DOOARS अपने घने जंगल, पेड़ और पर्यटन के लिए मशहूर है. अब Dooars एक और चीज के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध होगा. वह है नई रेल लाइन को लेकर, जो चालसा से खूनिया मोड, शिवचू होकर जल ढाका, कुमानी होते हुए नक्साल,बिंदु,झाल॔ग, गंगटोक और डोकलाम तक बिछाई जाएगी. पूरे प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में 20 किलोमीटर का काम होगा. रेलवे मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए हरी झंडी दे दी है.
यह काम पहले चरण में होगा. जबकि दूसरे चरण में बिंदु, झालंग, तोदे तांगता होते हुए गंगटोक से डोकलाम तक रेल लाइन बिछाई जाएगी. पहले चरण में सरकार 292 करोड़ खर्च कर रही है. पी आर ओ कपिंजल किशोर शर्मा के अनुसार रेलवे की यह परियोजना अत्यंत महत्वाकांक्षी है. हालांकि इस परियोजना पर विस्तृत जानकारी रेलवे के द्वारा जारी नहीं की गई है. शायद सामरिक और खुफिया सुरक्षा महत्व को लेकर, ताकि दुश्मन देश को भारत की परियोजना के बारे में पता ना चले.
यह नई रेल लाइन सामरिक महत्व के दृष्टिकोण से कितना महत्वपूर्ण और संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब सेवक से रंगपो तक एक रेल लाइन का निर्माण कार्य पहले से ही चल रहा है, ऐसे में चालसा से नकसाल,झाल॔ग, बिंदु, गंगटोक से डोकलाम तक रेल लाइन परियोजना को क्यों मंजूरी दी गयी? इसके पीछे कारण एक ही है कि सिक्किम, भूटान और चीन सीमा के डोकलाम तक भारत की सुरक्षा बलों की आसान आवाजाही को सुनिश्चित किया जा सके. सड़क मार्ग के साथ-साथ रेल मार्ग को भी तैयार रखा जाना भारत के लिए जरूरी हो गया है.
वर्ष 2017 में डोकलाम में ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. वर्तमान में चीन वहां सड़क निर्माण कर रहा है. ऐसे में भारत के लिए भी संपर्क मार्ग और रेल यातायात आवश्यक समझा जा रहा था. ताकि कम समय में दुश्मन का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके. मजे की बात यह है कि केंद्र सरकार के द्वारा पहले ही खुनिया मोड़ से सिक्किम तक सड़क निर्माण का काम शुरू किया जा चुका है. आपको याद होगा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खूनिया मोड़ से इसी रूट पर नए हाईवे के काम का उद्घाटन किया था.
इस सड़क का खास महत्व है. यह सड़क सामरिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है.सिक्किम जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 के विकल्प के रूप में ही नहीं बल्कि भारत चीन के बीच समय-समय पर बढ़ाने वाले तनाव के कारण यह वैकल्पिक सड़क सेना के आवागमन के लिए भी सहायक सिद्ध होगा. सड़क का काम शुरू हो चुका है. अब इस रूट पर नयी रेल लाइन बिछाए जाने की योजना को हरी झंडी दी जा चुकी है.
जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार बिछाई जाने वाली नई रेल लाइन काफी रोमांचक यात्रा का अनुभव दे सकती है. दावा किया जा रहा है कि सेवक से रंगपो तक रेल रूट की तुलना में नई रेल रूट से यात्रा अधिक रोमांचक होने वाली है. उत्तर पूर्व सीमा रेलवे के जोनल रेलवे यूजर्स कंसलटेटिव कमिटी के सदस्य पार्थ राय के अनुसार नयी रेल लाइन भारत के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यवसाय को और ऊंचाइयों पर ले जाएगी. क्योंकि इस मार्ग पर सड़क भी है इसलिए पर्यटकों के लिए यह एक आकर्षण का केंद्र होगा. इसके साथ ही देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत रहने वाली है.
