March 5, 2026
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वाराणसी से दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी हाईस्पीड ट्रेन !

High-speed train will run between Varanasi, Delhi and Siliguri at a speed of 150 kmph.

केंद्र सरकार के बजट में पूर्वोत्तर रेलवे को हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली है। दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से इन मार्गों पर ट्रेनें 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से दौड़ेंगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा अधिकतम 15 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि वर्तमान में इस सफर में करीब 24 घंटे का समय लगता है।

इन हाईस्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में तेज रेल कनेक्टिविटी का विस्तार होगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। दिल्ली, वाराणसी और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख शहर आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे, जिससे यात्रियों को समय की बचत के साथ अधिक सुविधाजनक सफर मिलेगा।

गोरखपुर से वाराणसी तक सड़क कनेक्टिविटी पहले से ही बेहतर हो चुकी है। फोरलेन सड़क बनने के बाद यह दूरी लगभग तीन घंटे में तय की जा सकती है। ऐसे में वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाईस्पीड ट्रेन सेवा शुरू होने पर गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी इस रेल कॉरिडोर का बड़ा फायदा मिलेगा। यात्री पहले सड़क मार्ग से वाराणसी पहुंचकर वहां से तेज रफ्तार ट्रेन द्वारा सिलीगुड़ी और आगे पूर्वोत्तर राज्यों की ओर यात्रा कर सकेंगे।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी काफी लाभकारी साबित होगा। पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व मुख्य परिचालन एवं वाणिज्य प्रबंधक राकेश त्रिपाठी के अनुसार, बड़ी संख्या में व्यापारी दिल्ली से सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग व्यापार के सिलसिले में आते-जाते हैं। हाईस्पीड ट्रेन उपलब्ध होने से उन्हें यात्रा में कम समय लगेगा और व्यवसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

सिलीगुड़ी को उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है, जबकि वाराणसी देश का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है। इन दोनों शहरों को हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक पर्यटन के लिए वाराणसी आने वाले श्रद्धालु अब कम समय में सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच सकेंगे। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटक भी दिल्ली और वाराणसी तक तेज और सुविधाजनक यात्रा कर सकेंगे।

रेल मंत्रालय का मानना है कि यह हाईस्पीड कॉरिडोर पूर्वी भारत को देश के हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इससे लंबी दूरी की यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक कुशल बनेगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को भी नई ऊंचाई देगा।

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