April 16, 2024
Sevoke Road, Siliguri
उत्तर बंगाल लाइफस्टाइल सिलीगुड़ी

‘अकबर’ के साथ ‘सीता’ नाम को लेकर सिलीगुड़ी में प्रदर्शन!

बंगाल सफारी में त्रिपुरा से आए शेर और शेरनी के नाम पर आपत्ति जताते हुए आज सिलीगुड़ी के हिंदू संगठनों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया और इसे सनातनी समाज का अपमान बताया. वे नारे लगा रहे थे,माता सीता का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान! देवी देवताओं का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान… और जय श्री राम! हिंदू संगठनों के तेवर बहुत गर्म थे. उन्होंने बंगाल सफारी पार्क के प्रबंधन को शेरनी का नाम सीता बदलने के लिए 24 घंटे का समय दिया है.

दरअसल यह सारा माजरा त्रिपुरा से बंगाल सफारी में लाए गए शेर शेरनी के जोड़ों के नाम को लेकर हो रहा है. इसमें शेर का नाम अकबर रखा गया है जबकि शेरनी का नाम सीता. नाम अटपटा है. खबर समय ने एक दिन पहले के पोस्ट में भी शेर और शेरनी के नाम को लेकर आशंका व्यक्त की थी. इसका समाज पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ना है. और ऐसा ही हुआ. सिलीगुड़ी के विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है.

हिंदू संगठनों की आपत्ति स्वाभाविक भी है. क्योंकि कहीं से भी अकबर के साथ सीता नाम जोड़ना स्वाभाविक नहीं लगता है. सनातन धर्म में सीता के साथ श्री राम का नाम जुड़ा है. सनातन धर्म में सीता को माता कहा गया है. सीता को जगत पुत्री कहा गया है. श्री रामचरितमानस में सीता नाम किसी देवी के लिए ही है. लोग माता सीता और श्री राम की पूजा आराधना करते हैं. ऐसे में जानवरों के नाम कम से कम देवी देवताओं के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए.

हिंदू संगठनों की ओर से आदित्य प्रसाद सोनी का तर्क भी कुछ ऐसा ही था.कुछ इसी तरह की बात महिला हिंदू संगठनों की ओर से प्रतिमा जोशी ने भी कही थी. हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बंगाल सफारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर किसी साजिश के तहत हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया जा रहा है. हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि बंगाल सफारी पार्क में शेर के जोड़ों को ले जाने से पहले ही उनका नामकरण हो चुका था. सूत्रों ने कहा कि शेर का नाम अकबर और शेरनी का नाम सीता रखा जा चुका था. परंतु हिंदू संगठनों का कहना है कि बंगाल सफारी के प्रबंधन पक्ष ने ही शेर शेरनी के नाम अकबर और सीता रखे हैं.

हालांकि बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन पक्ष की ओर से अभी कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. यह नाम बंगाल सफारी प्रबंधन पक्ष ने दिया है या फिर शेर शेरनी के नाम पहले से ही हैं. इस बारे में उनका पक्ष आना बाकी है. लेकिन यह मुद्दा काफी गरमाता जा रहा है. हिंदू संगठनों की ओर से आदित्य प्रसाद सोनी और महिला हिंदू संगठनों की ओर से प्रतिमा जोशी ने मीडिया से कहा कि हमने बंगाल सफारी पार्क प्रबंधन और प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया है. अगर उन्होंने शेरनी का सीता नाम नहीं बदला तो हिंदू संगठन के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और जोरदार आंदोलन करेंगे.

आदित्य प्रसाद सोनी ने कहा कि हमने प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखकर उनका ध्यान आकृष्ट किया है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म पर आघात को हम नहीं सहेंगे. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हम न केवल इस मसले को लेकर अदालत में जाएंगे. बल्कि सिलीगुड़ी की सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन भी करेंगे. लेकिन बेहतर होता कि पहले इसकी जांच कर ली जानी चाहिए कि क्या सचमुच शेर और शेरनी के नाम अकबर और सीता हैं? क्योंकियह भी कहा जा रहा है कुछ लोग यह भी बता रहे हैं कि शेर और शेरनी के ऐसे नाम ही नहीं है और केवल यह अफवाह उड़ा कर एक धार्मिक संगठन की भावनाओं को भड़काया जा रहा है.

बहरहाल सच्चाई का पता लगाए बगैर इस मुद्दे को तूल देना अच्छा नहीं है. हो सकता है कि यह नाम ही नहीं हो. यह भी हो सकता है कि अगर ऐसे नाम है तो बंगाल सफारी का इसमें कोई दखल नहीं हो. और यह जोड़ा त्रिपुरा से आया है तो वहां इसका नामकरण किया गया हो. नामकरण किसने किया, इत्यादि विभिन्न पहलुओं की छानबीन और सच्चाई का पता करके ही इस पर किसी भी संगठन को अपनी प्रतिक्रिया प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए. खबर समय अपने सभी दर्शकों को सचेत करना चाहता है कि सच्चाई को जाने समझे बगैर वह किसी भी अफवाह पर भरोसा ना करें.

(अस्वीकरण : सभी फ़ोटो सिर्फ खबर में दिए जा रहे तथ्यों को सांकेतिक रूप से दर्शाने के लिए दिए गए है । इन फोटोज का इस खबर से कोई संबंध नहीं है। सभी फोटोज इंटरनेट से लिये गए है।)

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