April 14, 2024
Sevoke Road, Siliguri
उत्तर बंगाल जुर्म सिलीगुड़ी

सिलीगुड़ी के सिटी सेंटर में सिनेमा देखना साइबर ठगों पर भारी! अपराधी कितना भी शातिर क्यों ना हो, वह पकड़ा जाता ही है!

सिलीगुड़ी के सिटी सेंटर स्थित एक सिनेमा हॉल में शैतान फिल्म का नाइट शो चल रहा था. हाॅल में ज्यादा दर्शक नहीं थे. स्थानीय दर्शकों के साथ ही हाल में कुछ अजनबी लोग बैठकर फिल्म देख रहे थे. उन्हें कुछ डर भी लग रहा था. यह डर कैसा था, यह वह समझ नहीं पा रहे थे. वे सभी कोलकाता से आए थे और इस वक्त समय बिताने के लिए सिनेमा हॉल में एकत्रित हुए थे. कुछ लोगों को लग रहा था कि उन्होंने मुसीबत को पीछे छोड़ दिया है. लेकिन यह उनका भ्रम था. तभी वहां सादी वर्दी में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और माटीगाड़ा थाना की पुलिस पहुंची.

सिनेमा हॉल में भीड़भाड़ नहीं थी. इसलिए पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी. दूर से ही वह पहचान में आ रहे थे कि वे सिलीगुड़ी अथवा आसपास के लोग नहीं हैं. सभी एक साथ ही बैठे हुए थे. पुलिस की टीम अब तक अपने रंग में आ चुकी थी. मुंबई पुलिस के अधिकारी भी टीम में शामिल थे, जिन पर नजर पड़ते ही वहां बैठे लोग सन्नाटे में आ गए. खतरा महसूस करते ही वे वहां से भागने की कोशिश करने लगे. लेकिन पुलिस ने उन्हें यह मौका नहीं दिया और सभी लोगों को साथ में लेकर सिनेमा हॉल से बाहर लेकर चली गई.

पुलिस ने सिनेमा हॉल से 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था इन 12 लोगों में दो महिलाएं भी शामिल थी. पूछताछ के बाद मुंबई पुलिस ने 7 लोगों को हिरासत में लिया. बाकी लोगों को छोड़ दिया गया. आखिर पुलिस ने देर रात में सिनेमा हॉल में दबिश क्यों दी? पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार क्यों किया? वह कौन लोग थे जिनकी तलाश के क्रम में मुंबई पुलिस सिलीगुड़ी पहुंची थी? पकड़े गए लोगों ने क्या गुनाह किया था? इत्यादि तमाम बातों की जानकारी के लिए घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चलते हैं.

यह बताने की जरूरत नहीं है कि इन दिनों देश भर में साइबर ठग अधिक सक्रिय हो गए हैं. साइबर ठगों की पहुंच हर क्षेत्र में हो गई है. वह चुन चुन कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. ग्राहक को फसाने के लिए उनके पास एक से बड़ी एक नायाब योजनाएं होती हैं. जिन 7 लोगों को सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस और SOG की सहायता से मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने पकड़ा है, उनके नाम रियान साहा दास, सुजय नसकर, अरुणभ हलदार, शेख राजीव, तमोजित सरकार, रोहित वैद्य और रिवतम मंडल है. यह सभी कोलकाता के रहने वाले हैं. इन सातों युवकों में रियान साहा दास मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. वह कोलकाता में एक फर्जी कॉल सेंटर चलाता है.

कोलकाता में ही उसने तथाकथित रूप से एक कॉल सेंटर का दफ्तर खड़ा कर लिया था. सूत्रों के अनुसार पकड़े गए अन्य युवक दास के अधीन काम करते थे और उसके इशारे पर ही ग्राहकों को ठगने के नए-नए तरीके अपनाते थे. दास का कारोबार काफी लंबा चौड़ा था. देश के कई प्रमुख शहरों के साथ-साथ विदेश में भी उसके तार जुड़े थे. यह पूरा काम पूरी सतर्कता और होशियारी से किया जा रहा था. रियान साहा दास के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह ग्राहकों की आवश्यकता तथा उसके मूड को भांप लेता था. किस ग्राहक को किस तरीके से फसाना है, यह उसके बाएं हाथ का काम था. उसके निर्देश पर बाकी लोग काम करते थे. कदाचित यह लोग पकड़े नहीं जाते. लेकिन इसी बीच लंबा हाथ मारने के चक्कर में उन्होंने कुछ ऐसी गलती कर दी, जिसके बाद कानून के हाथ उन तक पहुंच गए.

29 फरवरी से लेकर 3 मार्च तक बैंक अकाउंट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी. यह खबर सुर्खियों में थी और पुलिस को भी शिकायत मिली थी. छोटी मोटी ठगी की घटनाओं के बाद 7 मार्च को मुंबई क्राइम ब्रांच के पास एक ऐसा मामला सामने आया, जिसके बाद मुंबई अपराध शाखा के भी होश उड़ गए. इसके बाद मुंबई अपराध शाखा की पुलिस ने तय कर लिया कि ऐसे साइबर ठगों तक पहुंचना जरूरी हो गया है. दरअसल रियान साहा दास के कॉल सेंटर से इंग्लैंड में रहने वाली एक लड़की को फोन किया गया था. उसे क्रेडिट कार्ड सिक्योर और बैंक संबंधी सभी जानकारी बताने की आड़ में 29 फरवरी से लेकर 3 मार्च यानी कुल चार दिनों में दास के गैंग ने लड़की के क्रेडिट कार्ड और बैंक अकाउंट से कुल डेढ करोड रुपए उड़ा लिये थे. यह रकम काफी बड़ी थी.

6 मार्च को लड़की ने डरते डरते अपने पिता को सारी बात बता दी. इसके बाद पिता ने मुंबई के साउथ साइबर क्राइम ब्रांच में इसकी शिकायत दर्ज कराई. दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि साइबर ठग ने फोन करके बैंक अकाउंट संबंधी विषय बताकर ओटीपी लेकर उनके मुंबई वाले बैंक अकाउंट से लगभग डेढ करोड रुपए उड़ा लिए हैं. शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि कोलकाता में एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए कॉल सेंटर चलता है. वहीं से यह ठगी की गई है. मुंबई अपराध शाखा ने इस मामले को प्रमुखता दी और साइबर ठगों तक पहुंचने का फैसला कर लिया. पुलिस ने उस फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया जिसके जरिए ग्राहक से बात होती थी और डेढ़ करोड़ रुपए की ठगी की गई थी. इसके जरिए मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम कोलकाता पहुंची और फिर फोन के सिग्नल और लोकेशन का पता लगाते हुए शांतिनिकेतन पहुंच गई.

अब तक मुंबई पुलिस को निराशा ही हाथ लगी थी. अपराधी बेहद शातिर थे. उन्हें भी भनक लग चुकी थी कि पुलिस उनके पीछे पड़ चुकी है. इसलिए वह स्थान बदल रहे थे. जब उन्होंने देखा कि मुंबई पुलिस कोलकाता में उनके ठिकाने और उन सभी स्थानों पर तलाशी अभियान चला रही है जहां वे मिल सकते हैं, तो वे सभी कोलकाता से प्राइवेट कार करके सिलीगुड़ी पहुंच गए. उन्हें यह स्थान काफी सुरक्षित लगा. वे यही समझ रहे थे कि मुंबई पुलिस कोलकाता में छानबीन करके लौट जाएगी और उसके बाद वह फिर से कोलकाता पहुंच जाएंगे. लेकिन एक कहावत है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों ना हो, वह कहीं ना कहीं ऐसी चूक कर बैठता है जहां कानून के हाथ उसके गिरेबान तक पहुंच जाते हैं. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है.

सिटी सेंटर के उक्त हॉल में शैतान फिल्म का शो चल रहा था. इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन टिकट बुक कराई थी. यही वह चूक साबित हुई. इसके जरिए वे पुलिस की निगाह में आ गए. अगर उन्होंने ऑनलाइन बुकिंग नहीं कराई होती तो शायद वह पकड़े नहीं जाते. पुलिस के विशेष डिटेक्टिव यंत्रों से इसकी जानकारी हो जाती है. और उसके बाद पुलिस का काम आसान हो जाता है. माटीगाड़ा थाना की पुलिस, एसओजी और मुंबई अपराध शाखा की टीम के संयुक्त प्रयास से सभी सातों पकड लिए गए. उसी दिन मुंबई अपराध शाखा की पुलिस ने सभी सातों युवकों को सिलीगुड़ी अदालत में पेश किया और ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मुंबई रवाना हो गई. मुंबई में पकड़े गए सभी सातों ठगों से अपराध शाखा की टीम ने पूछताछ करके उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है.

(अस्वीकरण : सभी फ़ोटो सिर्फ खबर में दिए जा रहे तथ्यों को सांकेतिक रूप से दर्शाने के लिए दिए गए है । इन फोटोज का इस खबर से कोई संबंध नहीं है। सभी फोटोज इंटरनेट से लिये गए है।)

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