‘ अर्जुन सिंह, जब मैंने आपसे पूछा था कि उत्तर बंगाल में चाय बागान का क्या हाल है? तब आपने जवाब दिया था कि सब कुछ ठीक है… बागान में काम करने वाले श्रमिक मजे में हैं . धीरे-धीरे सभी चाय बागान खुल जाएंगे… तब मुझे काफी खुशी हुई थी. लेकिन आज यह सुनकर झटका लगा है कि दो दिनों में ही एक चाय बागान बंद हो गया.अब बागान श्रमिक सवाल तलब कर रहे हैं. मैं उन्हें क्या जवाब दूं ‘
सिलीगुड़ी, उत्तर बंगाल से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने राहत की सांस ली ही थी कि अचानक एक मनहूस खबर से उन्हें दो-चार होना पड़ा. अमरपुर चाय बागान में तालाबंदी हो गई थी. सैकड़ो श्रमिक रास्ते पर आ चुके थे. मुख्यमंत्री को चिंता होने लगी. विपक्षी तो खाल खींच लेंगे. फिर उन्हें इसी महीने बिरसा मुंडा और रास मेला कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तर बंगाल जाना भी है. वहां वे श्रमिकों को क्या जवाब देंगे! जब उन्हें कुछ और उपाय नजर नहीं आया तो तुरंत अर्जुन सिंह को तलब किया.
अर्जुन सिंह ने कहा, खबर तो मेरे पास भी आई है दादा… लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है. मैंने विशाल लामा को समझा दिया है. सब कुछ ठीक हो जाएगा. वास्तव में मुझे श्रमिकों का ही दोष नजर आता है. उन्हें आंदोलन करने की क्या जरूरत थी. थोड़ा सब्र कर लेते तो क्या जाता! मैं जल्द ही इस स्थिति को संभाल लूंगा. आप निश्चिंत रहें. सब ठीक हो जाएगा.
अर्जुन सिंह ने विशाल लामा से फोन पर बात की. विशाल लामा ने भी वही राजनीतिक आश्वासन दिया. सब ठीक हो जाएगा. लेकिन कब तक? एक मंजे हुए राजनेता इसका सीधा जवाब नहीं देते. विशाल लामा तालाबंदी के मामले को देख रहे हैं. अर्जुन सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया. मुख्यमंत्री ने कहा आप लोग जल्द से जल्द समस्या का समाधान करिए…
दुर्गा पूजा के बकाया बोनस की मांग को लेकर चाय बागान श्रमिकों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के बीच जलपाईगुड़ी स्थित अमरपुर चाय बागान बंद हो गया था. कहां तो चाय बागान प्रबंधन द्वारा श्रमिकों को बकाया बोनस का भुगतान करने की बात थी. लेकिन बोनस भुगतान तो दूर की रही, ऐन दीपावली से पहले ही चाय बागान में ताला लग गया.
जब उस दिन सुबह सवेरे श्रमिक काम पर पहुंचे तब उन्होंने बागान के मुख्य द्वार पर ताला लटका देखा. इसके साथ ही गेट पर कंपनी का नोटिस भी चिपका दिया गया था. इस बागान में कम से कम 300 श्रमिक काम करते थे. अब इन श्रमिक परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
श्रम विभाग के साथ पूर्व में हुई बैठक में दुर्गा पूजा बोनस को लेकर 20% पर सहमति बनी थी. उसमें पूजा से पहले लगभग 14 प्रतिशत की दर से बोनस का भुगतान किया गया था. बाकी पैसे दीपावली से पहले देने की बात थी. त्यौहारों के मौसम में बोनस की बकाया राशि न मिलने तथा अचानक बागान बंद होने से श्रमिक बेरोजगार हो गए. श्रमिक और श्रमिकों का परिवार भागा भागा श्रम विभाग के दफ्तर पहुंचा.
दफ्तर के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को फोन मिलाया. तब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को जानकारी हुई कि उत्तर बंगाल के चाय बागानों की स्थिति क्या है. अमरपुर चाय बागान दिवाली से पहले ही बंद हो गया. वस्तु स्थिति यह है कि अन्य बागानों पर भी संकट बढ़ा है. मुख्यमंत्री हुए परेशान और चिंतित भी. उन्होंने तुरंत मंत्री अर्जुन सिंह को तलब किया. अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे. मुख्यमंत्री से बातचीत हुई. एक सधे हुए राजनेता की तरह अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री को आश्वस्त कर लौट गए…
रास्ते में अर्जुन सिंह ने विशाल लामा से फोन पर बात की. उन्हें कुछ समझाया. विशाल लामा धीरे-धीरे सिर हिलाने लगे, जैसे उनकी समझ में कोई बात आ रही थी. अचानक ही उनके चेहरे पर मन भर की मुस्कान फैल गई. अर्जुन सिंह ने पूछा, सब समझ गए क्या? विशाल लामा ने जवाब दिया- चाय श्रमिकों के जखमों पर मरहम लगाने के लिए हमारे पास पहले से ही एजेंडा सेट है. चाय श्रमिकों को 50 किलो चावल और एक मुश्त 5000 रू किस दिन काम आएंगे… सुनकर अर्जुन सिंह मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे… हो गया इंतजाम!
note: यह एक राजनीतिक व्यंग्य है. लेखक का मकसद किसी राजनेता अथवा मंत्री का अपमान या मजाक उड़ाना नहीं है. यह व्यंग्य एक छोटी सी राजनीतिक घटना की ‘फुलझडियों’ पर आधारित है, ताकि दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन हो सके!
