केंद्र सरकार के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी की गई नई अधिसूचना ने सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के लोगों की चिंता और परेशानी बढ़ा दी है.आखिर इन क्षेत्रों के लोग दहशत और चिंता में क्यों हैं? क्यों इन क्षेत्रों के व्यवसायी, बिल्डर्स, उद्यमी, पर्यटन कारोबारी और विभिन्न छोटे बड़े पेशे से जुड़े लोग चिंतित व परेशान हैं? आइए पूरा मामला जानते हैं.
दरअसल केंद्र सरकार महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य के इको सेंसिटिव जोन का दायरा बढ़ाने जा रही है. महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य के इको सेंसेटिव जोन का दायरा बढ़ाने की तैयारी की खबरों के बीच सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के विभिन्न कारोबारी संगठनों से लेकर पर्यटन व्यवसाय, आवासीय परियोजना और उद्यमियों के बीच दहशत और चिंता का बढ़ना लाजिमी है.
केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य को लेकर एक संशोधित मसौदा अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद ही सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के लोगों के बीच हलचल बढ़ गई है. दरअसल संशोधित प्रस्ताव में महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य के आसपास लगभग 539.86 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन के दायरे में लाया गया है.
इसके अंतर्गत सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के चाय बागान, वन बस्ती, नदी घाटी के अलावा आवासीय मकान, कारोबार आदि इलाके आ सकते हैं. ऐसे में अगर संशोधित प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो इन लोगों का क्या होगा, जो इन क्षेत्रों में निवास करते हैं और विभिन्न कारोबार से आय प्राप्त करते हैं. सबसे ज्यादा नुकसान पर्यटन कारोबार का होगा. व्यापार का नुकसान होने से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.
उन बिल्डरों का क्या होगा, जो मौजूदा नियमों के अनुसार इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों में संलग्न हैं. उन कारोबारियों का क्या होगा जो छोटे बड़े व्यवसाय करके अपना परिवार चला रहे हैं. जो लोग इन क्षेत्रों में निवास करते हैं, उनका क्या होगा? यह सभी चिंताएं लोगों को खा रही है. वर्तमान में जो नियम है, उसके अनुसार इको सेंसेटिव जोन के एक किलोमीटर के दायरे में नए व्यावसायिक होटल, रिसोर्ट, निर्माण गतिविधियों आदि पर प्रतिबंध है.
उपरोक्त के अलावा इस दायरे में प्रदूषण फैलाने वाले लघु उद्योग, ठोस कचरा प्रबंधन ,व्यावसायिक निर्माण गतिविधि आदि भी नहीं की जा सकती है. इन पर सख्त पाबंदी लगाई गई है. इससे पूर्व सितंबर 2024 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया था, जिसके अनुसार अभयारण्य की सीमा से इको सेंसेटिव जोन का विस्तार 1 किलोमीटर से बढ़ाकर 18.26 किलोमीटर किया गया था. हालांकि नए मसौदे में भी यही भौगोलिक प्रस्ताव है.
अगर अंतिम मसौदे को सरकार लागू करती है तो इसका गंभीर असर पड़ सकता है. इसका सीधा अर्थ होगा कि सिलीगुड़ी के आसपास होने वाले निर्माण कार्य, उद्योग धंधे, इंडस्ट्री, फैक्ट्री और पर्यटन से जुड़े विभिन्न कार्यों को बंद करना होगा. अथवा उनका विस्तार रोकना होगा. वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में कई व्यावसायिक होटल, रिसोर्ट आदि के निर्माण को हरी झंडी दी है. अगर मसौदा अधिसूचना लागू होता है,तो ऐसे में व्यवसाय विस्तार की गतिविधियों को झटका लग सकता है!
