दार्जिलिंग का धरतीपुत्र, गोरखाओं का गौरव, बंगाल का अभिमान और पूरे देश की शान प्रशांत तमांग अब इस दुनिया में नहीं रहे. जब उनका पार्थिव शरीर बागडोगरा एयरपोर्ट पर लाया गया, तब वहां उनके प्रशंसकों, परिजनों, दार्जिलिंग पहाड़ के क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था. सबकी आंखें नम थीं और वातावरण बोझिल था. सभी ने अश्रुपूरित नेत्रों से उनकी अंतिम विदाई दी तथा उनके शव पर पुष्पांजलि अर्पित की. इस खास मौके के गवाह बने दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट, जिन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि प्रशांत तामांग अब इस दुनिया में नहीं रहे.उन्होंने प्रशांत तमांग के अचानक देहावसान को गोरखाओं की भारी क्षति बताया है.
. मिली जानकारी के अनुसार गायक एवं अभिनेता प्रशांत तमांग की मृत्यु हृदय गति रुक जाने से हुई. रविवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर सुबह 9:00 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा. उनकी पत्नी उन्हें माता चानन देवी अस्पताल ले गई, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. वे 43 वर्ष के थे. उनकी मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. X पर एक पोस्ट जारी करते हुए उन्होंने लिखा है कि इंडियन आइडल फेम और मशहूर सिंगर प्रशांत तामांग के अचानक निधन से बहुत दुख हुआ. मैं उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं.
राजू बिष्ट ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि इंडियन आईडल 2007 जीतकर प्रशांत तमांग ने न केवल भारत के गोरखाओं को व्यापक पहचान दिलाई, बल्कि संपूर्ण नेपाली संगीत और गीतों को भी विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई. उन्होंने गोरखाओं के संगीत और गायन क्षेत्र में प्रतिभा को विश्व के सामने प्रस्तुत करने वाले महान व्यक्तियों में अपना नाम अंकित किया है. जीटीए के प्रमुख अनित थापा ने भी प्रशांत तमांग को अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए शोक व्यक्त किया है और कहा है कि गोरखा समाज और कला जगत के लिए यह अपूरणीय क्षति है.
4 जनवरी 1983 को दार्जिलिंग के तुंगसुंग में जन्मे प्रशांत तमांग ने संगीत में औपचारिक शिक्षा न लेने के बावजूद बंगाल पुलिस आर्केस्ट्रा में सेवा करते हुए संगीत और गायन में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की. एक दुर्घटना में पिता के नहीं रहने के बाद उन्हें बंगाल पुलिस में नौकरी मिली. वे कोलकाता पुलिस बैंड के लिए गाना गाते थे. यहीं से उन्होंने इंडियन आइडल का सफर शुरू किया था. वे वर्ष 2007 में इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता बने. बताया जाता है कि दार्जिलिंग और पूरे बंगाल और देश भर के गोरखाओं से उन्हें वोट दिलाने के लिए गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा ने उनके समर्थन में जगह-जगह रैलियां की, चंदा एकत्र किया और स्थानीय लोगों से भारी मतदान करने का आग्रह भी किया. उन्हें पुरस्कार स्वरूप एक करोड रुपए मिले थे.
प्रशांत तामांग सरल और मधुरभाषी थे. उन्होंने अपनी आलोचनाओं को कभी दिल पर नहीं लिया और सबका धन्यवाद कहा. चाहे वह जावेद अख्तर हो, अनु मलिक, उदित नारायण या कोई भी जज हो, उनकी आलोचनाओं से कभी नहीं घबराए. उन्होंने सभी को धन्यवाद कहा और इंडियन आइडल सीजन 3 जीतने के बाद धन्यवाद 2007 एल्बम भी निकाला. इंडियन आइडल 3 जीतने के बाद प्रशांत तामांग के कदम निरंतर आगे बढ़ते रहे. उन्होंने म्यूजिक की दुनिया के अलावा अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी खास पहचान बनाई.
उन्होंने नेपाली फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें गोरखा पलटन 2010, निशानी 2014 आदि शामिल है. निशानी 2014 कारगिल युद्ध में गोरखाओं की वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण भावना पर आधारित फिल्म थी. इस फिल्म ने उन्हें अभिनय जगत में प्रसिद्धि दिलाई. प्रशांत तामांग का पाताल लोक सीजन 2 खासा चर्चा में रहा. इंडियन आइडल जीतने के बाद प्रशांत ने सोनी बीएच के साथ अपना पहला एल्बम निकाला, जिसमें हिंदी और नेपाली गाने थे. उनके अकस्मात निधन से दार्जिलिंग पहाड़ भी शून्य सा हो गया है.

