March 30, 2026
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देश में ‘लॉकडाउन’-सी स्थिति ! कोरोना के बाद यह दूसरा बड़ा संकट!

The country is in a state of lockdown! This is the second major crisis after the coronavirus.

क्या आप महसूस कर रहे हैं कि धीरे-धीरे आप लॉकडाउन की स्थिति में जा रहे हैं? एलपीजी गैस ने पूरे भारत में हाहाकार मचा दिया है. प्रीमियम पेट्रोल की कीमत बढ़ चुकी है. इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत पहले ही 22 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुकी है. अब नौबत ऐसी आ चली है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की महंगाई तो छोड़िए, उनका मिलना मुश्किल हो सकता है. पेट्रोलियम पदार्थों में महंगाई और किल्लत का असर आपकी जेब, रोजगार, नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है. स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका संकेत दे दिया है.

जब भारत समेत पूरा विश्व कोरोना महामारी की गिरफ्त में था तो दुनिया के लगभग सभी देशों में लॉकडाउन लगा था. भारत में तो महीनो तक लॉकडाउन लगा रहा. कोरोना ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह करके रख दिया. भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था. नौकरी, रोजगार,उद्योग, जान माल की व्यापक क्षति हुई थी.कोरोना संकट काल से उबरने में भारत को बरसों लग गए.

अब एक बार फिर से कोरोना जैसा संकट भारत पर मंडराने लगा है. इस संकट का जन्मदाता ईरान इजरायल युद्ध है, जिसका असर दुनिया के देशों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ने लगा है. यह संकट कितना बड़ा और गहरा है, इसका संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए भाषण से पता चल जाता है, जहां उन्होंने माना है कि कोरोना जैसा हालात उत्पन्न हो गया है और भारतीयों को इसका मुकाबला करने के लिए एकजुट रहने की जरूरत है.

जानकार मानते हैं कि यह संकट लंबा चल सकता है. अगर युद्ध आज खत्म होता है तब भी इस संकट का मुकाबला करने में कम से कम 2 से 3 साल लग सकते हैं. भारत का सबसे बड़ा संकट ऊर्जा संकट है जो सीधे महंगाई को प्रभावित करता है. एलपीजी गैस का अभाव तो दिख ही रहा है. पेट्रोलियम पदार्थों पर इसका गंभीर असर पड़ने जा रहा है. कच्चे तेल की महंगाई चरम सीमा पार कर गई है. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल खाड़ी देशों से आयात करता है.

अगर तेल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ जाएगी. इसका मतलब यह है कि किचन से लेकर खाने पीने की हर वस्तु महंगी होगी. पिछले कई दिनों से शेयर मार्केट टूट रहा है. निवेशक चिंतित है. यह सीधे-सीधे बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है. खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं. भारत की अर्थव्यवस्था में उनकी कमाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अब ऐसे लोग खाड़ी देश से वतन वापसी कर रहे हैं. भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने वाला है.

पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारतीय वित्तीय बाजार पर साफ दिख रहा है. रुपया लगातार नीचे गिर रहा है. शेयर मार्केट तो इस कदर टूट गया है कि पिछले 1 साल में इतना ज्यादा टूटा नहीं था. अगर आने वाले समय में यह संकट बढ़ता है तो इसका प्रभाव बाजार, नौकरी और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है. कच्चे तेल के मूल्य में वृद्धि से उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स तथा अन्य सामान के आवक में भी प्रभाव पड़ता है. समय पर उनकी आपूर्ति न होने से कृषि, उद्योग और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा.

संसद में दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और उनकी चिंता का सारांश यह है कि अब समय आ गया है कि भारत कोरोना जैसे हालात का एकजुट होकर मुकाबला करे. कोरोना काल में लॉकडाउन दूसरे तरह का था. यह लॉकडाउन लोगों पर सीधा हमला करने वाला है. यह कोरोना लॉकडाउन से भी बड़ा खतरनाक होगा. इसमें कोई दो राय नहीं है. खाड़ी संकट ने एक आम आदमी को जेब, रोजगार और रोजमर्रे की जिंदगी से महरूम करना शुरू कर दिया है. मौजूदा हालात ऐसे हैं कि वहां भारत सरकार भी कुछ करने की स्थिति में नहीं है. देशवासियों को कोरे आश्वासन के अलावा भारत सरकार के पास देने के लिए कुछ भी नहीं है.

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