गंगारामपुर का काली मंदिर! उस समय मंदिर में पूजा पाठ चल रहा था. मंदिर का पुजारी व कुछ भक्त भी आसपास में जमा थे. तभी वहां एक व्यक्ति हाथ में कटा हुआ सर लेकर पहुंचा और मंदिर के सामने बैठ गया. कटे हुए मुंड से अभी भी लहू बह रहा था. जिन लोगों ने यह मंजर देखा, उनके होश उड़ गए. उनकी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे ही टंगी रह गई. क्योंकि ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था.
जल्द ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई. उन्होंने इस खौफनाक दृश्य को देखकर पुलिस को सूचना दी. इसके साथ ही किसी महिला का कटा हुआ सर लेकर मंदिर परिसर में बैठे व्यक्ति के गिर्द लोगों की भीड़ जमा होने लगी. उसके हाथ में खून से सना चाकू था जबकि उसकी गोद में एक कटा हुआ सर रखा था. पास में ही उसके दो मासूम बच्चे चुपचाप बैठे हुए थे.
व्यक्ति लोगों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे रहा था. हालांकि वह कभी-कभी खुद को तांत्रिक के रूप में पेश कर रहा था. यह घटना दक्षिण दिनाजपुर जिले की है. पुलिस ने जब इस व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, तब उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली थी. लेकिन अब इस घटना की परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही है. चलिए इस घटना की पृष्ठभूमि में चलते हैं. आखिर यह व्यक्ति कौन था तथा उसकी गोद में किसका कटा हुआ सर रखा था?
दक्षिण दिनाजपुर में गंगा रामपुर आता है. यहां नारायणपुर क्षेत्र में रिंटू घोष का परिवार रहता था. रिंटू घोष उत्तर बंगाल परिवहन निगम में बस कंडक्टर था. रिंटू के परिवार में उसकी पत्नी सीमा सरकार और दो बच्चे थे. पूरा परिवार खुशहाल था. लेकिन कहते हैं कि सब समय एक सा नहीं रहता. जीवन में उतार-चढ़ाव, दिन-रात का सिलसिला चलता रहता है.
रिंटू घोष तथा उसके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ तब टूट पड़ा जब उसे बस कंडक्टर की नौकरी से निकाल दिया गया. उत्तर बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की नौकरी से निकाले जाने के बाद रिंटू घोष ने थानों से लेकर कोर्ट कचहरी तक सरकार को चुनौती दी. लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. लगातार भाग दौड़ और आर्थिक तंगी ने रिंटू घोष को दिमागी और शारीरिक रूप से अस्वस्थ कर दिया.
रिंटू घोष ने आरंभ में नौकरी छूटने के बाद छोटे-मोटे व्यवसाय करने की कोशिश की. क्योंकि परिवार में कमाने वाला वह अकेला था. जबकि बीवी बच्चों की परवरिश भी उसने ही करनी थी. कहते हैं कि व्यापार में हाथ डाला तो भारी घाटे का सामना करना पड़ा. इससे उसकी बची खुची पूंजी भी स्वाहा हो गई. भीषण आर्थिक संकट में घिरकर रिंटू घोष साइको बन गया. उसके व्यवहार में भारी बदलाव देखा गया.
बताया जाता है कि रिंटू घोष ने अचानक ही मांसाहारी भोजन का परित्याग कर दिया और वह मांसाहार से निरामिष बन गया. इसी दौरान उसका झुकाव तंत्र मंत्र विद्या की ओर होने लगा. कहा जाता है कि वह घर में भी हमेशा कुछ ना कुछ अजीबोगरीब हरकतें करता रहता था. हालांकि अभी यह पता नहीं चल सका है कि उसने अपनी पत्नी सीमा सरकार का खून क्यों किया था?
लेकिन उसकी अजीबोगरीब हरकतों से लगता है कि रिंटू घोष ने तांत्रिक क्रियाएं करने के लिए ही अपनी पत्नी का सर काटा था. क्योंकि जिस तरह से उसने पत्नी का सर काट कर सीधे काली मंदिर में ले जाकर रखा, उससे यह कयास लगाया जाता है कि उसने तांत्रिक अनुष्ठान या बलि देने के लिए ऐसा किया था.
गंगारामपुर के थाना प्रभारी पूर्णेन्दु कुंड हालांकि आरोपी के बारे में विशेष जानकारी देने की स्थिति में नहीं है. पुलिस ने कहा है कि जब तक इस मामले में कोई बड़ी जानकारी या सुराग नहीं मिल जाता है तब तक यह बताना मुश्किल होगा. हालांकि पुलिस ने सर को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी से उसका चाकू भी अपने कब्जे में ले लिया है. फिलहाल आरोपी रिंटू घोष पुलिस रिमांड में है.पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.
थाना प्रभारी पूर्णेन्दु कुंडू ने बताया है कि पुलिस की जांच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर चल रही है. क्या यह पारिवारिक कलह का मामला था अथवा बेरोजगारी के कारण व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार था या फिर इसके पीछे कोई गहरी तांत्रिक साजिश या अंधविश्वास के खेल के तहत यह घटना घटी है? इन सभी बिंदुओं पर पुलिस तफ्तीश में जुटी हुई है.
