November 7, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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टोटो का किराया बचाकर शुरू किया बिजनेस, 50-60 रुपये की पूंजी से आज हजारों का कारोबार; सिलीगुड़ी की छात्रा सायंतिका बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल !

सिलीगुड़ी: सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, इस सोच को गलत साबित कर रही हैं सिलीगुड़ी की कॉलेज छात्रा सायंतिका मालाकार। पिता से मिलने वाले टोटो किराये के पैसों में से रोजाना थोड़ी-थोड़ी बचत कर उन्होंने महज 50-60 रुपये की शुरुआती पूंजी से अपने व्यवसाय की नींव रखी थी। आज उनका छोटा-सा प्रयास हजारों रुपये के कारोबार में बदल चुका है। हाथों से खूबसूरत ईयररिंग्स, चूड़ियां, नेकलेस और अन्य आकर्षक आभूषण तैयार कर सायंतिका अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

सिलीगुड़ी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग की तृतीय वर्ष की छात्रा सायंतिका ने पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर बनने की इच्छा से इस कारोबार की शुरुआत की। उनके व्यवसाय का पहला अनुभव कॉलेज के फूड फेस्टिवल में मिला, जहां उन्होंने अपने हाथों से बनाए गहनों का एक छोटा-सा स्टॉल लगाया था। वहां ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने इसे नियमित व्यवसाय बनाने का फैसला किया।

आज सायंतिका ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने उत्पाद बेच रही हैं। हर दिन शाम को वह बाघा जतिन पार्क में अपनी छोटी-सी दुकान लगाती हैं। पढ़ाई के बीच समय निकालकर गहने तैयार करना, ग्राहकों के ऑर्डर लेना और दुकान संभालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर उनके बनाए गहनों की तस्वीरें और वीडियो देखकर भी ग्राहक ऑर्डर दे रहे हैं।

सायंतिका के कारोबार की सबसे बड़ी खासियत उनके गहनों के अनोखे डिजाइन हैं। शुरुआत में उन्होंने यूट्यूब और फेसबुक के वीडियो देखकर आभूषण बनाने की तकनीक सीखी। इसके बाद अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता के जरिए नए-नए डिजाइन तैयार करने लगीं। बचपन से चित्रकारी में रुचि होने के कारण उनकी कलात्मक प्रतिभा गहनों के डिजाइन में भी नजर आती है। रंगों का खूबसूरत संयोजन और आकर्षक डिजाइन उनके उत्पादों को खास बनाते हैं।

इस सफर में उनके माता-पिता का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। काम का दबाव बढ़ने पर परिवार के सदस्य उनकी मदद करते हैं। व्यवसाय से होने वाली कमाई का एक हिस्सा वह अपनी जरूरतों और पढ़ाई पर खर्च करती हैं, जबकि बाकी रकम नए सामान खरीदने और कारोबार को आगे बढ़ाने में लगाती हैं।

सायंतिका के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और मां गृहिणी हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सायंतिका का सपना भविष्य में बाघा जतिन पार्क की अपनी छोटी दुकान को एक बड़े आउटलेट में बदलने और अपने ब्रांड को अधिक लोगों तक पहुंचाने का है।

महज 50-60 रुपये से शुरू हुआ उनका यह सफर आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। सायंतिका की कहानी बताती है कि सफलता के लिए हमेशा बड़ी पूंजी जरूरी नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो छोटी-सी बचत से भी बड़े सपनों की शुरुआत की जा सकती है।

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