इस समय सिलीगुड़ी के राजनीतिक गलियारे में या तो सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव की बात हो रही है या फिर सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण को गति देने के लिए कार्यक्रम और योजनाओं की बात हो रही है. राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद SJDA एक तरह से निष्क्रिय हो चुका है. जानकार मानते हैं कि सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक, राजनैतिक और सामाजिक समीकरण को गति देने के लिए SJDA का चेयरमैन चुना जाना आवश्यक है.
सूत्र बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव से पहले ही सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण को नई गति देना चाहते हैं. इस समय यह संस्था केवल नाम मात्र है. मुख्यमंत्री की कोशिश है कि जल्द से जल्द सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण को पंख लगे, ताकि सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी के विभिन्न इलाकों में चल रही विकास गतिविधियों को सुनियोजित ढंग से परवान चढाया जा सके और इसका लाभ सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में पार्टी को मिल सके.
मुख्यमंत्री की इच्छा और सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी क्षेत्र में विकास को अमली जामा पहनाने के लिए सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है. कई नाम चर्चा में है. इन कुछ प्रमुख नामो में प्रवीण अग्रवाल, मानिक अरोड़ा, हेमंत गौतम, सविता अग्रवाल, राजू साहा, पीयूष अग्रवाल आदि शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि ये सभी नाम एसजेडीए चेयरमैन के संभावित चेहरे के रूप में अपनी-अपनी पहचान व क्षमता रखते हैं.
प्रवीण अग्रवाल भाजपा संगठन से जुड़े एक अनुभवी व्यक्ति हैं. वे 2020 में भाजपा संगठनात्मक जिला प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.इसके अलावा भाजपा संगठन तथा विकास की राजनीति में उनकी अग्रणी भूमिका सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर चलाई गए हस्ताक्षर अभियान में रही है. वर्तमान में वह भाजपा के प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में संगठन से जुड़े होने और उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए भाजपा इस नाम पर विचार कर सकती है.
हेमंत गौतम गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से जुड़े हैं. वह सिलीगुड़ी महकमा परिषद चुनाव में माटीगाड़ा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं. उन्हें क्षेत्रीय राजनीति का अनुभव भी है. पहाड़ और समतल की राजनीति, ग्रामीण इलाकों में विकास तथा उनकी रणनीति सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के व्यापक कार्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो सकती है. SJDA चेयरमैन के संभावित चेहरों में एक नाम पीयूष अग्रवाल का भी है.
पीयूष अग्रवाल RSS से जुड़े हुए हैं. वे 2016 में बीजेपी में आए. पीयूष अग्रवाल के बारे में कहा जाता है कि वह जिला कार्यालय सचिव से लेकर जिला सचिव, उपाध्यक्ष और लोकसभा संयोजक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. इस तरह से उन्हें संगठन चलाने का पूरा अनुभव प्राप्त है. पीयूष अग्रवाल भाजपा की पसंद हो सकते हैं.
सिलीगुड़ी भाजपा में विभागीय संयोजक के रूप में काम करने वाले राजू साहा उर्फ हैंडी सिलीगुड़ी भाजपा के तेज तर्रार चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने अपनी राजनीति बूथ स्तर से शुरू की. उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली है. सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में बूथ प्रबंधन और संगठन के रूप में उनकी क्षमता से पार्टी इनकार नहीं कर सकती है. वह SJDA के चेयरमैन के रूप में संभावित चेहरों में से एक हैं.
एसजेडीए के संभावित चेयरमैन के रूप में एक और नाम की चर्चा शुरू हो गई है. यह नाम है डॉक्टर सचिन प्रसाद. वह भाजपा के टिकट पर 2022 में सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव लड़ चुके हैं. उन्हें भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, दार्जिलिंग-जलपाईगुड़ी जिला प्रभारी और सिलीगुड़ी संगठनात्मक जिला प्रवक्ता के रूप में देखा जा चुका है. महिला चेहरे के रूप में सविता अग्रवाल की भी चर्चा शुरू हो गई है.
सविता अग्रवाल सिलीगुड़ी नगर निगम में चेयरमैन तथा डिप्टी मेयर जैसे पद संभाल चुकी हैं. हालांकि पहले वह कांग्रेस में थी. लेकिन 2014 में उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा और बीजेपी का दामन थामा. सिलीगुड़ी नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज का उन्हें गहरा अनुभव है. इसलिए पार्टी इस नाम पर भी विचार कर सकती है. उपरोक्त सभी संभावित चेहरों में एक चेहरा मानिक अरोड़ा का है, जिनकी सबसे अधिक चर्चा हो रही है. क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का करीबी माना जाता है.
मानिक अरोड़ा राजनीति में संगठन से लेकर चुनाव लड़ने और अन्य सामाजिक भूमिकाओं में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. 2015 में उन्होंने वार्ड नंबर 13 से सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव लड़ा था. हालांकि वे चुनाव हार गए. इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने डाबग्राम फुलबारी चुनाव क्षेत्र से एक चुनाव संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनकी मेहनत और रणनीति की बदौलत इस विधानसभा क्षेत्र में शिखा चटर्जी प्रचंड बहुमत से चुनाव जीती थी.
सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी संगठन से लेकर चुनाव प्रबंधन स्तर पर अपनी स्थिति दमदार बना लेना चाहती है. अगर उम्मीदवार चयन को लेकर भाजपा की कसौटी यह होती है तो उपरोक्त चेहरों में से सबसे ज्यादा सक्षम चेहरा कौन होगा, यह देखना होगा. क्योंकि उपरोक्त सभी चेहरे अपने राजनीतिक संगठन,पहचान और चुनाव रणनीति के लिए जाने जाते हैं. उनमें से कोई भी चेहरा किसी से कम नहीं है. अब देखना होगा कि प्रदेश भाजपा अथवा मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी इन चेहरों में से किस चेहरे पर अपनी मुहर लगाते हैं.
