April 1, 2026
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गुरुंगबस्ती कांड की चार्ज शीट की तैयारी! मोहम्मद अब्बास और आमिर अली के केस में कितनी समानता है?

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आज सिलीगुड़ी के बहुचर्चित हिट एंड रन मामले में आरोपी देवांशु पाल चौधरी को कोर्ट से जमानत मिल गई है. इसको लेकर तरह-तरह की बातें हो रही है. कुछ लोग कानून पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ लोग आश्चर्य भी व्यक्त कर रहे हैं. हालांकि इसमें आश्चर्य या हैरानी कुछ भी नहीं है. यह तो होना ही था. आमिर अली के केस में भी कल को कुछ इसी तरह की बात सामने आए या अदालत उसे ठोस सबूत के अभाव में जमानत पर रिहा कर दे तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी. क्योंकि यह पुलिस की इन्वेस्टिगेशन, ठोस सबूत और साक्ष्य पर निर्भर करता है.

एक था मोहम्मद अब्बास, जो जेल में बंद है. अदालत ने उसे हत्यारा करार दिया है. मोहम्मद अब्बास के खिलाफ सिलीगुड़ी में जनाक्रोश कुछ ऐसा ही था, जैसा कि गुरुंग बस्ती कांड में आमिर अली के खिलाफ लोगों का है. अदालत में पेश करने के दिन उसके खिलाफ लोगों का हंगामा कुछ ऐसा ही था, जब एक समय मोहम्मद अब्बास को सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश किया गया था. तब उसे भी जनाक्रोश का सामना करना पड़ा था.

गुरुंग बस्ती कांड में आरोपी आमिर अली और उसका पूरा परिवार जेल में है. जबकि आमिर अली पुलिस हिरासत में, जहां पुलिस उससे कडी पूछताछ कर रही है. सिलीगुड़ी में तकनीकी अथवा व्यावहारिक रूप से यह घटना उस तरह की तो नहीं है, जिसमें मोहम्मद अब्बास ने एक नाबालिग स्कूली छात्रा की जान ली थी. मोहम्मद अब्बास ने तो एक बार में ही मृतका को मौत के घाट उतार दिया था. जबकि इस कांड में आरोपी आमिर अली लगभग रोज ही मृतका को मानसिक टॉर्चर पहुंचाता था. मृतका उससे तंग आ चुकी थी.

इस दृष्टिकोण से यह मामला अत्यंत गंभीर हो सकता है. लेकिन अभी तक पुलिस ने उसके खिलाफ जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और कोर्ट में उसकी पेशी की है, उसमें इस तरह की संवेदनशीलता नहीं है. हो सकता है कि बाद में सबूत या साक्ष्य मिलने के बाद जांच इन्वेस्टिगेशन टीम और जांच अधिकारी इसमें एक और धारा जोड़ सके.

मोहम्मद अब्बास के खिलाफ प्रधान नगर पुलिस ने हत्या और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. इसके साथ ही पुलिस ने भाग दौड़ करके और कठिन मेहनत के बाद सबूत और साक्ष्य एकत्र करते हुए उसके खिलाफ चार्जशीट अदालत में पेश की थी. जिस पर सुनवाई चली और आखिरकार मोहम्मद अब्बास को सजा हुई. फिलहाल मोहम्मद अब्बास जेल की सलाखों के पीछे है. सवाल यह है कि इस केस में क्या आमिर अली के साथ भी ऐसा ही होगा?

कानून के जानकार मानते हैं कि यह पुलिस की चार्जशीट पर निर्भर करता है. अभी तक आमिर अली के खिलाफ पुलिस को कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है और ना ही उस तरह के साक्ष्य जो उसे एक अपराधी सिद्ध कर सकें. आमिर अली के खिलाफ शिकंजा कसने और पक्का सबूत पाने की उम्मीद में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की टीम कई पहलुओं से इस मामले की जांच कर रही है.

सूत्रों ने बताया कि इस मामले की जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी आधारित की जा रही है. मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच, कॉल डिटेल्स, चैट, हिस्ट्री के साथ-साथ मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ध्यान दिया जा रहा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जो तथ्य मिले हैं, वह सबूत क्या आमिर अली को अपराधी सिद्ध कर सकते हैं? इस पर पुलिस अपने उच्च अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त कर रही है.

आमिर अली से पुलिस की पूछताछ, पूछताछ के सभी तरीकों से मिलता जुलता है. सूत्रों ने बताया कि भावनात्मक और सख्त दोनों तरीके से पुलिस पूछताछ कर रही है. उससे पूछताछ नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने तथा पोक्सो एक्ट के तहत प्रावधानों के अंतर्गत की जा रही है. लेकिन अभी तक कुछ ऐसा सामने नहीं आया है जिसके आधार पर पुलिस चार्जशीट बनाने की तैयारी कर सकती थी.

कानून के कुछ जानकारों का ऐसा भी मानना है कि चार्ज शीट पूरी होने तक आमिर अली जेल में रह सकता है. लेकिन जब पुलिस उसके खिलाफ चार्ज शीट पेश नहीं कर पाएगी तो सबूत और साक्ष्य के अभाव में वह अदालत से आसानी से बेल प्राप्त कर सकता है. पुलिस इस पहलू का भी ध्यान रख रही है. इसलिए आमिर अली के खिलाफ ठोस सबूत एकत्र करने में जुट गई है.

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