर या फिर एनकाउंटर के लिए जाना जाता है और वहां इसके कारण व्याप्त शांति और अपराधियों में दहशत का उदाहरण भी दिया जाता है.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी योगी आदित्यनाथ को अपना आदर्श मानते हैं और उनके योगी मॉडल की कई बार प्रशंसा भी कर चुके हैं. ऐसा लगता है कि बंगाल में भी ‘अपराधी’ को तुरंत सजा देने का मॉडल अपनाने की कोशिश की जा रही है. इससे पहला राज्य में अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर मॉडल को अपनाया जा चुका है. सिलीगुड़ी इसका उदाहरण है.
राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई से लेकर अक्टूबर 2026 के बीच राज्य में रेप और मर्डर के मामले में अब तक 2 से अधिक पुलिस एनकाउंटर की पुष्टि हो चुकी है. पहला एनकाउंटर 8 जुलाई 2026 को तब हुआ था, जब दक्षिण 24 परगना के बरूईपुर इलाके में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार और हत्या के आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. पुलिस के अनुसार आरोपी सीन recreate करने के दौरान हथियार छिनकर भागने की कोशिश कर रहा था. तब यह राज्य में चर्चा का विषय बना था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे.
ठीक इसी तर्ज पर अब दूसरा एनकाउंटर सामने आया है. 27 अक्टूबर 2026 को घटी एक पर एक दो बडी एनकाउंटर की घटनाओं ने यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या बंगाल एनकाउंटर के मामले में दूसरा उत्तर प्रदेश बनने जा रहा है? इस मामले का मुख्य आरोपी प्रहलाद दास को पुलिस ने तब एनकाउंटर में मार गिराया, जब वह 11वीं की छात्रा से बलात्कार और हत्या को अंजाम देने के बाद पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था. पुलिस ने उसे तब मार गिराया,जब वह घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट करने के दौरान पुलिस का हथियार छिनकर पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश कर रहा था. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.
ऐसा नहीं है कि बंगाल में केवल भाजपा सरकार में ही एनकाउंटर हुआ है. पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस की सरकार में भी समय-समय पर विभिन्न अपराधियों अथवा गैंगस्टर के खिलाफ छिटपुट पुलिस मुठभेड़ हुए हैं. जैसे 2025 में चोपड़ा में सज्जाक आलम का एनकाउंटर हुआ था. न्यू टाउन में पुलिस ने गैंगस्टर का एनकाउंटर किया था. पर भाजपा की चर्चा इसलिए हो रही है कि अभी इस सरकार के सत्ता में आए केवल 5 महीने ही हुए हैं और एनकाउंटर की दो-तीन घटनाएं घट चुकी है. इन घटनाओं से संकेत मिल रहा है कि बंगाल में अपराधियों के दिन लद गए हैं और अब बंगाल की पुलिस योगी मॉडल की तरह ही उनसे निबटने के लिए तैयार है!

