सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव को लेकर काफी समय से चल रही अटकलों पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विराम लगा दिया है. उन्होंने घोषणा कर दी है कि कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव के बाद फरवरी में सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव कराए जाएंगे.
अपनी सिलीगुड़ी यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री ने एक पंथ दो काज किया है. उन्होंने गणतंत्र बचाओ रैली… को सफल तो बनाया ही है, सिलीगुड़ी, समतल, Dooars और पहाड़ के लिए कई ऐसी घोषणाएं की हैं, जिनका दूरगामी असर पड़ने वाला है. राजनीतिक पंडित और विश्लेषक मानने लगे हैं कि भाजपा ने अपनी सोची समझी रणनीति के तहत सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव क्लीन स्वीप करने की बुनियाद भी डाल दी है.
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सिलीगुड़ी में नगर निगम चुनाव की पूर्व तैयारी में जुटे भाजपा कर्मियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है.
यूं तो मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी में भाजपा की गणतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ की रैली का नेतृत्व करने आए थे. परंतु इस रैली के बहाने मुख्यमंत्री ने सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव की भाजपा की पूर्व तैयारी की आहट भी पार्टी नेताओं से ली है. सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री की डॉक्टर शंकर घोष, सिलीगुड़ी संगठन जिला अध्यक्ष अरुण मंडल, राजू बिष्ट ,आदि भाजपा नेताओं से विशेष बातचीत हुई है.संगठन और जमीन पर काम कर रहे भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री को पूरा भरोसा दिया है कि नगर निगम चुनाव में भाजपा क्लीन स्वीप करेगी.
सिलीगुड़ी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब विपक्ष या तो बिखरा हुआ है या फिर भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्ष में दमदार नेता नहीं दिख रहे हैं. पूर्व मेयर गौतम देव राजनीति में अपना सम्मानजनक स्थान बनाए रखना चाहते हैं. उम्र, अनुभव और अपनी बातचीत से उन्होंने संकेत दे दिया है कि वह सक्रिय राजनीति से दूर ही रहेंगे. सीपीएम में पूर्व मेयर अशोक भट्टाचार्य अब ऐसी स्थिति में नहीं है कि वे सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में अपनी साख को भुना सके.
हालांकि सीपीएम, कांग्रेस तथा ममता टीएमसी के बीच हाल के दिनों मे एक अच्छा संबंध भी देखा गया है. पर क्या तीनों ही पार्टियां एक छत के नीचे आकर बीजेपी को तगड़ी चुनौती दे सकेंगी? कम से कम सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में वर्तमान में ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा है. हालांकि भविष्य में राजनीति में कुछ भी संभव है. पार्टी के कई नेता यह मानते हैं कि सत्ता परिवर्तन के बाद जनता का मूड भाजपा के विकास एजेंडे की तरफ बदला है.
ऐसी चर्चा है कि सिलीगुड़ी के जमीनी स्तर पर काम करने वाले भाजपा के नेताओं ने मुख्यमंत्री को विश्वास दिलाया है कि मौसम अनुकूल है. ऐसे में अगर चुनाव होता है तो भाजपा का न केवल बोर्ड गठन होगा, बल्कि सिलीगुड़ी नगर निगम और सिलीगुड़ी महकमा परिषद में भी भाजपा क्लीन स्वीप करेगी. संपूर्ण जीत के मंत्र पर काम करते हुए भाजपा नेताओं ने सिलीगुड़ी में भौतिक, सामाजिक और संरचनात्मक विकास के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल में 2000 करोड़ की विकास योजनाओं को मंजूरी दी है. सिलीगुड़ी में इंडोर स्टेडियम, कंचनजंगा स्टेडियम, खेल सुविधाओं को बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाने, आध्यात्मिक और पर्यटन ढांचे को मजबूत बनाने समेत कई ऐसी घोषणाएं की है, जिनका चुनाव में लाभ मिल सकता है.
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल समेत तमाम अस्पतालों की स्थिति में सुधार, मरम्मत और आधुनिकीकरण किया जाएगा. मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात सिलीगुड़ी को आईआईटी अथवा आईआईएम में से एक संस्थान देने की है.
इस बार भाजपा न केवल सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव क्लीन स्वीप करना चाहती है, बल्कि संपूर्ण पहाड़ पर भी अपना झंडा गाडना चाहती है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने पहाड़ के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं. जैसे 21 किलोमीटर लंबे कर्सियांग व दार्जिलिंग रोप वे परियोजना को मंजूरी देना, दार्जिलिंग के लेबोंग ग्राउंड को आधुनिक स्टेडियम के रूप में विकसित करने की घोषणा, स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं की प्रतिभा के विकास के अवसर उपलब्ध कराना, दार्जिलिंग के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, मंदिर विकास के लिए 19 करोड रुपए स्वीकृत किया जाना, पहाड़ में टूरिस्ट लॉज का नवीनीकरण और इस तरह के कई ऐसे कार्यक्रम और योजनाओं की बात कही गई है, जिसका आने वाले सिलीगुड़ी नगर निगम और नगर पालिकाओं के चुनाव में भाजपा को भारी लाभ दिला सकता है.
इन उपलब्धियों, घोषणाओं तथा गणनाओं के बल पर भाजपा नेताओं को पूर्ण भरोसा है कि भाजपा फरवरी में होने वाला सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव ही नहीं बल्कि बाद में होने वाला दार्जिलिंग नगर पालिका समेत अन्य चुनावों में भी क्लीन स्वीप करेगी.
