एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में पीने और पिलाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यह लोगों के लिए भले ही चिंता की बात हो, परंतु आबकारी विभाग और राज्य सरकार के लिए एक सुखद सूचना है. राज्य सरकार का खजाना बढ़ रहा है.
सिलीगुड़ी बंगाल का एक ऐसा शहर है, जहां प्राकृतिक आबोहवा, हरियाली और पहाड़ के बीच विभिन्न देशों की सीमा रेखा अवस्थित है, जिससे इस शहर की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है. यहां के लोग उदार हैं. अपनी जीवन शैली और रहन-सहन पर कमाई का अधिकांश पैसा खर्च कर डालते हैं. अगर सिलीगुड़ी के रहन-सहन और जीवन शैली की बात करें तो यहां 95% से अधिक लोग पीने और पिलाने में अपनी तबीयत को खुश करना पसंद करते हैं. विभिन्न सर्वेक्षणों और अध्ययनों में यह बात सामने आई है और समय-समय पर आबकारी विभाग भी इसकी पुष्टि करता रहा है कि पूरे बंगाल में सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों में शराब की सबसे ज्यादा खपत होती है.
राज्य आबकारी विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 1 मार्च से लेकर 18 मार्च तक लगभग 250 करोड रुपए की शराब की खपत सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों के लोगों ने की है और इसमें सिलीगुड़ी सबसे आगे है. दूसरे शहरों के मुकाबले शायद सिलीगुड़ी में ठेके भी बहुत ज्यादा है. 18 दिनों में 250 करोड़ की शराब पीना आसान बात नहीं होती. पीने वालों का भले ही परिवार टूट रहा हो, अलबत्ता राज्य आबकारी विभाग का खूब फायदा हुआ है. राजस्व में बढ़ोतरी से आबकारी विभाग गदगद हो गया है. पूरे राज्य में शराब से राजस्व प्राप्ति का आबकारी विभाग का लक्ष्य 51% रहा है. इनमें सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल का योगदान 56.25% रहा है. इसी से समझ सकते हैं कि सिलीगुड़ी के लोग पीने पिलाने में कितने आगे हैं.
हैरानी की बात तो यह है कि इस आंकड़े के बावजूद सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में पिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि में शराब की बिक्री में कमी आई है. कल्पना कीजिए कि अगर पिछले साल का रिकॉर्ड टूटता तो यह आंकड़ा कितना बड़ा होता. लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि सिलीगुड़ी में ना तो पीने वालों की कमी रही है और ना ही शराब की बिक्री में कमी आई है. बल्कि अनधिकृत सूत्रों ने बताया कि पहले से भी ज्यादा पीने और पिलाने वाले वाले बढ़े हैं. वास्तव में सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से शराब निर्माण से लेकर सिक्किम और भूटान की शराब की तस्करी भी बड़े पैमाने पर होती है.
आबकारी विभाग के सूत्रों ने बताया कि अलीपुरद्वार जिले से भूटान तथा दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी जिले से सिक्किम की शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है, जिसके कारण राज्य को राजस्व का भारी नुकसान होता है. लेकिन नुकसान के बावजूद उत्तर बंगाल से राज्य सरकार को दक्षिण बंगाल की तुलना में अधिक राजस्व की प्राप्ति होती है. अगर सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से बिहार को शराब की तस्करी ना हो तो आबकारी विभाग मालामाल हो सकता है. जलपाईगुड़ी आबकारी विभाग के स्पेशल कमिश्नर सुजीत दास के अनुसार उत्तर बंगाल से हमेशा ही राजस्व प्राप्ति सर्वाधिक होती रही है. वे स्वीकार करते हैं कि अगर अवैध रूप से शराब निर्माण और तस्करी बंद हो जाए तो यह आंकड़ा इतना हो सकता है कि स्वयं राजस्व विभाग भी हैरान रह सकता है. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर 56% से अधिक की आय हुई है. लेकिन अगर तस्करी पर लगाम लगे तो यह बहुत ज्यादा राजस्व प्राप्ति में एक रिकॉर्ड कायम कर सकता है.
आबकारी विभाग के सूत्रों ने बताया कि आबकारी विभाग आय बढ़ाने के लिए और सिलीगुड़ी तथा आसपास के इलाकों से अवैध रूप से की जा रही शराब तस्करी को बंद करने तथा सिक्किम से अवैध रूप से लाई जा रही शराब की तस्करी को रोकने के लिए माफियाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाएगा. उन्होंने बताया कि जनवरी से अब तक लगभग डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की भूटान की शराब जब्त की गई है और सिक्किम की शराब भी बड़े पैमाने पर आबकारी विभाग के अधिकारियों ने पकड़ी है.
बहुत जल्द आबकारी विभाग सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में देसी और नकली शराब के खिलाफ जोरदार अभियान चलाएगा. राज्य सरकार ने भी आबकारी विभाग को सख्त निर्देश दे रखा है कि शराब तस्करी पर बिल्कुल रहम ना की जाए और सरकार के राजस्व को बढ़ाने के लिए सभी तरह के कदम उठाए जाएं.